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गायत्री प्रजापति बर्खास्त: 2जी घोटाले से भी गहरी है उत्तर प्रदेश का खनन घोटाले की जड़

आवेश तिवारी | Updated on: 12 September 2016, 15:03 IST

प्रकृति का नाश करने पर उतारू लोगों की भीड़ को सत्ता का संरक्षण मिल गया है. ऐसे ही लोगों का स्वर्ग बन गया है उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल जहां गिट्टी-बालू  का अवैध खनन जमाने से अबाध जारी है. उत्तर प्रदेश के खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को भले ही मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया हो लेकिन इस अवैध खनन की जड़े केवल एक मंत्री की बर्खास्तगी से खत्म होने वाली नहीं है.

प्रदेश की सोनभद्र-सिंगरौली पट्टी पत्थरों के गोरखधंधे का जीता जागता नमूना है. यह  बात आश्चर्यजनक किन्तु सच है कि सोनभद्र का खनन घोटाला यूपीए  सरकार के 2 जी घोटाले से कम नहीं है, इसमें न सिर्फ मौजूदा सरकार बल्कि पूर्व की सरकारें भी शामिल रही हैं.

न्यायालय और पर्यावरण मंत्रालय के सीने पर चढ़कर कराये जा रहे इस अवैध  खनन में प्रदेश के तमाम मंत्री विधायकों और नौकशाहों के अलावा तमाम बाहुबली भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, समूची पारिस्थितकी छिन्न-भिन्न हो गयी है. कभी जिस सोन घाटी में खेत खलिहान लहलहाते थे वहां इन अवैध कटान और खनन के चलते प्रदूषण और बंजर धरती नजर आती है. प्रदूषण का कहर न सिर्फ जीवित लोगों बल्कि गर्भस्थ शिशुओं के लिए भी काल बन रहा है.

अवैध खनन से हर माह 5 हजार करोड़ की काली कमाई

सोनभद्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में लगभग 200 क्रशर्स और उतनी ही संख्या में डोलोमाईट की खदाने हैं. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अगस्त, 2000 में सोनभद्र में किसी भी नयी क्रशर यूनिट के लगाये जाने पर प्रतिबंध लगाया था लेकिन उत्तर प्रदेश में सरकारों ने अपने चहेतों को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कमान सौंप कर इस आदेश की खुलेआम मुखालफत की और एक के बाद एक, नई इकाइयों को स्थापित किये जाने की मंजूरी दे दी.

वाराणसी-शक्तिनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर जहर उगलते इन कारखानों की लाइन लगी हुई है, यक़ीनन हम कह सकते हैं कि सोनभद्र जनपद ध्वंस  के कगार पर खड़ा है. पर्यावरणविद् अशोक कुमार कहते है, 'यहां कोई नियम कानून नहीं है, कई लोग तो सिर्फ इसलिए चुनाव लड़ते हैं ताकि उन्हें सोनभद्र के गिट्टी बालू उद्योग में उगाही के लिए मौका मिल जाय. इस लूट में प्रतिवर्ष न्यूनतम 4 से 5 हजार करोड़ रूपए की काली कमाई की जा रही है.

घोटालों के साझेदार

सोनभद्र के खनन घोटाले में न सिर्फ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बल्कि  प्रदेश का उद्योग विभाग और बिक्रीकर विभाग भी शुरू से शामिल रहा है. प्रदेश के खनिज विभाग में सत्ता परिवर्तन होते ही गायत्री प्रजापति ने जनपद में उन अधिकारियों की तैनाती की जो अवैध खनन के इस कारोबार को और आगे बढ़ा सके.

सोनभद्र में यह बात आम है कि भारी रकम लेकर एक के बाद एक खनन पट्टे और नयी क्रशर इकाइयों को लगाने की  इजाजत दे दी गयी. बोर्ड ने अनापत्ति प्रमाण पत्र  की जगह सहमति प्रपत्र जारी कर दिए, जिसका सीधा मतलब यह है कि उपरोक्त इकाई वायु प्रदूषण को रोकने की नियमावलियों का पालन करेंगी.

वहीं बिक्रीकर विभाग ने तमाम लोगों को बैक डेट में स्थापन प्रमाण पत्र निर्गत कर दिए, जिन्होंने रिश्वत के रूप में अधिकारियों को मुहमांगी रकम दी. उन्हें प्रदूषण नियंत्रण के कानूनों का खुला उल्लंघन करने की इजाजत दे दी गयी. ऐसा नहीं है भ्रष्टाचार का ये सिलसिला यहां रुक गया.

