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जानलेवा प्रदूषण: दिल्ली की जहरीली हवा साफ करने के कुछ फ़ौरी और कुछ स्थायी नुस्खे

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 November 2016, 7:22 IST
QUICK PILL
  • दिवाली के मौक़े पर राजधानी में की गई आतिशबाज़ी ने पूरी दिल्ली में प्रदूषण की मात्रा यकायक बढ़ा दी. 
  • हालात इस कदर ख़राब हो गए कि दिल्ली सरकार को फ़ौरन प्रदूषण घटाने के लिए तमाम उपाय करने पड़े. 
  • फिलहाल चार तात्कालिक और चार दीर्घकालिक उपाय ऐसे हैं जिनकी मदद से दिल्ली की जहरीली हवा को वापस पटरी पर लाया जा सकता है.

देश की राजधानी में खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कुछ आपातकालीन कदम उठाए हैं. एक सप्ताह तक दिवाली की धूमधाम से जहरीली हो चुकी दिल्ली की फिजां ने कई रिकॉर्ड तोड़ डाले. तात्कालिक उपायों में बदरपुर बिजलीघर को पांच दिन के लिए बंद रखने, सभी तरह के निर्माण कार्य और मरम्मत 10 दिन तक नहीं करने और इस दौरान स्कूल नहीं खोलना शामिल हैं.

मगर यह कोई स्थाई समाधान नहीं है जो दिल्ली सरकार की ओर से जानलेवा प्रदूषण को कम करने और लोगों को इससे बचाने के लिए निकाला गया हो. रविवार की बैठक में मौजूद विशेषज्ञों ने इस वायु प्रदूषण से निपटने के लिए जो तात्कालिक और दीर्घकालिक उपाय सुझाए हैं, उन पर देश-दुनिया के अन्य हिस्सों में भी काम किया जा सकता है.

तात्कालिक उपाय

वाहनों पर प्रतिबंध: केजरीवाल की घोषणा में कहा गया है कि विज्ञान और पर्यावरण केन्द्र के मुताबिक अनियंत्रित यातायात पर रोक-टोक आवश्यक है क्योंकि जमीनी स्तर पर प्रदूषण के लिए वाहनों से निकलने वाला धुआं सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं. डीजल कारों व ट्रकों को विशेष रूप से रोकना होगा.

ऑड-ईवन: दिल्ली में दो बार कारों के संचालन पर अपनाया गया ऑड-ईवन फॉर्मूला सरसरी तौर पर कारगर रहा जिसमें आधे वाहन सड़क पर नहीं उतरे. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रदूषण में ज्यादा कटौती नहीं होगी जबकि कुछ अन्य लोगों का कहना है कि डीजल कारों से होने वाले नुकसान को तो कम किया ही जा सकता है.

काम के समय में कटौती: अल्पकालिक उपायों में एक अन्य तरीका काम के घंटों में कमी का भी सुझाया जा रहा है जिसे विश्व के कई शहरों में लागू किया गया है. दिल्ली की आबो हवा सुबह और शाम सबसे ज्यादा दमघोटू पाई गई है. कुछ कार्मिकों के काम के घंटों में फेरबदल कर व्यस्त समय में प्रदूषण के स्तर को कम करने में मदद मिलेगी.

बिजली संयंत्र: दिल्ली की हवा को जहरीला बनाने में अकेला बदरपुर ताप संयंत्र ही जिम्मेदार नहीं है. आईआईटी कानपुर के एक अध्ययन में कहा गया है कि तीन सौ किलोमीटर के दायरे में चल रहे सभी बिजली संयंत्र राजधानी की हवा का दूषित कर रहे हैं.

दीर्घकालिक उपाय

क्षेत्रीय नियोजन: वायु प्रदूषण से निबटने के लिए क्षेत्रीय कार्य योजना बनाने की जरूरत है. ग्रीन पीस इंडिया के मुताबिक यह योजना पंजाब से लेकर पश्चिम बंगाल तक लागू की जाए. इस कार्ययोजना में अन्तरराज्यीय संयुक्त योजनाओं और उर्जा संयंत्रों में प्रदूषण निरोधक मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके.

पुरानी कारों की वापसी: खटारा हो चुके वाहनों, कारों की वापसी पर नजर रखने के लिए बड़ी योजना पर काम हो. उर्जा और संसाधन संस्था की रिपोर्ट के अनुसार छठे चरण के ईंधन में परिवर्तित करने समेत ऐसे वाहनों को प्रतिबंधित करना ज्यादा जरूरी है.

कृषि का कचरा: पंजाब और हरियाणा में खेतों में जलाया जाने वाला कचरा प्रदूषण बढ़ाता है जबकि कृषि से उत्पन्न कई फालतू चीजें नई तकनीक से पुन: काम में लेने लायक बनाई जा सकती हैं. इसके लिए कई तरह की तकनीकें उपलब्ध हैं. सरकार को इन तकनीकों पर किसीनों को सब्सिडी मुहैया करवानी चाहिए. इसके लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा सकता है. पर्यावरण मंत्रालय ने हाल ही घोषणा की है कि दिल्ली सरकार इस दिशा में सकारात्मक पहल कर सकती है.

नई ईंट-भटृा तकनीक: टेरी ने सिफारिश की है कि सुपर क्रिटिकल तकनीक से उर्जा संयंत्रों और ईंट-भटृों में उत्पादन तथा सफाई को बेहतर रूप दिया जा सकता है.

First published: 8 November 2016, 7:22 IST
 
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