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जब पिता के कहने पर कुश्ती छोड़ सूफी कव्वाली गाने लगे वडाली ब्रदर्स

आकांक्षा अवस्थी | Updated on: 9 March 2018, 13:02 IST

'तू माने या न माने दिलदारा' सूफी संगीत को पूरी दुनिया में मशहूर करने में एक अहम नाम है 'वडाली ब्रदर्स'. मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें करीब 20 वर्ष पहले तुलसी सम्मान से नवाजा था. एक इंटरव्यू में दो भाइयों में बड़े प्यारेलाल ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया था कि वे कभी स्कूल नहीं गए, जो पिता ने सिखाया वही याद है. बचपन में खूब पहलवानी की थी और कई खिताब भी जीते थे.

 

पिता ने ही संगीत में उनकी दिलचस्पी जगाई और उन्हीं के आदेश पर संगीत सीखना भी शुरू किया. उन्होंने बताया था कि यदि पिता का मार्गदर्शन और अनुशासन नहीं होता तो शायद दोनों भाई कुश्ती ही लड़ रहे होते. पिता की वजह से इतना मान-सम्मान मिला और बड़े-बड़े लोग हमें सुनने के लिए आते हैं.

भले ही वडाली ब्रदर्स की जोड़ी टूट गयी हो लेकिन दोनों भाइयों की ये जुगलबंदी सूफी गानों की दुनिया में हमेशा गूंजती रहेंगी. ये हैं इस जोड़ी के कुछ बेहतरीन गाने.

तू माने या न माने दिलदारा वडाली ब्रदर्स का एवरग्रीन सांग है. 

तेरा शहर जो पीछे छूट रहा कुछ अंदर अंदर टूट रहा
रुमानियत से भरे इस गाने को वडाली ब्रदर्स के अंदाज ने कुछ अलग ही रंग दे दिया

'रंगरेज मेरे'
तनु वेड्स मनु का ये गाना बॉलीवुड में एक अलग ही मुकाम पर है. तनु वेड्स मनु कहानी और एक्टिंग के लिए जितना फेमस हुई उतना ही मशहूर है ये गाना

सूफी गानों का सबसे मशहूर गाना 'दमा दम मस्त कलंदर' जिसे वडाली ब्रदर्स ने अलग ही एनर्जी और रुमानियत के साथ गाया है.

'चरखा' सूफी सांग्स का एक मशहूर गाना है. जिसके बाद वडाली ब्रदर्स ने सूफी कव्वाली में एक नया मुकाम पा लिया.

आज भले ही प्यारेलाल वडाली हमे छोड़ कर चले गए. मगर उनकी आवाज़ और उनका सूफियाना अंदाज हमेश उनके गानों के साथ संगीत की दुनिया में गुनगुनाता रहेगा. 

 

First published: 9 March 2018, 13:01 IST
 
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