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बिन पानी केपटाउन बनने की राह पर है भारत की 'सिलिकॉन वैली' बेंगलुरु

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 March 2018, 13:19 IST

भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाने वाला शहर बेंगलुरु किस तरह पानी की कमी से जूझ रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहर में हर दिन कार्गो के जरिये हजारों पानी के टैंकर प्रवेश करते हैं. बेंगलुरु में बड़े पैमाने पर लोग बोरवेल से भरे टैंकरों की आपूर्ति पर पूरी तरह निर्भर हैं. जिसके कारण भू-जल के स्तर में गिरावट आई है.

30 वर्षीय नागराज कहते हैं कि "यहां पानी की गंभीर समस्या है, क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर निर्माण हुआ है. इस बात की कल्पना करना बहुत मुश्किल है कि भविष्य में यहां बिन पानी के कैसे रह पाएंगे. अभी यहां जमीन के नीचे 1,500 फीट (450 मीटर) की खुदाई करने पर पानी मिल पाता है. पानाथूर बेंगलुरू की सबसे बड़ी झील है जो बेलंदूर के बगल में स्थित है, इस पर बड़ी संख्या में लोग निर्भर हैं. एक वक्त यह शहर बगीचों के शहर के रूप में जाना जाता था, इसके हरे भरे पार्कों के लिए कई झीलों का निर्माण किया गया था.

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के इकोलोजिस्ट टी.वी. रामचंद्र का कहना है कि शहर मर रहा है. उनका कहना है कि कर्नाटक राज्य की राजधानी पहली ऐसी राजधानी है जो जो केप टाउन की राह पर चल रही है. पहले से ही बेंगलुरू में अनुमानित एक करोड़ लोग पानी के लिए बोरवेल्स और टैंकरों पर निर्भर हैं. जबकि कई इलाकों में कावेरी नदी द्वारा आपूर्ति की जाती है, जिसके जल को लेकर पहले ही कर्नाटक और पड़ोसी तमिलनाडु में विवाद चल रहा है.

दो साल पहले तमिलनाडु में फसलों के लिए नदी से अतिरिक्त पानी देने के आदेश को लेकर बेंगलुरु में घातक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए. जिसने सैकड़ों कंपनियों को बंद करने के लिए मजबूर कर दिया. पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के पक्ष में नदी के बंटवारे को लेकर बदलाव किया, जिसमें बेंगलुरू की भयानक स्थिति का हवाला दिया गया था.

First published: 17 March 2018, 13:17 IST
 
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