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एनजीटी ने दिल्ली के वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को ग़ैरकानूनी क़रार दिया

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 26 January 2017, 7:36 IST

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने ओखला स्थित 'वेस्ट टू एनर्जी' संयंत्र को अवैध घोषित कर दिया है. मुमकिन है कि एनजीटी के इस फैसले के बाद यह संयंत्र बंद हो जाए और अगर ऐसा होता है तो इसके आस-पास रहने वालों के लिए बड़ी राहत होगी. स्थानीय लोगों ने ही इस संयंत्र की वजह से इलाक़े में प्रदूषण फैलने की शिकायत की थी. साथ ही, यह भी कहा था कि इससे नागरिकों की सेहत को गंभीर खतरा है. 

टॉक्सिक वाच अलायंस (टीडब्लूए) के गोपाल कृष्ण ने कहा है कि हम प्राधिकरण से सख़्त फैसले की उम्मीद कर रहे हैं कि वह संयंत्र को बंद करने का आदेश देगा. यह संयंत्र जिंदल अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर (जेयूआईएल) चला रहा है. पीठाधिकारी स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एनजीटी की पीठ ने इस ग्रुप से सवाल किया था कि संयंत्र में काम में ली जा रही तकनीकी कानूनी तौर पर मान्य है कि नहीं. 

पीठ ने कहा, ग्रुप का यह तर्क कि यह प्लांट सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रमाणित रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल प्लांट है; झूठा निकला. इसके पास ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के तौर पर काम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का कोई प्रमाणपत्र नहीं था जबकि जिंदल समूह ने पूर्व में ऐसा दावा किया था कि यह प्रमाणित है.

रिहाइशी कॉलोनी में प्लांट?

यह संयंत्र ओखला पक्षी अभयारण्य, विभिन्न सार्वजनिक संस्थानों और आवासीय कॉलॉनी के बीच स्थित है. औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ कार्यरत एक समूह टॉक्सिक वाच एलायंस ने इस संयंत्र के प्रमाणीकरण पर सवाल उठाते हुए दिल्ली सरकार को पत्र लिखा है. गोपाल कृष्ण ने बताया इस संयंत्र के संचालन के लिए सहमति की अवधि भी 31 दिसम्बर 2016 को समाप्त हो चुकी है.

पर्यावरणीय समूहों ने भी माना है कि यह संयंत्र ग्रीन बेल्ट पर स्थित है. दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा बनाए गए दिल्ली के मास्टर प्लान के अन्तर्गत यह 10 एकड़ भूमि पर हरित क्षेत्र में फैला हुआ है. मास्टर प्लान के अनुसार, ‘‘दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अस्पतालों और औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले हानिकारक अपशिष्टों पर प्रतिबंध है. ऐसे उद्योगों के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी जानी चाहिए.’’

गोपाल कृष्ण ने कहा, ‘‘ हम इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप चाहते हैं और पर्यावरण के नियमानुसार चाहते हैं कि आवासीय क्षेत्र में चल रहा यह संयंत्र बंद कर दिया जाए, जो हानिकारक रसायनों का उत्सर्जन करता है. कृष्णा ने बताया ऐसे हानिकारक तकनीकी संयंत्रों के खिलाफ मार्च 2005 से संघर्षरत यहां के बाशिन्दे और पर्यावरण समूहों को अब इस बारे में एनजीटी के फैसले का इंतजार है. 

सुखदेव विहार के लोगों ने भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी पत्र लिखा है. पत्र में कहा गया है कि ‘‘हम आपसे आश्वासन चाहते हैं कि संयंत्र संचालक जल्द से जल्द यह हरित क्षेत्र खाली कर दे और इस जगह पर सामुदायिक पार्क या कोई अन्य गतिविधि शुरू कर दी जाए.’’

 हालांकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने संयंत्र के पक्ष में तर्क दिया है. बोर्ड के अनुसार, दिल्ली विकास प्राधिकरण की यह जमीन राष्ट्रपति भवन के अपशिष्ट निस्तारण हेतु सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए नई दिल्ली नगर पालिका को लीज पर दे दी गई थी. साथ ही बोर्ड ने कहा, इस संयंत्र से निकलने वाला उत्सर्जन ‘‘नगरपालिका ठोस अपशिष्ट नियम 2000 के तहत निर्धारित सीमा में ही था.

First published: 26 January 2017, 7:36 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

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