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'खेती तो दूर की कौड़ी रही, प्यास बुझाने को पानी होना, नसीब की बात होगी'

न्यूज एजेंसी | Updated on: 25 May 2018, 17:29 IST

पानी को लेकर विश्वयुद्ध की बातें अब नई नहीं हैं. सुनने में जरूर अटपटी लगती हैं, लेकिन हकीकत और हालात का इशारा कुछ यही है. इस बावत विश्व बैंक की उस रिपोर्ट को नजरअंदाज करना बेमानी होगा जो कहती है 'जलवायु परिवर्तन और बेतहाशा पानी के दोहन की मौजूदा आदत से, बहुत जल्द देशभर के 60 फीसदी वर्तमान जलस्रोत, सूख जाएंगे. खेती तो दूर की कौड़ी रही, प्यास बुझाने को पानी होना, नसीब की बात होगी.'

उधर 'वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम' की रिपोर्ट भी डराती है. उसने पानी संकट को दस अहम खतरों में ऊपर रखा है. दसवीं 'ग्लोबल रिस्क' रिपोर्ट में यह खास है. पहली बार हुआ है, जब जलसंकट को बड़ा और संवेदनशील मुद्दा माना गया, वरना दशकभर पहले तक वित्तीय चिंताएं, देशों की तरक्की, ग्लोबल बिजनेस, स्टॉक मार्केट का छिन-पल बदलाव, तेल बाजार का उतार-चढ़ाव अहम होते थे.

सन 2050 के लिए अभी सोचना होगा, जब पीने के पानी के लिए करीब पांच अरब लोग जूझ रहे होंगे. यूनेस्को की एक हालिया जल रिपोर्ट कहती है कि अकेले भारत में 40 फीसदी जल संसाधन कम हो जाएंगे. समझ सकते हैं, पानी की किस कदर किल्लत होगी. उत्तर भारत का हाल तो अभी बेहाल है, जो आगे और कितना बदतर होगा? पंजाब, हरियाणा, दिल्ली में भूजल बेहद कम है!

जबकि दक्षिण और मध्य भारत में अगले 30-32 सालों में पानी की गुणवत्ता और भी ज्यादा खराब होगी. प्रदूषित पानी की समस्या सतही भंडारों के अलावा भूजल में भी है, क्योंकि इसमें धातु का दूषित पदार्थ घुल जाता है, जिसकी वजह जमीन पर खराब पदार्थों की डंपिंग है.

कहने को धरती का तीन चौथाई हिस्सा पानी से जरूर घिरा है, लेकिन साफ पानी और गिरता भूजल स्तर दुनिया की सबसे बड़ी चिंता का सबब बन चुका है. पानी की जरूरत और उसे साफ रखने के महत्व को इन हालातों के बावजूद भी नहीं समझेंगे तो कब चेतेंगे?

मप्र के उमरिया के सरसवाही की इसी 23 मई की एक घटना ने झकझोर कर रख दिया. मोहल्ले के कुएं सूख गए थे, इसलिए एक कुएं में सुरंग बनाकर पास के नाले से जोड़कर पानी लाने की कोशिश के दौरान मिट्टी धसक गई और दो सगे व एक चचेरे भाई की मौत हो गई.

 

इसी तरह अनूपपुर के चोंडी गांव में दो साल पहले 23 अप्रैल को हुई घटना बेहद झकझोरने वाली है. 14 साल का खेमचंद प्यास बुझाने, रोज की तरह घर के सूखे कुएं की तलहटी में, चुल्लू भर पानी की खातिर उतरा तभी अचानक ऊपर से मिट्टी भरभरा गई. वो प्यासा ही कुएं में जिंदा दफन हो गया. 32 घंटों की कवायद के बाद शव निकल पाया.

महाराष्ट्र के औरंगाबाद की हालिया घटना भी चिंताजनक है, जिसमें 17 साल के नौजवान और 65 साल के बुजुर्ग की मौत हो गई. राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश बिहार, ओडिशा में जहां-तहां पानी की जबरदस्त किल्लत है. गुजरात के सरदार सरोवर बांध को बीते मानसून में मप्र में कम हुई बारिश के चलते केवल 45 फीसदी पानी मिला. वहां उद्योगों को पानी देना मुश्किल हो रहा है. लंदन से आई एक रिपोर्ट जो पूर्व चेतावनी उपग्रह प्रणाली के अध्ययन पर आधारित है, वह काफी डराने वाली है जो बताती है भारत एक बड़े जलसंकट की ओर बढ़ रहा है.

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भारत, मोरक्को, इराक और स्पेन में सिकुड़ते जलाशयों से नलों में पानी गायब हो सकता है! दुनिया के 500,000 बांधों के लिए पूर्व चेतावनी उपग्रह सिस्टम बनाने वाले डेवलपर्स के अनुसार, यहां पानी संकट 'डे जीरो' तक पहुंच जाएगा, जिसका मतलब नलों से पानी एकदम गायब हो सकता है! जान हथेली पर रखकर पानी जुटाना गरीबों की नीयति बन चुकी है! पैसे वाले तो अपना इंतजाम आसानी से कर लेते हैं. लेकिन गरीबों की स्थिति के लिए उपरोक्त घटनाएं सबूत हैं. इससे अमीर-गरीब के बीच की खाई और दुश्मनी भी बढ़ रही है.

हर साल लगभग 7-8 महीने पानी की कमीं से कई राज्य जूझते हैं. जनसंख्या बढ़ने के साथ कल-कारखानों, उद्योगों और पशुपालन को मिले बढ़ावे के बीच जल संरक्षण की ओर ध्यान नहीं गया. नतीजन, भूजल स्तर गिरता गया. अब समस्या पानी ही नहीं, बल्कि शुद्ध पानी भी है. दुनिया में करीब पौने 2 अरब लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा.

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First published: 25 May 2018, 17:27 IST
 
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