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आर्ट आफ लिविंग ने जमा कराए 4.75 करोड़

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 June 2016, 23:01 IST

आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने यमुना की जैव विविधता को नुकसान पहुंचाने के लिए लगाए गए पर्यावरण मुआवजे के रूप में 4.75 करोड़ रुपए का भुगतान दिल्ली विकास प्राधिकरण को कर दिया है. 

यह राशि डिमांड ड्राफ्ट के जरिए डीडीए के खाते में जमा करा दी गई. एओएलएफ की ओर से आयोजित वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल कार्यक्रम 11 से 13 मार्च के बीच आयोजित किया गया था.

जुर्माने की राशि अदा करने के बाद आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने प्रेस कांफ्रेंस भी की. प्रेस कांफ्रेंस को आईओएलएफ के प्रवक्ताओं केदार देसाई, जयदीप नाथ, प्रभाकर राव और राकेश रंजन ने संबोधित किया. फाउंडेशन ने अपने साथ तीन वैज्ञानिकों को भी रखा था, पर इन वैज्ञानिकों ने अपना कोई प्रजेण्टेशन नहीं दिया.

राव ने कहा कि इसके अलावा सात एकड़ में जो स्टेज बनाया गया, उससे भी भूमि को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है

फाउंडेशन के प्रवक्ता प्रभाकर राव ने कहा कि फाउंडेशन ने अपने आयोजन स्थल के लिए स्थान चयन के वास्ते गूगल अर्थ का सहारा लिया था जिससे पता चलता है कि क्षेत्र में कोई बायोडाइवर्सिटी नहीं थी, कोई प्राकृतिक पौधे या वनस्पति नहीं थी.

यमुना की बाढ़ के चलते इस डूब क्षेत्र में मलबा जमा हो गया था और घास उग आई थी. आईओएलएफ ने अपने खर्चे से इस जगह की सफाई कराई. राव ने यह भी तर्क दिया कि यह कोई वेटलैंड भी नहीं था और इस तरह का कोई नियम भी नहीं है कि डूब क्षेत्र में आने वाले मैदान में कोई अस्थाई आयोजन न कराए जाएं.

एनजीटी बनाम आर्ट ऑफ लिविंग: देर से आया अधूरा फैसला

फाउंडेशन ने 1986 से सर्वे आफ इंडिया का वह मैप भी दिखाया जिसमें इस जगह को वेटलैंड के रूप में नहीं दर्शाया गया है. राव ने कहा कि इसके अलावा सात एकड़ में जो स्टेज बनाया गया, उससे भी भूमि को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. 

फाउंडेशन ने आयोजन के एक माह बाद 17 अप्रैल को खींचे गए वह चित्र भी दिखाए जिसमें पक्षी (प्रवासी और देशी) उड़ रहे थे.

4 जुलाई तक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपी

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने तीन जून को जल संसाधन मंत्रालय के सचिव शशि शेखर की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति को उस जगह का 10 जून से पहले निरीक्षण करने का निर्देश दिया था जहां यह आयोजन किया गया था. 

साथ ही उसने चार जुलाई तक एक सीलबंद लिफाफे में एक संपूर्ण व व्यापक रिपोर्ट भी सौंपने को कहा है. आईओएलएफ के प्रवक्ताओं ने कहा कि मीडिया के सामने जो आंकड़े पेश किए गए हैं, उसे एनजीटी के सामने भी रखा जाएगा.

यह था मामला

एनजीटी ने आर्ट ऑफ लिविंग को दिल्ली में यमुना खादर इलाके में विश्व संस्कृति महोत्सव के आयोजन के वास्ते 5 करोड़ रुपए का जुर्माना भरने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था. अधिकरण ने पिछले सप्ताह आर्ट ऑफ लिविंग की वह अर्जी भी खारिज कर दी थी जिसमें यमुना की जैव विविधता को नुकसान पहुंचाने के लिए लगाए गए पर्यावरण मुआवजे को 4.75 करोड़ रुपए की शेष भुगतान राशि के बजाए बैंक गारंटी के रूप में लिए जाने का आग्रह किया गया था. आईओएलएफ ने नियत समय तक 25 लाख रुपए ही जमा कराए थे.

First published: 7 June 2016, 23:01 IST
 
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