Home » एन्वायरमेंट » Earth’s magnetic pole is moving faster than expected
 

वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल में आई खराबी के चलते धरती के चुंबकीय क्षेत्र में आया ये बदलाव

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 January 2019, 9:11 IST
(प्रतीकात्मक फोटो)

जीपीएस धरती के भौगोलिक और चुंबकीय ध्रुवों के अंतर की सटीक गणना से काम करता है. लेकिन पृथ्वी का चुंबकीय उत्तरी ध्रुव बड़ी तेजी से खिसक रहा है. इसीलिए वैज्ञानिकों ने वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल के नए अपडेट की तैयारी कर ली है. यह अपडेट 15 जनवरी को होना था, लेकिन अमेरिका में कामबंदी के चलते इसमें देरी हो रही है. अब यह अपडेट 30 जनवरी को होना तय हुआ है.

वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर’ में वैज्ञानिकों ने WMM के अपडेट की सबसे बड़ी वजह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में तेजी से आ रहे बदलाव को बताया है. दरअसल, भौगोलिक उत्तरी ध्रुव और चुंबकीय उत्तरी ध्रुव में अंतर होता है. भौगोलिक ध्रुव हमेशा अपनी जगह पर बना रहता है. लेकिन चुंबकीय ध्रुव लगातार खिसकता रहता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी के गर्भ में होने वाली हलचलों का असर चुंबकीय क्षेत्रों पर पड़ता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती के भीतर लोहे के बहाव का इस पर सीधा असर पड़ता है. हालांकि फिलहाल यह पता नहीं चला है कि चुंबकीय क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव की सही वजह क्या है. समुद्र की जलधाराएं और धरती के गर्भ का पिघला लोहा भी इस पर असर डालते हैं, लेकिन इतनी तेज रफ्तार से यह परिवर्तन क्यों हो रहा है इस पर अब भी रहस्य बना हुआ है, वैज्ञानिक भी इस बात का पता नहीं लगा पाए हैं.

बता दें कि WMM को हर पांच साल में अपडेट किया जाता है, जो आखिरी बार यह 2015 में अपडेट हुआ था, लेकिन 2016 में पता चला कि चुंबकीय उत्तरी ध्रुव अनुमान से ज्यादा तेजी से जगह बदल रहा है. लेकिन 2018 में यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन और ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे के वैज्ञानिकों ने दावा किया कि जल्द ही इसे अपडेट करने की जरूरत है, क्योंकि WMM में कई गड़बड़ियां आ गई हैं इसके चलते नेविगेशन में भी गड़बड़ी आ सकती है.

प्रतीकात्मक फोटो

बता दें कि हम अक्सर नेविगेशन के लिए जीपीएस तकनीकी का इस्तेमाल करते हैं. हवाई जहाज, समुद्री जहाज और स्मार्टफोन डब्ल्यूएमएम के जरिए ही नेविगेशन को सटीक बनाते हैं. अमेरिकी भू-अंतरिक्ष खुफिया एजेंसी के वैज्ञानिक जेम्स फ्रीडरिष ने बताया कि डब्ल्यूएमएम में तेजी से आने वाला बदलाव जीपीएम तकनीकी पर सीधा असर डालेगा. इससे युद्ध क्षेत्र में सेना, वायुसेना और आम आदमी के मोबाइल का कैमरा के साथ कई एप्स भी बुरी तरह से प्रभावित हो जाएंगे.

ये भी पढ़ें- पृथ्वी पर तबाही मचा सकता है क्षुद्रग्रह बेनू, हिरोशिमा परमाणु बम से 80,000 गुना ज्यादा होगा असर

First published: 19 January 2019, 9:11 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी