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दुनिया में सबसे अधिक पेड़ लगाता है ये देश, NASA के अध्ययन में हुआ खुलासा

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 February 2019, 16:11 IST

दुनियाभर में पर्यावरण असंतुलन एक परेशानी का सबब बन गया है. ऐसे में लोगों को अक्सर ही हिदायत दी जाती है कि ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाएं. पे़ड़ों को ना काटें और उनकी देखभाल करें. आज हम बात करने जा रहे हैं दुनिया में सबसे अधिक पेड़ लगाने वाले देश की. यही नहीं ये देश पर्यावरण को ठीक रखने में भी सबसे ज्यादा योगदान दे रहा है.

बता दें कि भारत और चीन ऐसे दो देश हैं जो दुनियाभर में सबसे अधिक पे़ड़ लगाते हैं. इस बात का खुलासा नासा ने अपनी एक रिसर्च में किया है. बावजूद इसके भारत में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है. इसकी वजह भारत में तेजी से पेड़ों की कटाई करना है. दरअसल, भारत में जितनी तेजी से पेड़ लगाए जा रहे हैं उससे कही अधिक तेजी से पेड़ों की कटाई की जा रही है. यानि भारत में जिस मात्रा में पेड़ लगाए जा रहे हैं उससे दोगनी मात्रा में पेड़ काटे जा रहे हैं, इसलिए यहां प्रदूषण कम नहीं हो पा रहा है.

बता दें कि NASA के एक उपग्रह द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से यह बात सामने आई है. इस अध्ययन के लेखक ची चेन के मुताबिक एक तिहाई पेड़-पौधे चीन और भारत में हैं, लेकिन ग्रह की वन आच्छादित भूमि का नौ प्रतिशत क्षेत्र ही केवल 9 फीसदी ही उनका है.

चेन बताते हैं कि, "अधिक आबादी वाले इन देशों में अत्यधिक दोहन की वजह से भू क्षरण की आम अवधारणा के मद्देनजर यह तथ्य हैरान करने वाला है.” इस अध्ययन में कहा गया है कि हालिया उपग्रह आंकड़ों में पेड़-पौधे लगाने की प्रक्रिया का पता चला है जो मुख्य रूप से चीन और भारत में हुई है.

अध्ययन में इस बात का भी पता चला है कि पेड़ पौधों से ढके क्षेत्र में वैश्विक बढ़ोत्तरी में 25 प्रतिशत योगदान केवल चीन का है, जो वैश्विक वनीकरण क्षेत्र का मात्र 6.6 फीसदी है. वहीं चीन में वन क्षेत्र 42 प्रतिशत और कृषिभूमि क्षेत्र 32 प्रतिशत है जबकि इसके उलट भारत में कृषिभूमि 82 फीसदी है. वहीं वनों का क्षेत्र केवल 4.4 प्रतिशत है. अध्ययन में कहा गया है कि वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की बेहतरी की दिशा में चीन कई महत्वाकांक्षी कार्यक्रम चला रहा है.

नासा के अध्ययन के मुताबिक भारत और चीन में साल 2000 के बाद से खाद्य उत्पादन में 35 फीसदी की से अधिक की बढ़ोतरी हुई है. वहीं भारत और चीन में 1970-80 के दशक में पेड़-पोधौं के संबंध में स्थिति सही नहीं थी.1990 के दशक में लोगों को इस चीज का एहसास हुआ. उसके बाद चीजें बदलने लगीं.

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First published: 18 February 2019, 16:11 IST
 
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