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एनजीटी के आदेश के बावजूद बागपत में अभी भी लोगों को नहीं मिल रहा स्वच्छ पानी

निहार गोखले | Updated on: 2 September 2016, 8:14 IST
(शमिता हर्ष)
QUICK PILL
  • यूपी के बागपत में दस साल से चल रहे 45 प्रकार के उद्योगों ने नदियों का पानी प्रदूषित कर दिया है. 
  • एक अध्ययन के मुताबिक यहां भूजल के नमूनों में सुरक्षित मात्रा से कहीं ज्यादा भारी धातुएं पाई गई हैं.
  • नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने इलाके में पेयजल पर अध्ययन और समीक्षा के आदेश दिए हैं.
  • कैच ने 9 अगस्त को प्रदूषण प्रभावित गांवों के दौरे में पाया कि वहां कोई पानी की आपूर्ति ही नहीं थी.

नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल ने बागपत जिले के गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध न करवा सकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को सख्त नोटिस जारी किए हैं. हिंडन, कृष्णा और काली नदियों के किनारे बसे गांवों के निवासी नदियों से मिल रहे पेयजल के प्रदूषित होने की शिकायत लेकर एनजीटी पहुंचे थे. ग्रामीणों का आरोप है कि दस साल से यहां चल रहे 45 प्रकार के उद्योगों ने नदियों का पानी प्रदूषित कर दिया है.

29 अगस्त को जारी किए गए एक आदेश में एनजीटी ने यूपी सरकार से पूछा है कि वह लिखित में जवाब दे कि उसने पिछले दस सालों में पेयजल स्तर सुधारने की दिशा में क्या काम किया है. एनजीटी ने यूपी जल बोर्ड प्रबंध निदेशक, जिला मजिस्ट्रेट और बागपत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को समन भेज कर सात सितम्बर को प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत होने के निर्देश दिए.

ग्रामीणों का आरोप है कि दस साल के दौरान 45 प्रकार के उद्योगों ने नदियों का पानी प्रदूषित कर दिया है.

एनजीटी ने राज्य सरकार को एक कारण बताओ नोटिस भेज कर पूछा है कि दूषित जल पिला कर लोगों की जिंदगी और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के लिए क्यों न उस पर जुर्माना लगाया जाए.

गांव वाले एक एनजीओ-दाउबा पर्यावरण समिति के माध्यम से 14 नवम्बर 2014 को शिकायत लेकर प्राधिकरण के पास पहुंचे. इनकी शिकायत थी कि वे एक दशक से भी अधिक समय से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. नदियों के दूषित जल से भू-जल दूषित हो चला है. उनका आरोप था कि इससे क्षेत्र के लोगों में शारीरिक और मानसिक बीमारियां बढ़ी हैं.

एनजीटी ने पेयजल पर अध्ययन व समीक्षा के आदेश दिए हैं. साथ ही यूपी सरकार को आदेश दिया है कि जनता को अंतिरम राहत के तौर पर टैंकर व पेयजल की बोतलें उपलब्ध करवाए.

एक अध्ययन में पाया गया कि बागपत से लिए गए भूजल के नमूनों में सुरक्षित मात्रा से कहीं अधिक भारी धातुएं पाई गई हैं.

एनजीटी ने पेयजल पर अध्ययन और समीक्षा के आदेश दिए हैं. यूपी सरकार को टैंकर और पेयजल बोतल देने को कहा है.

20 जुलाई 2016 को जब ग्रामीणों ने शिकायत की कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक उन्हें साफ पेयजल उपलब्ध नहीं करवाया है तो एनजीटी ने राज्य के मुख्य सचिव को आदेश दिए कि वे इस पर एक समिति गठित करें और यूपी जल बोर्ड के प्रबंध निदेशक, सदस्य सचिव, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल को इसमें शामिल करें ताकि सभी प्रभावित गांवों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की जा सके.

कैच ने 9 अगस्त को प्रदूषण की चपेट में आए कुछ गांवों का दौरा किया था. तब हमें पता चला कि वहां कोई पानी की आपूर्ति ही नहीं थी.

याचिकाकर्ताओं द्वारा जब एनजीटी के समक्ष यह मुद्दा ले जाया गया, तब इस पर विचार करते हुए प्राधिकरण ने 29 अगस्त को उक्त आदेश दिया. अपने आदेश में न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता में गठित एनजीटी की मुख्य पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह लिखित में जवाब दे कि प्रदूषित जल को निर्धारित मापदंडों के अनुसार लाने में पिछले दस दशकों में क्या कदम उठाए गए ताकि सभी ग्रामीणों को बिना किसी त्रुटि या देरी के स्वछ पेयजल मिल सके. 

कैच को यह भी पता चला कि एक प्रभावित गांव में चल रहा पेयजल प्रोजेक्ट पिछले चार साल से अधिक समय से केवल इसलिए लटका दिया गया है क्योंकि इसके लिए पैसा खर्च नहीं किया गया.

First published: 2 September 2016, 8:14 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

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