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आज है 'शोले के ठाकुर' का जन्मदिन, जानिए कुछ दिलचस्प बातें

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 July 2016, 17:35 IST
(फिल्म-शोले )

संजीव कुमार यानी शोले के ठाकुर का आज जन्मदिन है. हिंदी सिनेमा को एक नई पहचान देने वाले हरीभाई जरीवाला यानी संजीव कुमार का जन्म 9 जुलाई 1938 को हुआ था.

गुजरात के सूरत में साधारण घर में पैदा हुए हरीभाई सात साल की उम्र में मुंबई पहुंचे थे. हीरो बनने की ख्वाहिश में अभिनय के लिए हरीभाई इप्टा से जुड़े. उसके बाद वे इंडियन नेशनल थिएटर से भी जुड़े.

साल 1960 में संजीव कुमार ने फिल्मालय बैनर के तले बनी फिल्म 'हम हिंदुस्तानी' के जरिए फिल्मी दुनिया में कदम रखा.

लेकिन सिनेमा के पर्दे पर उन्हें असली पहचान साल 1968 में रिलीज हुई 'राजा और रंक' से मिली. फिल्मी जगत में युवा संजीव कुमार ने उम्रदराज व्यक्ति की भूमिका सबसे ज्यादा निभाई.

उन्होंने फिल्मों में जया बच्चन के ससुर, प्रेमी, पिता और पति की भूमिकाएं भी निभायीं. कई फिल्मों में उन्होंने अपनी उम्र से अधिक उम्र वाले व्यक्ति के किरदार निभाए और उन किरदारों को काफी पसंद किए गए.

उम्रदराज व्यक्ति के ऐसा जीवन्त अभिनय को देखकर स्वयं पृथ्वीराज कपूर भी दंग रह गये थे. 

साल 1972 में संजीव कुमार की मुलाकात गुलजार से हुई. गुलजार ने संजीव कुमार की फिल्म 'सुबह-ओ-शाम' देखी और उससे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने संजीव कुमार के साथ मिलकर साल 1973 में कोशिश, साल 1975 में आंधी, साल 1975 में मौसम, साल 1980 में अंगूर, साल 1982 में नमकीन जैसी बेहतरीन फिल्में भारतीय सिनेमा को दी.

फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ अभिनय के लिए उन्होंने तीन राष्ट्रीय पुरस्कार और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीते. उन्हें साल 1977 में फिल्म ‘अर्जुन पंडित’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार और साल 1976 की फिल्म ‘आंधी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला.

साल 1975 में आई हिंदी फिल्म सिनेमा की माइल स्टोन फिल्म 'शोले' में संजीव कुमार ने ठाकुर का यादगार रोल निभाया था.

रमेश सिप्पी की इस फिल्म में ठाकुर का किरदार धर्मेन्द्र निभाना चाहते थे. जिसके कारण निर्देशक रमेश सिप्पी बड़ी उलझन में पड़ गए.

उस समय धर्मेन्द्र अभिनेत्री हेमा मालिनी के दीवाने हुआ करते थे और संजीव कुमार भी हेमा को चाहते थे. इस उलझन से निकलने के लिए रमेश सिप्पी ने धर्मेन्द्र से कहा कि तुमको वीरू का रोल निभाते हुए हेमा के साथ ज्यादा से ज्यादा रोमांस करने का मौका मिलेगा.

यदि तुम ठाकुर बनोगे तो मैं संजीव कुमार को वीरू का रोल दे दूंगा. उसके बाद धर्मेन्द्र ने ठाकुर का किरदार निभाने का आइडिया छोड़ दिया और आज उसी ठाकुर के किरदार की वजह से संजीव कुमार को हमेशा याद किया जाता रहेगा.

संजीव कुमार कभी अपना घर नहीं बसा पाए. संजीव न तो शादी कर पाए और न ही मुंबई में घर बना पाए. उनकी रिश्ते की बहन अंजू महेंद्र का कहना है कि संजीव कुमार की मुंबई में अपना एक बंगला खरीदना चाहते थे.

संजीव को जब भी कोई बंगला पसंद आता है और जब तक उसके लिए पैसे जुटाते तब तक उसका दाम बढ़ जाता और यही कारण था कि मरने तक वो अपना बंगला नहीं ले पाए.

जहां तक शादी का सवाल रहा तो संजीव कुमार का दिल कई अभिनेत्रियों पर आया, लेकिन वो कुछ मामलों में इतने शक्की थे कि उनके साथ वो अंतिम मुकाम यानी शादी तक नहीं पहुंच पाए.

ऐसा कहा जाता है कि संजीव कुमार हेमा मालिनी को बेहद चाहते थे, लेकिन हेमा मालिनी ने उनको ना कह दी थी.

हेमा के अलावा एक और अभिनेत्री नूतन के बारे में कहा जाता है कि शादीशुदा होने के बावजूद संजीव कुमार ने नूतन को प्रपोज किया था, जिससे नूतन इतनी नाराज हुईं कि उन्होंने सरेआम संजीव कुमार को थप्पड़ मार दिया था.

वहीं दूसरी ओर ऐसा भी कहा जाता है कि सुलक्षणा पंडित, नीता मेहता और जयश्री टी के जैसी अभिनेत्रियां संजीव कुमार के साथ शादी करने के लिए बेताब थी, लेकिन संजीव कुमार उनसे दूर भागते रहे.

दुनिया के लिए अबूझ पहेली बने अभिनेता संजीव कुमार यानी हरीभाई जरीवाला 6 नवंबर 1985 को 47 साल की कम उम्र में चल बसे.

First published: 9 July 2016, 17:35 IST
 
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