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प्रधानमंत्री के बदले नजरिए से बदल सकती है देश में बाघों की किस्मत

सनी सेबेस्टियन | Updated on: 19 April 2016, 11:19 IST

अगर देश को यह लगता है कि नरेंद्र मोदी सिर्फ अपने गृहराज्य गुजरात के शेरों के प्रति ही चिंतित रहते हैं और उनके पास बाघों सहित देश के अन्य वन्य जीवन के लिये कोई नजरिया या समय नहीं है तो यह सोच अब गलत साबित हो चुकी है.

2014 में देश की संत्ता संभालने के बाद संरक्षण के प्रयासों के बुरे दौर को पीछे छोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने हाल ही में दिल्ली में एक अंतर-सरकारी बाघ संरक्षण निकाय, ग्लोबल टाइगर फोरम की तीसरी एशिया मिनिस्टीरियल कांफ्रेंस को संबोधित किया.

मोदी, जिनके शासनकाल को बहुधा पर्यावरण संरक्षण की कीमत पर आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ाने का दोषी ठहराया जाता है, ने ‘‘टाइगर रेंज’’ के देशों के प्रतिनिधियों और भारतीय एवं विदेशी विशेषज्ञों से भरे दर्शकों के बीच करीब 20 मिनट तक इस विषय पर खुलकर बोले.

‘‘बाघों का संरक्षण करना सिर्फ एक विकल्प ही नहीं बल्कि समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है’’

उन्होंने स्वीकार किया कि भारत में बाघ संरक्षण एक प्रतीक बन चुका है. मोदी ने कहा, ‘‘भारत में बाघ को सिर्फ एक जंगली जानवर के रूप में ही नहीं देखा जाता है. भारतीय पुराणों में मां प्रकृति को एक बाघ पर बैठे हुए दर्शाया जाता है. कई बार जानवरों को भी देवी-देवताओं की श्रेणी में ही रखा जाता है.’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘बाघों का संरक्षण करना सिर्फ एक विकल्प ही नहीं बल्कि समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है.’’

सभागार में मौजूद अतिथि, जिनमें केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, जीटीएफ के अध्यक्ष यशे दोरजी, ग्लोबल टाइगर इनीशिएटिव काउंसिंल के अध्यक्ष राॅबर्ट जाॅलिक उनकी बातों से काफी खुश और प्रभावित दिखाई दिये.

इस सम्मेलन का आयोजन बाघों के संरक्षण के लियये नवंबर 2010 में आयोजित सेंट पीटर्सबर्ग डिक्लेरेशन आॅन टाइगर कंसर्वेशन को आगे बढ़ाने के साथ ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम के तहत टाइगर रेंज देशों द्वारा अनुमोदित की गई राष्ट्रीय और वैश्विक प्रथमिकताओं का समर्थन करने के लिये किया गया था.

अगर अबतक सामान्य तौर पर संरक्षण के कामों में लगे लोग और विशेषकर बाघ प्रेमी वन्यजीवों के संरक्षण के क्षेत्र में मोदी की ‘‘उदासीनता’’ को लेकर चिंतित प्रतीत होते थे तो उसके कुछ वाजिब कारण भी थे. उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में राष्ट्रीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में संरक्षण की दिशा में काम करने से इंकार करते हुए मध्य प्रदेश और राजस्थान में शेरों के संरक्षण के लिये तैयार होने वाले कुछ संस्थानों का एक हिस्सा बनने से साफ मना कर दिया था.

राजस्थान में दो अभ्यारणों और मध्य प्रदेश के कुनो पालपुर का चयन गुजरात के शेरों के साथ उनकी जनसंख्या को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था. कुनो के मामले में तो इस प्रायोजन के लिये 24 गांवों की आबादी तक को अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया था लेकिन गुजरात सरकार के इंकार के चलते बाद में इस पूरी परियोजना को ही रद्द करना पड़ा.

अबतक संरक्षण के कामों में लगे लोग वन्यजीवों के संरक्षण के क्षेत्र में मोदी की ‘‘उदासीनता’’ को लेकर चिंतित नजर आते थे

बीजेपी सांसद और राजस्थान में बाघों के पुनर्वास के लिये बनी टास्क फोर्स के अध्यक्ष वीपी सिंह बाडनोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव करते हुए कहते हैं, ‘‘आखिर यह शिकायत किसलिये है? भारत में बाघों की स्थिति बहुत अच्छी है. बाघों से जुड़े मुद्दों पर विवाद अधिकतर दूसरे देशों के साथ है.’’

‘‘अतीत में जब भी मैंने बाघों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर उनसे मुलाकात की, तो गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदीजी का रुख बेहद सकारात्मक और सहायक था.’’

