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बीते साल वायु प्रदूषण के मामले में चीन को पछाड़ दिया भारत ने

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 February 2016, 12:45 IST

साल 2015 में वायु प्रदूषण के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर कुछ चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं. पहली बार भारत में वायु प्रदूषण का स्तर चीन से अधिक रहा.

ग्रीनपीस के नासा उपग्रह डेटा विश्लेषण की मानें तो पहली बार इस शताब्दी में भारत को चीन की तुलना में अधिक वायु प्रदूषण झेलना पड़ा. गौरतलब है कि चीन ने अपने यहां बुरी तरह प्रदूषित हो चुकी हवा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बीते कुछ सालों में कई उपाय किए थे. इन उपायों की वजह से वहां की आबोहवा सुधरी है. जबकि इस दौरान भारत का प्रदूषण स्तर पिछले दशक में लगातार बढ़ता गया है. अब यह स्तर बढ़कर चीन से आगे निकल गया है.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 13 भारतीय हैं. अपनी राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक रैंकिंग रिपोर्ट में ग्रीनपीस ने बताया था कि राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक वाले 17 शहरों में 15 शहरों का प्रदूषण स्तर भारतीय मानकों से बहुत ज्यादा है. यह रिपोर्ट बताती है कि देश भर के  32 स्टेशनों में 23 स्टेशन में वायु प्रदूषण का स्तर राष्ट्रीय मानक से 70 प्रतिशत अधिक  दर्ज किया गया.

वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सार्वजनिक क्षेत्र में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए एक मजबूत प्रणाली लायी जाए जो लोगों को उनके स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचने के लिये सुरक्षात्मक कदम उठाने के बारे में जानकारी दे. इसके अलावा सरकार खराब वायु प्रदूषण वाले दिनों में रेड अलर्ट जारी करे और लंबी अवधि के लिये नीतिगत फैसले लिए जाय.

राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक वाले 17 शहरों में 15 शहरों का प्रदूषण स्तर भारतीय मानकों से बहुत ज्यादा है

मसलन चीन को ही लेते हैं. यहां पीएम (परटिकुलेट मैटर) का स्तर 2005 से 2011 के बीच 20 प्रतिशत बढ़ गया था. जीवाश्म ईँधन पर निर्भरता की वजह से चीन की स्थिति भी बिगड़ती जा रही थी. ऐसे विकट हालात में चीन सरकार ने 2013 में मजबूत नीतियों और व्यापक राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार की. इसकी वजह से चीन में पीएम का स्तर काफी घटा और 2014 की तुलना में 2015 में प्रदूषण के स्तर में 15 फीसदी की कमी आई.

भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक नेटवर्क के पास 39 चालू निगरानी स्टेशन हैं जो चीन के 1500 स्टेशन की तुलना में लगभग नगण्य हैं. उपग्रह से ली गयी तस्वीरें बताती है कि 2005 तक भारत का प्रदूषण पूर्वी चीन की तुलना में काफी कम था. 2015 में, भारत में पीएम प्रदूषण चीन से ज्यादा हो गया. पिछले दशक की तुलना में इस दशक में वायु प्रदूषण में औसत दो फीसदी का इजाफा हुआ है.

ग्रीनपीस के कैंपेनर सुनील दहिया बताते हैं, “यह जरूरी है कि राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को हासिल करने के लिये समय-सीमा तय की जाय. इस योजना में एक व्यवस्था विकसित की जाये जहां होने वाले सुधार की निगरानी हो सके तथा इन योजनाओं के सफल या विफल होने पर संबंधित प्राधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाये. यह वायु प्रदूषण संकट एक अवसर है जब भारत अपनी हवा को साफ करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ठोस योजना बना सकता है.”

पिछले दशक की तुलना में इस दशक में वायु प्रदूषण में औसत दो फीसदी का इजाफा हुआ है

भारत-चीन वायु प्रदूषण के स्तर के बारे में बात करते हुए ग्रीनपीस (ईस्ट एशिया) के वायु प्रदषण विशेषज्ञ लॉरी मिलिविरटा ने कहा, “चीन एक उदाहरण है जहां सरकार द्वारा मजबूत नियम लागू करके लोगों के हित में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सका. भारत सरकार को वायु प्रदूषण से होने वाले नुकसान से बचने के लिए आवश्यक योजना बनाने की जरुरत है. यह देखते हुए कि प्रदूषण कण हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं, सरकार को राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और शहर स्तर पर कार्ययोजना बनाने की जरुरत है और प्रदूषण को कम करने के लिये लक्ष्य तय करने की भी जरुरत है.”

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भारत में वायु प्रदूषण के संकट को कम करने के लिये एक एकीकृत और समयबद्ध कार्य योजना अपनाए जाने की जरूरत है. हाल ही में सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं जैसे कि ऑड-इवन नीति, कार फ्री डे और थर्मल पावर प्लांट के उत्सर्जन पर कठोर मानक. इसके अलावा 2020 तक भारत वाहन उत्सर्जन 6 को हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु योजना में क्षेत्रीय और विभिन्न शहरों के स्तर पर अलग कार्ययोजना को भी शामिल किया जाना चाहिए.

First published: 23 February 2016, 12:45 IST
 
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