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वायु प्रदूषण के कारण बच्चे कर रहे इस गंभीर समस्या का सामना, नई रिसर्च में हुआ खुलासा

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 November 2020, 16:16 IST


वायु प्रदूषण के कारण हर सालों लाखों बच्चे अपनी जान गंवा देते हैं. वायु प्रदूषण का असर ना सिर्फ बच्चों पर पड़ता है बल्कि सभी वर्ग के लोगों इसकी चपेट में आते हैं. वहीं अब एक नई रिसर्च में चौंकाने वाली बात सामने आई है. बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ द्वारा किए गए शोध के अनुसार, अगर कोई महिला गर्भावस्था के दौरान उस जगह रहती है जहां की वायु प्रदूषित होती है तो ऐसे में जन्म लेने वाले बच्चों को अपने शुरूआती जीवन में हाई ब्लड प्रेशर का सामना करना पड़ सकता है.

इस रिसर्च के दौरान शोधकर्ताओं ने बच्चों के आस पास के वातावरण का अध्ययन किया है. इस दौरान गर्भावस्था के दौरान माताओं के निवास स्थान, बच्चे के जन्म के बाद उसका निवास और बाद में बच्चों के घर की जगह पर भी ध्यान दिया गया है. इसके बाद टीम ने बाकी के पहलूओं पर भी ध्यान दिया, जिसमें बच्चों के पास के पर्यावरण, यातायात, वायु और ध्वनि प्रदूषण और प्राकृतिक से उनकी निकटता का अध्ययन किया है.


इसके बाद शोधकर्ताओं की टीम ने चार से पांच साल की उम्र के बच्चों के ब्लड प्रेशर का आकलन किया. इस विश्लेषण से पता चला कि महिला द्वार गर्भ धारण करने के बाद से गर्भावस्था के 27 सप्ताह तक, अगर महिला वायु प्रदूषण के उच्च स्तर के संपर्क में होती है तो बचपन में उसके बच्चे को उच्च रक्तचाप का सामना करना पड़ सकता है.

इस रिसर्च में सामाने आया कि हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) प्रदूषण में 9.1 μg / m3 की वृद्धि ब्लड प्रेशर में 0.9 mmHg वृद्धि के साथ जुड़ी है.

इस विश्लेषण के आधार पर शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि हर पांच में से एक बच्चा शहरी वातावरण में रहता है और जहां वायु प्रदूषित होती है, और वो बच्चे जो प्रदूषित वायु के संपर्क में नहीं आते हैं उनकी तुलना में ब्लड प्रेशर की समस्या पाई जाती है.

First published: 14 November 2020, 16:16 IST
 
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