इसके बावजूद संरक्षण के काम में लगे लोगों के पास मोदी की मंशा को लेकर सशंकित होने के पर्याप्त कारण मौजूद हैं. उदाहरण के लिये उन्होंने अबतक राष्ट्रीय वन्यजीव बार्ड की अनिवार्य बैठक में एक बार भी हिस्सा नहीं लिया है जबकि प्रधानमंत्री होने के नाते वे उसके अध्यक्ष हैं. वर्ष 2015 में बोर्ड की कुल मिलाकर 3 बैठकें हुई और एक तो इसी वर्ष फरवरी में हुई, यह सभी स्थायी समिति की बैठकें थीं जिनकी अध्यक्षता उपाध्यक्ष प्रकाश जावड़ेकर ने की. सूत्रों का कहना है मनमोहन सिंह का दौर इससे बिल्कुल उलट था.

वास्तव में मोदी सरकार द्वारा किया गयाा एनबीडब्लूएल के पुर्नगठन का फैसला भी विवादों में घेरे में है और एक एनजीओ ने इसमें गुजरात कैडर के कुछ अधिकारियों की नियुक्ति के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है.

हालांकि अबतक राष्ट्रीय वन्यजीव बार्ड की बैठक में उन्होंने एक बार भी हिस्सा नहीं लिया है जबकि प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष हैं

संरक्षण के कामों को लेकर मोदी सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश कहते हैं, ‘‘यहां तो बाड़ ही खेत को खा रही है. वर्तमान सरकार संरक्षण से जुड़े कानूनों को कमजोर कर रही है. उद्योगों को बिना सोचे-समझे तेजी से मंजूरी दी जा रही है और विकास के नाम पर बाघों के प्राकृतिक परिवेश को नष्ट किया जा रहा है. उदाहरण के लिये कान्हा टाइगर रिजर्व और पेंच राष्ट्रीय उद्यान के मध्य से प्रस्तावित राजमार्ग वहां के टाइगर काॅरिडोर के लिये बहुत बड़ा खतरा साबित होगा.’’

हालांकि जब बात बाघ अभ्यारण्यों के लिये धन के आवंटन की होती है तो मोदी सरकार का प्रदर्शन शानदार प्रतीत होता है. इसके अलावा इन्हें बाघ अभ्यारण्यों की संख्या में इजाफा करते हुए उन्हें 49 तक पहुंचाने के लिये भी शाबासी मिलनी चाहिये.

जब बात बाघ अभ्यारण्यों के लिये धन के आवंटन की होती है तो मोदी सरकार का प्रदर्शन बेहद शानदार नजर आता है

वर्तमान में जीटीएफ के महासचिव राजेश गोपाल कहते हैं, ‘‘हालांकि यूपीए सरकार बाघों के संरक्षण के लिये उठाये जाने वाले प्रयासों में काफी सहायक थी लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि वर्तमान सरकार धन के आवंटन के मामले में काफी उदार है. एक वर्ष पूर्व बाघों के अभ्यारण्यों के लिये 185 करोड़ रुपये के आवंटन के मुकाबले इस वर्ष यह राशि बढ़ाकर 385 करोड़ रुपये कर दी गई है.’’

वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी ने जीटीएफ सम्मेलन के अपने संबोधन में आवंटन में वृद्धि की बात पर विशेष बल दिया था.

लेकिन यहां पर भी एक पेंच है. एनटीसीए के एक सदस्य राजपाल सिंह तंवर कहते हैं, ‘‘इस बढ़े हुए आवंटन में एक शर्त यह है कि राज्य सरकारों को आवश्यक धनराशि के 40 प्रतिशत का भुगतान अपने पास से करना होगा और केंद्र सरकार का योगदान मात्र 60 प्रतिशत का होगा. इससे पहले बाघ अभ्यारण्यों को आवंटित की जाने वाली पूरी धनराशि सीधे एनटीसीए के हवाले की जाती थी.’’

राजस्थान वन्यजीव बोर्ड के सदस्य का पद भी संभाल रहे तंवर कहते हैं, ‘‘हमनें वित्तमंत्री से एक मुलाकात कर राज्यों के अनिवार्य हिस्से को कम करते हुए 20 प्रतिशत करने की मांग की है, जैसा कि पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ है.’’

तमाम मुद्दों पर विचार करते हुए और संरक्षण के काम को लेकर मोदी की प्रतिबद्धता पर संदेह जताने के बावजूद सच्चाई यह है कि भारतीय जंगलों में बाघ फलफूल रहे हैं. जीटीएफ सम्मलेन में जारी किये गए नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि विश्वभर के कुल 3890 बाघों में से 2286 सिर्फ भारत में ही हैं.

First published: 19 April 2016, 11:19 IST
 
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