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दिल्ली: 'बंद कमरों में सांस घुटी जाती है, खिड़कियां खोलता हूं तो जहरीली हवा आती है'

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 October 2016, 13:25 IST
(एजेंसी)

इन बंद कमरों में मेरी सांस घुटी जाती है, खिड़कियां खोलता हूं तो जहरीली हवा आती है. कवि दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां दिवाली के बाद दिल्ली में फैले वायु प्रदूषण की स्याह हकीकत को बयां करती हैं.  

दीपावली के मौके पर आतिशबाजी के बाद एक ही रात में ही दिल्ली समेत देश के कई बड़े शहर स्मॉग की चपेट में आ गए हैं. दिल्ली में कम ट्रैफिक के बावजूद दीपावली की रात पिछले तीन साल में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण देखा गया है.

वातावरण में छाई धुंध का आलम यह था कि दिल्ली-नोएडा को जोड़ने वाले डीएनडी फ्लाईवे पर एक साथ पांच गाड़ियां आपस में टकरा गईं. गनीमत यह रही कि कोई चोटिल नहीं हुआ.

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर 42 गुना तक बढ़ गया है. फिलहाल शहर में इतना धुंआ है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर इंसानों के रहने के लिए सबसे खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है. देश के दस बड़े प्रदूषित इलाकों में से आठ दिल्ली और एनसीआर के हैं.

वहीं दिल्ली के मुकाबले मुंबई और पुणे जैसे शहरों में जागरूकता की वजह से हर बार के मुकाबले वहां प्रदूषण का स्तर काफी कम रहा है. वहीं उत्तर प्रदेश के लखनऊ और कानपुर जैसे शहरों में भी दिवाली के बाद प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है.

केंद्र सरकार की प्रदूषण पर नज़र रखने वाली संस्था सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च के मुताबिक दीवाली पर आतिशबाजी के बाद खतरनाक पर्टिकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 का स्तर 507 तक पहुंच गया.

वहीं पीएम 10 का स्तर 511 तक था. पीएम 2.5 और पीएम 10 का लेवल 400 से ऊपर चला जाता है तो ये इंसानी फेफड़ों के लिए बेहद नुकसानदायक होता है. पीएम के जरिए हवा में मौजूद धूल और धुएं का स्तर मापा जाता है. दिल्ली के पॉश लोधी रोड इलाके में भी सोमवार सुबह के वक्त इसका खतरनाक स्तर रिकॉर्ड किया गया.

First published: 31 October 2016, 13:25 IST
 
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