अभी भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगभग200 की संख्या में नयी क्रशर इकाइयों की स्थापना को मंजूरी देने की कवायद में जुटा है. कुछ समय पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोनभद्र में हो रहे प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार से सवाल किये थे लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों ने आदेश की धज्जियां  उड़ाते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र के बजाय सहमति पत्र जारी करने का कुटिल खेल खेला.

तबाह हो रही सोन घाटी

अगर आप सोनभद्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र से होकर गुजरने वाले वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग से होकर गुजर रहे हैं तो यकीन मानिए आप ईश्वर से प्रार्थना करेंगे कि इस रास्ते से दोबारा न गुजरना पड़े. चारों और उड़ती धूल, दिन की  तेज धूप में भी कोहरे का आभास देती है. यह कोहरा शाम होते ही और गहरा जाता है.

यहां के पत्तों के रंग हरे नहीं सफेद होते हैं और खेतों में मिट्टी की जगह भस्सी (फ्लाइ एश) नजर आती है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस क्षेत्र को देश के सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्रों में शुमार करते हुए यहां की स्थिति पर लगातार चिंता जाहिर की है.

बोर्ड ने अपने परीक्षणों में यहां पर आरएसपीएम, एसपीएम, एसओटू इत्यादि प्रदूषित तत्वों की मात्रा को निर्धारित मात्रा से कई गुना अधिक पाया था. यहां तक की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े तमाम सरकारी गैर सरकारी संगठनों ने भी प्रदूषण के कारखाने कहे जाने वाले इन क्रशरों से जन जीवन पर पड़ रहे प्रभावों पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए नई क्रशर इकाइयों को स्थापित न किये जाने की सिफारिश की थी.

लेकिन राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने खनन से मिलने वाले मोटे अवैध पैसे के लालच में सारे आदेशों और चिंताओं को दरकिनार कर दिया. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भ्रष्ट लोगों की तैनाती का लाभ न सिर्फ गिट्टी बोल्डर के गोरख धंधे में संलिप्त लोगों ने लिया बल्कि सत्ता पक्ष के कई नेताओं के रिश्तेदारों और नजदीकियों को भी नियम कायदों का साफ तौर पर उल्लंघन करते हुए सहमति प्रपत्र निर्गत कर दिया गया.

इसके बदले प्रत्येक क्रशर से कथित तौर पर एक से सवा लाख रुपए की  वसूली कि गयी. यही नहीं बोर्ड का एक ऑफिस सोनभद्र में खोलकर प्रत्येक ईकाई से महीने की वसूली का भी कार्यक्रम शुरू कर दिया गया. जानकारी मिली है कि कई मामलों में पूर्व खनन मंत्री ने बोर्ड से सहमति पत्र निर्गत करने के लिए सीधे सिफारिश की थी. आज आलम ये है कि कोई भी बंदूकधारी अपने गुर्गों के साथ राइफल लेकर आता है और कहीं भी खनन कराने लगता है.

मानवाधिकार आयोग को भी दिखाया ठेंगा

सोनभद्र में अवैध क्रशर की इस पैदावार को लेकर मानवाधिकार आयोग ने जब कुछ साल पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब-तलब किया तो जिला प्रशासन ने आनन-फानन में उद्यमियों की एक बैठक बुला ली और उन्हें प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को तात्कालिक तौर पर लागू करने का फरमान सुना दिया.

उक्त बैठक में जो निर्णय हुआ वो कम हास्यास्पद नहीं था. जिला प्रशासन ने क्रशरों से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए वाराणसी-शक्तिनगर राजमार्ग के लगभग छह किलोमीटर के क्षेत्र में सड़क के किनारे ऊंची दीवार बनाने का फैसला किया, लेकिन नई इकाइयों पर रोक को लेकर बोलने की किसी की हिम्मत नहीं हुई. नाम न छापने की शर्त पर एक बड़े अधिकारी ने बताया कि हमें होंठ सी कर रखने को कहा गया है. हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते. जब कभी हो-हल्ला मचता है तो प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को नाकाफी बताते हुए 4-6 इकाइयों को बंद कर दिया जाता है. लेकिन मंत्रियों और बोर्ड के अधिकारियों के मुंह में पैसा भरते ही क्रशरों के पहिये फिर घुमने लगते हैं.

First published: 12 September 2016, 15:03 IST
 
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