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रिपोर्ट दबाकर बैठे पर्यावरण मंत्रालय को सीआईसी की फटकार

निहार गोखले | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
QUICK PILL
  • केंद्रीय सूचना आयोग ने शैलेश नायक की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किए जाने के मामले में पर्यावरण मंत्रालय को कड़ी फटकार लगाई है.
  • मंत्रालय ने कोस्टल रेगुलेशन जोट एक्ट को लेकर राज्य सरकारों की आपत्तियों पर विचार करने के लिए इस समिति  का गठन किया था. समिति ने 2015 की शुरुआत में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी.

पर्यावरण मंत्रालय को एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के लिए कहा गया है जिसे वह कुछ सालों से दबाए बैठा है.

13 मई को एक अहम फैसले में केंद्रीय सूचना आयोग ने पर्यावरण मंत्रालय को फटकार लगाते हुए शैलेश नायक की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का आदेश दिया. समिति ने 2015 की शुरुआत में यह रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी थी.

केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने मंत्रालय को यह रिपोर्ट सार्वजनिक करने के लिए कहा है. आरटीआई के तहत यह रिपोर्ट मांगी गई थी और सुनवाई के दौरान सीआईसी को यह बात पता चली कि मंत्रालय इस रिपोर्ट को दबाए बैठा है.

सीआईसी ने कहा कि मंत्रालय ने जानबूझकर आरटीआई के तहत यह रिपोर्र्ट मुहैया नहीं कराई. मंत्रालय ने बचाव का नया तरीका निकालते हुए कहा कि इस रिपोर्ट को आरटीआई के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.

आयोग ने मंत्रालय के अधिकारियों को अपना काम पूरा नहीं किए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए उसे अपने सभी सार्वजनिक सूचना अधिकारियों और अपीली अधिकारियों को प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत पर बल दिया.

पर्यावरण मंजूरियों को सरल बनाने का वादा कर सत्ता में आई एनडीए सरकार ने शैलेश नायक समिति का गठन किया था

साथ ही आयोग ने मंत्रालय  के सार्वजनिक सूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन हफ्ते के भीतर यह जवाब देने को कहा है कि क्यों न उनके खिलाफ आरटीआई एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए.

क्या है नायक समिति की रिपोर्ट?

एनडीए सरकार ने जून 2014 में शैलेश नायक समिति का गठन किया था. सरकार ने कोस्टल रेगुलेटरी जोन नोटिफिकेशन 2011 की समीक्षा के लिए इस समिति का गठन किया था. नियम के तहत समुद्र तट के  500 मीटर की परिधि में किसी निर्माण के लिए मंजूरी लेना जरूरी था.

भारत के 7,517 किलोमीटर लंबे तटीय क्षेत्र में बंदरगाह और उद्योग के अलावा भारत के कई बड़े शहर आते हैं. पर्यावरण मंजूरियों को सरल बनाने का वादा कर सत्ता में आई एनडीए सरकार ने शैलेश नायक की अध्यक्षता में 17 जून 2014 को एक समिति का गठन किया था. 

नायक उस वक्त अर्थ साइंसेज मिनिस्ट्री में सचिव थे. समिति में नौकरशाहों के अलावा वैज्ञानिकों को भी शामिल किया गया था.

समिति को महाराष्ट्र्र, कर्नाटक और केरल सरकार की तरफ से उठाई गई विशेष आपत्तियों पर गौर करने के लिए कहा गया था. समिति ने इस दौरान केरल के मुख्यमंत्रीउम्मेन चांडी से बात की और फिर फोन पर ही देवेंद्र फडनवीस से बात की गई.

समिति ने जनवरी 2015 में ही रिपोर्ट सौंपी थी लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया. इसके बाद सरकार ने भी समिति में शामिल सदस्यों से कोई बात नहीं की.

लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि मंत्रालय ने सीआरजेड नियमों में बदलाव शुरू कर दिया. सरकार ने रिपोर्ट सौंपे जाने से पहले नियमों में दो बदलाव किए जबकि रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद छह बदलाव किए.

बदलावों को लेकर कई सवाल उठते हैं. क्या सभी बदलाव नायक समिति की सिफारिश के मुताबिक थे? अगर ऐसा था तो फिर सरकार रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही? अगर नहीं तो फिर सरकार विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के उलट क्यों काम कर रही है?

यह इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि दूसरी समिति ने पहले के मुकाबले उल्टी रिपोर्ट दी. पूर्व कैबिनेट सचिव टीआरएस सुब्रमण्यन की अध्यक्षता में भी एक समिति का गठन किया गया था और इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जा चुकी है.

रिपोर्ट में पर्यावरणीय मंजूूरियों को नरम बनाने की सिफारिश की गई है जो एनडीए सरकार के एजेंडे के मुताबिक है.इन दोनों रिपोर्ट के बाद स्थिति संदेहास्पद बनती दिख रही है.

सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में रिसर्च डायरेक्टर कांची कोहली ने 22 फरवरी 2015 को आरटीआई देकर नायक समिति की रिपोर्ट मांगी थी. हालांकि उनकी मांग पर्यावरण मंत्रालय ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जब तक मंत्रालय इसे स्वीकार नहीं कर लेता तब तक इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.

कोहली ने पहली अपील में इसके खिलाफ आवाज उठाई लेकिन उसे नामंजूर कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने सीआईसी में अपील किया, जिस पर फैसला 13 मई को आया.

सीआईसी आदेश

आदेश देते हुए सूचना आयुक्त एम श्रीधर आचार्युलु ने काह कि नायक समिति  की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना सार्वजनिक हित में है.

आदेश में कहा गया है, 'अगर रिपोर्ट में सीआरजेड के मकसद पर चर्चा की गई है तो नियमों में बदलाव करने से पहले उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए. नायक समिति की रिपोर्ट को दबाना और नियमों संशोधन करना संदेह पैदा करता है जिसे साफ किया जाना जरूरी है.' 

आदेश में पर्यावरण मंत्रालय को जबरदस्त फटकार लगाई गई है. पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले कई अन्य संगठन भी नायक समिति की सिफारिशों के बारे में जानना चाहते हैं. कुछ संगठनों ने आरटीआई डालकर इस रिपोर्ट की कॉपी मांगी है.

कोहली ने कैच से कहा, 'आदेश इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह महज इस रिपोर्ट से जुड़ा मामला नहीं है. इसमें बताया गया है कि मंत्रालय रिपोर्ट को नहीं दबा सकता चाहे वह मसौदा ही क्यों न हो. यह कहना कि रिपोर्ट पर विचार किया जा रहा है, सही तर्क नहीं है.'
First published: 19 May 2016, 7:19 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

संवाददाता, कैच न्यूज़. जल, जंगल, पर्यावरण समेत नीतिगत विषयों पर लिखते हैं.

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