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क्या कार्बन बजट से निकलेगा ग्लोबल वार्मिंग का समाधान?

निहार गोखले | Updated on: 4 March 2016, 0:25 IST
QUICK PILL
  • वैश्विक तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी स्वीकार की जाती है. बल्कि मानक बढ़ोतरी 1.5 डिग्री सेल्सियस है. कार्बन बजट को 590 से 2400 गीगाटन के बीच रहने का अनुमान है.
  • गैस की मात्रा बढ़ने पर वार्मिंग भी ज्यादा होगी और कुछ गैसेें ऐसी हैं जो धरती को एक निश्चित तापमान तक गर्म करती हैं. इसलिए धरती को गर्म करने के लिए हमें कुछ मात्रा में गैसों की जरूरत होगी और यह लिमिट ही कार्बन बजट है.

जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में पेरिस समझौते पर जबरदस्त मेहनत की गई थी. हालांकि एक नई स्टडी के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग से निपटने की दिशा में हमारा समय पहले के अनुमानित समय से आधी होनी चाहिए. इसकी वजह 'कार्बन बजट' है. यानी वातावरण में मौजूद कार्बन की मात्रा जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के मामले में मदद करता है.

ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए कार्बन बजट का नियंत्रित होना जरूरी है. यह एक ऐसी सीमा है जिसे हर हाल में पार नहीं किया जाना चाहिए. इस बजट को लेकर कई अनुमान है. यूएन समर्थित इंटरगवर्मेंट पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) इस बजट को लेकर काम करने वाली सबसे बड़ी एजेंसी है.

हालांकि नई स्टडी बताती है कि वास्तविक कार्बन बजट अनुमानति बजट के मुकाबले महज आधी होनी चाहिए. जलवायु परिवर्तन को लेकर यह शोध जर्नल नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित हुआ है. इसमें कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से निपटना तात्कालिक चुनौती है. हमारे पास इससे निपटने के लिए करीब 15 साल है.

क्या है कार्बन बजट?

कार्बन बजट का विचार ग्लोबल वार्मिंग के विज्ञान से आया है. ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन औद्योगिक संयंत्रों की तरफ से होता है और वह फिर वातातवरण में फंस कर रह जाता है. जैसे कि गार्डेन ग्रीनहाउस में होता है, वैसे ही वातावरण में प्रवेश करने वाली सूर्य की किरणें कार्बन डाईऑक्साइड की वजह से वातावरण से बाहर नहीं निकल पाती हैं. और फिर इसकी वजह से ग्लोबल वार्मिंग की शुरुआत होती है.

गैस की मात्रा बढ़ने पर वार्मिंग भी ज्यादा होगी और कुछ गैसेें ऐसी हैं जो धतरी को एक निश्चित तापमान तक गर्म करती हैं. इसलिए धरती को गर्म करने के लिए हमें कुछ मात्रा में गैसों की जरूरत होगी और यह लिमिट ही कार्बन बजट है.

वैश्विक तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी स्वीकार की जाती है. बल्कि मानक बढ़ोतरी 1.5 डिग्री सेल्सियस है. कार्बन बजट को 590 से 2400 गीगीटन के बीच रहने का अनुमान है.

क्या कहता है नया रिसर्च

24 फरवरी को नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित रिपोर्ट में कार्बन बजट के अनुमानों का अध्ययन किया गया है. शोध टीम में ऑक्सफोर्ड समेत कई दूसरे देशों के वैज्ञानिक शामिल थे. उन्होंने पाया कि ऊंचे कार्बन बजट की गणना के दौरान केवल कार्बन डाईऑक्साइड को ही कैलकुलेट किया गया. 

आकलन के दौरान किसी अन्य गैस की गणना नहीं की गई. लेकिन ग्लोबल वार्मिंग में कार्बन डाईऑक्साइड के मुकाबले अन्य गैसों मसलन मीथेन का भी योगदान होता है.

शोध बताती है कि वैज्ञानिकों के लिए कार्बन डाईऑक्साइड के मुकाबले अन्य गैसों की स्थिति से निपटना ज्यादा मुश्किल है. यही समस्या है कि इस शोध को ज्यादा स्वीकार किया गया है क्योंकि इसमें केवल कार्बन डाईऑक्साइड के आकलन को स्वीकार किया गया है.

जब अन्य गैसों को इस आकलन में शामिल किया जाता है तो उसके मुकबले कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बेहद कम होती है. यह कार्बन डाईऑक्साइड के मुकाबले 590 से 1,240 गीगाटन है. 

यह वैश्विक तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस बनाए रखने के लिए जरूरी है. हालांकि बजट इस तापमान को 1.5 डिग्री के भीतर रखने के लिए काफी नहीं है.

1.5 डिग्री सेल्सियस के तापमान को काबू में करना ज्यादा आसान है. ऐसा इसलिए क्योंकि 2 डिग्री बढ़ोतरी होने की वजह से मुंबई और लंदन जैसे शहर डूब जाएंगे. 

2014 में दुनिया ने 40 गीगाटन कार्बन डाईऑक्सइड का उत्सर्जन किया. अगर यह नहीं घटा तो हमें वैश्विक तापमान में 2 डिग्री बढ़ोतरी होने के लिए 10-15 साल का समय लगेगा. पहले के कार्बन बजट से हमें दोगुना समय मिलता है.

एएफपी से बातचीत के दौरान ऑस्ट्रिया के वैज्ञानिक जोयरी रोगेेजी ने कहा, 'अगर हमने अपने उत्सर्जन में तत्काल कटौती शुरू नहीं करते हैं तो हम अगले कुछ दशक में नष्ट हो जाएंगे.'

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First published: 4 March 2016, 0:25 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

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