Home » एन्वायरमेंट » NGT slams centre, 4 states and Nagar Nigam again, NDMC begins to sprinkle water
 

'जहरीली हवा' पर NGT की 4 राज्यों को फटकार, NDMC ने बरसाई पानी की फुहार

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 November 2016, 15:03 IST
(एएनआई)

दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर पिछले दो दशक में सबसे खतरनाक स्तर पर है. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एक बार फिर केंद्र, राज्य सरकारों और नगर निगम को इस मुद्दे पर कड़ी फटकार लगाई है.

वातावरण में सेहत के लिए बेहद हानिकारक पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर इतना ऊपर पहुंच चुका है, कि लोगों को सांस लेने में मुश्किल हो रही है. अस्पतालों में सांस के मरीजों की तादाद 25 फीसदी तक बढ़ चुकी है.

दिल्ली और केंद्र सरकार हालात पर काबू पाने के लिए कदम उठा रहे हैं. दिल्ली के स्कूल 8 नवंबर तक के लिए बंद हैं. वहीं बदरपुर पावर प्लांट को 10 दिन के लिए बंद किया गया है. इसके साथ ही पांच दिन के लिए दिल्ली में निर्माण गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई है. 

इन सारी कवायद के बीच एनजीटी ने एक बार फिर दिल्ली सरकार और नगर निगम को कठघरे में खड़ा किया है. एनजीटी ने केंद्र और राज्य सरकारों से पूछा, "प्रदूषण पर काबू पाने के लिए आपने (केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, हरियाणा सरकार, राजस्थान सरकार और पंजाब सरकार) अब तक क्या किया है?"

एनजीटी ने सवालिया लहजे में कहा, "आपने धूल के कणों को कम करने के लिए सड़क पर पानी की फुहार क्यों नहीं छिड़कवाई? हेलीकॉप्टर के जरिए पानी के छिड़काव के प्रस्ताव का क्या हुआ?"  

'क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं है?'

इसके साथ ही एनजीटी ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा, "जो लोग एनजीटी के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं उनके खिलाफ आपने क्या कार्रवाई की? पंजाब में 70 फीसदी जमीन फसल जलाने के लिए इस्तेमाल हो रही है. दिल्ली सरकार क्या कर रही है?"

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने ने नगर निगम पर भी सवालिया लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा, "प्रदूषण को नियंत्रण में लाने के लिए क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं है? नगर निगम क्या कर रहा है, उनको सफाई के लिए मशीन का इस्तेमाल करने के लिए पहले ही निर्देश दिए जाने थे."

एएनआई

पर्यावरण संरक्षण कैलेंडर होगा जारी

इस बीच दिल्ली की आबोहवा में घुले स्मॉग से निपटने के लिए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने दिल्ली में पानी की फुहारें छोड़ने के काम की शुरुआत कर दी है. वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए जेट प्रेशर पंप तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने कहा, "पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से राज्यवार एक पर्यावरण संरक्षण कैलेंडर जारी किया जाएगा. धूल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार बड़ी वजहों में से एक है."

एएनआई

'80 फीसदी प्रदूषण दिल्ली से ही'

पर्यावरण मंत्री अनिल दवे ने कहा, "जब तक राज्य सरकार तत्काल कोई कदम नहीं उठाएगी, समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा. उन्हें पानी का छिड़काव करना होगा."

दवे ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप का खेल नहीं होना चाहिए. अभी हमारी प्राथमिकता हवा को प्रदूषण मुक्त बनाना है, जिससे लोग सांस ले सकें.

दवे ने इस दौरान केजरीवाल सरकार के इस दावे को गलत बताया कि फसलें जलाने से प्रदूषण की समस्या बढ़ी है. दवे ने कहा, "दिल्ली में 80 फीसदी वायु प्रदूषण की समस्या यहीं से उत्पन्न हुई है. जबकि पड़ोसी राज्यों में फसल जलाने से दिल्ली में 20  फीसदी वायु प्रदूषण बढ़ा है. यह बताने की जरूरत है."  

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई

वहीं दिल्ली में प्रदूषण को लेकर पर्यावरणविद और सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट की डायरेक्टर जनरल सुनीता नारायण की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. मंगलवार को अदालत में इस मुद्दे पर सुनवाई होगी.

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में सुनीता ने कहा, "यह जन स्वास्थ्य के लिए इमरजेंसी है. हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट सख्त रुख अपनाते हुए सरकार को कुछ ऐसी सलाह देगा जिससे दिल्ली की हवा शुद्ध हो सके." 

गुड़गांव में खुले में कचरा जलाने पर बैन

इस बीच गुड़गांव में कचरा जलाने पर प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं. डिप्टी कमिश्नर ने खुले में कूड़ा-कचरा जलाने पर प्रतिबंध लगाते हुए धारा 144 लागू की है. डीसी ने एमसीजी (म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ गुड़गांव) के स्वच्छता निरीक्षकों को आदेश की तामील कराने को कहा है.

अगर किसी को खुले में कूड़ा-कचरा जलाते हुए कोई दिखाई देता है तो वह इलाके के एसएचओ, एमसीजी के ज्वाइंट कमिश्नर और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को शिकायत कर सकता है. एनजीटी के आदेश के मुताबिक दोषी पाए जाने वाले शख्स से 5 हजार का जुर्माना वसूला जाएगा.

First published: 7 November 2016, 15:03 IST
 
अगली कहानी