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महाराष्ट्र: थर्मल पावर प्लांट्स भी हैं सूखे की एक बड़ी वजह

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 1 May 2016, 22:39 IST
QUICK PILL
  • लगभग 1.25 करोड़ लोगों के हिस्से का पानी महाराष्ट्र की अलग-अलग तापीय विद्युत परियोजनाएं इस्तेमाल कर रही है.
  • दिलचस्प तथ्य यह है कि इनमें से ज्यादातर थर्मल प्लांट उन्हीं इलाकों में हैं जो इन दिनों भयंकर सूखे की मार झेल रहे हैं.

महाराष्ट्र के कुल 36 में से 21 जिले सूखे से प्रभावित हैं. इस साल की शुरुआत में ही भीषण गर्मी के चलते मराठवाड़ा और विदर्भ जैसे इलाकों में पानी की भयंकर किल्लत हो गई है.

महाराष्ट्र में करीब 16 हजार गांव सूखे से प्रभावित हैं. स्थिति इतनी खराब है कि लातूर जिले में तो ट्रेन के जरिए पीने के पानी की आपूर्ति हो रही है.

दूसरी ओर भीषण गर्मी और सूखे के चलते मराठवाड़ा इलाके में किसानों की आत्महत्या की खबरें बढ़ गई है. केवल इस साल के आंकड़ों की बात करें तो औसतन प्रति दिन तीन किसान आत्महत्या कर रहे हैं.

तस्वीरें: सूखा और पानी संकट से जूझता भारत

एक तरफ महाराष्ट्र लगातार सूखे से जूझ रहा है, दूसरी तरफ ग्रीनपीस की एक रिपोर्ट 'द ग्रेट वाटर ग्रैब-हाउ द कोल इंडस्ट्री इज डिपनिंग द ग्लोबल वाटर क्राइसिस' के अनुसार अकेले महाराष्ट्र में कोयला पावर प्लांट्स इतनी अधिक मात्रा में पानी का खपत करते हैं जो हर साल लगभग 1.25 करोड़ लोगों के लिये पर्याप्त है.

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महाराष्ट्र में काम कर रहे ज्यादातर कोयला पावर प्लांट्स उन इलाकों में स्थित हैं जहां पहले से ही पानी संकट हैं.  वर्तमान में, महाराष्ट्र के पास 16,500 मेगावाट क्षमता के कोयला से पैदा होने वाली बिजली है.

इनमें से लगभग 13000 मेगावाट बिजली उत्पादन महाराष्ट्र के उन इलाकों में हो रहा है जहां पानी बेहद कम है. ये प्लांट अभी 218 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी खपत कर रहे हैं.

दूसरी तरफ पानी संकट को बढ़ाने वाली 37,370 मेगावाट वाले कोयला पावर प्लांट को लगाये जाने की योजना प्रस्तावित है. इस योजना से कोयला प्लांट द्वारा पानी की मौजूदा खपत दोगुनी हो जाएगी.

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ग्रीनपीस के मुताबिक फिलहाल भारी मात्रा में पानी कोयला पावर प्लांट्स को दिया जा रहा है. प्रस्तावित कोयला पावर प्लांट्स के चलते आने वाले समय में महाराष्ट्र का करीब 490 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी इन प्लांटों में चला जायेगा. एक मोटे अनुमान के मुताबिक, इतना पानी राज्य के करीब 2.6 करोड़ लोगों की जरुरतों को पूरा करने में सक्षम है.

सूखा: मराठवाड़ा से बुंदेलखंड तक एक ही कहानी

वर्तमान में महाराष्ट्र के कई हिस्सों में जलाशयों करीब-करीब सूख चुके हैं. मराठवाड़ा में 11 बड़े, 75 मंझोले और 729 छोटे जलाशय हैं, लेकिन दैनिक लोकमत की एक खबर के मुताबिक इनमें से 80 फीसदी जलाशय सूख चुके हैं.

कुल मिला कर इन जलाशयों में 2320 लाख घन मीटर पानी बचा है, जो एक मंझोले आकार के बाँध की क्षमता से भी कम है. जो पानी बचा है, वह इन जलाशयों की कुल क्षमता का महज तीन फीसदी है. जलाशयों पर निर्भर हजारों गांव जल संकट से जूझ रहे हैं.

प्रस्तावित कोयला पावर प्लांट्स पर ग्रीनपीस इंडिया के सीनियर कैंपेनर जय कृष्णा कहते हैं कि लगातार कोयला पावर प्लांट्स पर बढ़ रही निर्भरता राज्य के किसानों और निवासियों के लिये विनाशकारी साबित होगा. जिस तरह से जल संकट गहराता जा रहा है, उससे कोयला पावर प्लांट्स के अक्सर बंद होने की भी आशंका भी  है.

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इस साल केपीसीएच का रायचुर पावर प्लांट और एनटीपीसी फरक्का पावर प्लांट को पानी के अभाव में तात्कालीक रूप से बंद कर दिया गया है. महागेंसो परली पावर प्लांट जूलाई 2015 से ही पानी के अभाव में बंद है.

महाराष्ट्र सरकार को प्रस्तावित कोयला पावर प्लांट्स के बारे में फिर से विचार करने की जरूरत है. ये सोचने वाली बात है कि पावर प्लांट्स को अब पानी कहां से मिलेगा. केंद्रीय जल आयोग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के 17 बड़े जलाशयों में से 4 में पानी अब इस्तेमाल करने लायक नहीं बचा है.

राज्य के 5 बड़े जलाशयों में सिर्फ 15 फीसदी या उससे कम पानी बचा है.  इस मौसम में महाराष्ट्र में जितना पानी इन जलाशयों में हुआ करता था, इस साल उससे 60% कम पानी है.

First published: 1 May 2016, 22:39 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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