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'सिर्फ सब्सिडी से नहीं मिल पाएगा ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा'

शुभ्रता मिश्रा | Updated on: 18 May 2017, 20:10 IST

भारत में ग्रीन एनर्जी का उत्‍पादन बढ़ रहा है, लेकिन उपभोक्‍ताओं के बीच इसके उपयोग को लेकर अभी भी कई भ्रांतियां हैं और लोग कोयले जैसे पारं‍परिक ईंधनों पर ही भरोसा करते हैं. इस ग्रीन एनर्जी को लोकप्रिय बनाने के लिए लोगों की इस धारणा को बदलने और इसके प्रति उनमें भरोसा पैदा करने की जरूरत है.

केवल सब्सिडी देने से ही ग्रीन एनर्जी की ओर उपभोक्‍ताओं को आकर्षित नहीं किया जा सकता. यह बात एक नए सर्वेक्षण में उभरकर आई है.

ग्रीन एनर्जी के प्रति लोगों की धारणा का आकलन करने पर पता चला है कि उपभोक्ताओं को ग्रीन एनर्जी अपनाने का फैसला लेने में वित्तीय पहलुओं के साथ-साथ कई अन्‍य पहलू भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

सिंबायोसिस सेंटर फॉर मैनेजमेंट एंड हयूमन रिसोर्स डेवेलपमेंट (एससीएमएचआरडी), सिंबायोसिस अंतरराष्‍ट्रीय विश्‍वविद्यालय और आईआईटी-रुड़की के अध्‍ययनकर्ताओं के मुताबिक ग्रीन एनर्जी अपनाने के लिए लोगों को आ‍कर्षित करना है तो महज वित्तीय प्रोत्‍साहन ही काफी नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को भावनात्मक और सामाजिक तौर पर प्रेरित किया जाना भी जरूरी है.

इस अध्ययन में ग्रीन एनर्जी के अनुमानित मूल्य (जीपीवी) का आकलन मूलत: चार कारकों कार्यात्मक मूल्‍य, सामाजिक मूल्य, परिस्थितिजन्य मूल्य और भावनात्मक मूल्य के आधार पर किया गया है.

 

अध्‍ययनकर्ताओं के अनुसार ग्रीन एनर्जी की स्‍वीकार्यता निर्धारित करने में इसकी कार्यक्षमता, टिकाऊपन एवं कीमत जैसे आयामों के साथ-साथ उपभोक्‍ताओं की सामाजिक एवं भावनात्मक पृष्‍ठभूमि भी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है.

अध्‍ययनकर्ताओं के अनुसार भविष्य में ग्रीन एनर्जी से संबंधित सशक्त रणनीति बनाने में ऊर्जा के उपभोग से जुड़े ये विभिन्‍न आयाम मददगार साबित हो सकते हैं.

सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है कि पर्यावरण को सुरक्षित बनाए रखने में मददगार हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सिर्फ सरकारी नियम ही काफी नहीं हैं, बल्कि इसके प्रति उपभोक्‍ताओं में सकारात्‍मक दृष्टिकोण पैदा करना भी जरूरी है.

अध्‍ययनकर्ताओं की टीम में शामिल दीपक संग्राया और जोगेंद्र कुमार के अनुसार ऐसे कार्यक्रम और संदेश तैयार करने की जरूरत है, जो बिना किसी वित्‍तीय प्रोत्‍साहन के उपभोक्‍ताओं में पर्यावरण के प्रति जिम्‍मेदारी का भाव पैदा कर सकें और उन्‍हें हरित ऊर्जा अपनाने के लिए के लिए आकर्षित कर सकें.

(सााभारः इंडिया साइंस वायर)

First published: 18 May 2017, 20:10 IST
 
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