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सातवें आसमान पर सौर ऊर्जा और कछुए की रफ्तार से बढ़ता रूफटॉप सोलर पीवी

स्कंद विवेक धर | Updated on: 14 February 2017, 0:33 IST
QUICK PILL
  • वर्ष 2022 तक रूफटॉप सोलर पीवी (सोलर फोटोवोल्टैक) के जरिए 40 गीगावॉट बिजली के उत्पादन का लक्ष्य है.
  • फिलहाल रूफटॉप सोलर पीवी के जरिए कुल 1.1 गीगावॉट बिजली का ही उत्पादन हो रहा है.
  • क्रिसिल के मुताबिक, इस गति से 2022 तक महज 12 से 13 गीगावॉट बिजली उत्पादन की क्षमता तक पहुंचा जा सकेगा.

भारत इस साल दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक बन जाएगा. हाल ही में तमिलनाडु के कमूथी में दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पॉवर पार्क बना है. मध्य प्रदेश के रीवा में इससे भी बड़ा सोलर पार्क बनने की राह पर है. इसमें दुनिया की सबसे सस्ती सौर विद्युत (2.97 रुपए/यूनिट) पैदा होने का दावा किया गया है.

महीने भर पहले ही देश ने नौ गीगावॉट सौर बिजली क्षमता हासिल की है. हालांकि, सौर ऊर्जा की इस लंबी छलांग के बावजूद वह सेगमेंट कछुए की चाल से आगे बढ़ रहा है, जिस पर कुल सौर ऊर्जा लक्ष्य का 40 फीसदी दारोमदार है. वह सेगमेंट रूफटॉप सोलर पीवी (सोलर फोटोवोल्टैक) का है.

25 जून 2014 को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने ‘ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप एंड स्मॉल सोलर पॉवर प्लांट प्रोग्राम’ शुरू किया था. इस कार्यक्रम के तहत वर्ष 2022 तक कुल 100 गीगावॉट की क्षमता वाले सौर ऊर्जा प्लांट लगाने हैं. इसमें से 40 गीगावॉट बिजली रूफटॉप सोलर पीवी के जरिए हासिल करनी है. लेकिन, रूफटॉप सोलर पीवी की वर्तमान गति को देखते हुए यह लक्ष्य लगभग नामुमकिन है. विश्लेषण फर्म क्रिसिल रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि रूफटॉप सोलर पीवी इंस्टॉलेशन की यही गति बनी रही तो वर्ष 2022 तक महज 12 से 13 गीगावॉट की उत्पादन क्षमता हासिल की जा सकेगी.

क्रिसिल रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर प्रणव मास्टर बताते हैं, 'फिलहाल देश में रूफटॉप सोलर पीवी के जरिए 1.1 गीगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है. 2022 तक 40 गीगावॉट के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अगले पांच साल में 36 गुना उत्पादन बढ़ाना होगा, जो कि वर्तमान परिस्थितियों में बेहद मुश्किल है.'

क्यों रूक रही है ग्रोथ

गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की एक रिपोर्ट रूफटॉप सोलर पीवी की रफ्तार रोकने के लिए कारकों को जिम्मेदार ठहराती है. ये कारक हैं, जानकारी का अभाव, स्वीकृति में लगने वाला लंबा समय, सरकारी नीति में जल्दी-जल्दी होने वाले बदलाव और विद्युत वितरण कंपनियों की अरूचि. रूफटॉप सोलर पीवी के क्षेत्र में अन्य राज्यों से बेहतर प्रदर्शन करने वाला कर्नाटक भी सरकारी नीति में बदलावों का खामियाजा भुगत रहा है.

अक्टूबर 2013 में कर्नाटक इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (केईआरसी) ने रूफटॉप सोलर बिजली के लिए 9.56 रुपए प्रति यूनिट का टैरिफ घोषित किय था. हालांकि ये दर उनके लिए ही थी, जिन्होंने केंद्र की ओर से मिलने वाली 30 फीसदी सब्सिडी न ली हो. सब्सिडी लेने वालों के लिए यह दर 7.20 रुपए प्रति यूनिट थी.

बेंगलुरु स्थित शोध संस्थान अशोक ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड एन्वायरमेंट (एट्री) की फेलो उल्का केलकर कहती हैं, 'ऊंची टैरिफ के चलते राज्य के कई लोग रूफटॉप सोलर पीवी के प्रति आकर्षित हुए. उम्मीद से अधिक आवेदन आ जाने के बाद केईआरसी ने मई 2016 में अचानक टैरिफ को घटाकर 7.08 रुपए प्रति यूनिट (बिना सब्सिडी) और 6.03 रुपए प्रति यूनिट (सब्सिडी के साथ) कर दिया. अचानक टैरिफ में आई गिरावट ने रूफटॉप सोलर के लिए बने उत्साह को खत्म कर दिया है.'

सब्सिडी का गणित

सब्सिडी और गैर-सब्सिडी रूफटॉप सोलर पीवी के लिए टैरिफ की अलग-अलग दरों पर सवाल उठाते हुए उल्का कहती हैं, रूफटॉप सोलर पीवी को बढ़ावा देने के लिए 30 फीसदी सब्सिडी केंद्र सरकार देती है. सब्सिडी लेने वालों को कम टैरिफ मिलने से लोग सब्सिडी के प्रति हतोत्साहित होते हैं. ऐसे में राज्य सरकार और राज्य सरकार की योजना एक-दूसरे की पूरक होने की बजाय विरोधी बन गई हैं.

हालांकि, टैरिफ में कमी के बावजूद केईआरसी द्वारा दी जा रही टैरिफ देश में सबसे अधिक है. उत्तराखंड में बिजली खरीदने का कोई प्रावधान नहीं है. इसी तरह, मध्यप्रदेश में एक यूनिट के महज 2.5 रुपए मिलते हैं. ऐसे में रूफटॉप सोलर पीवी को कैसे रफ्तार मिलेगी और पांच साल में 40 गीगावॉट का लक्ष्य कैसे हासिल होगा? ये बड़े सवाल हैं

सरकार के अधिकारी भी मानते हैं कि 40 गीगावॉट का लक्ष्य बहुत बड़ा है, लेकिन उनका ये भी कहना है ये लक्ष्य इतना बड़ा भी नहीं है, जिसे हासिल न किया जा सके.

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर पीवी की जिम्मेदारी संभाल रहे अंडर सेक्रेटरी हिरेन चंद्र बोरा के मुताबिक, मंत्रालय पूरे प्रॉसेस को ऑनलाइन करने जा रहा है, जिससे इसे लागू करने में आ रही लाल फीताशाही खत्म हो सके. इसके अलावा, सरकार रूफटॉप पीवी के लिए सस्ते कर्ज की व्यस्था करने पर भी काम कर रही है. इससे रूफटॉप सोलर पीवी को रफ्तार मिलेगी.

बहरहाल, सरकार ने अपना ध्यान देश में हजारों की संख्या में मौजूद सरकारी कार्यालयों पर केंद्रित कर लिया है. मार्च 2017 तक केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों पर रूफटॉप सोलर पीवी लगाने का लक्ष्य है. इस कड़ी में बीते 10 फरवरी को ही राष्ट्रपति एस्टेट में रूफटॉप सोलर पीवी का का पहला चरण शुरू किया गया है. इसमें राष्ट्रपति एस्टेट की सात इमारतों की छतों पर सोलर पैनल के जरिए 670 किलोवाॅट सौर ऊर्जा पैदा की जाएगी.

First published: 14 February 2017, 7:14 IST
 
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