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भारत में गहरा रही है जल दंगों की संभावना

सेहर क़ाज़ी | Updated on: 27 May 2016, 8:21 IST
QUICK PILL
  • 2016 में भारत का तामपान सामान्य से अधिक रहा. पिछले दो बार से मॉनसून के लगातार खराब होने की वजह से देश की करीब 33 करोड़ की आबादी सूखे से गंभीर रूप से प्रभावित है.
  • पिछले हफ्ते राजस्थान के फलोदी का तापमान 51 डिग्री सेल्सियस चला गया. तेज गर्मी की वजह से मध्य और पश्चिमी भारत के हिस्सों में पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है.
  • 2016 में भारत का तामपान सामान्य से अधिक रहा. पिछले दो बार से मॉनसून लगातार विफल रहा है. देश के कई हिस्से में बारिश नहीं हुई है और इस बार अधिक गर्मी से स्थिति और अधिक खराब हुई है. पिछले हफ्ते राजस्थान के फलोदी का तापमान 51 डिग्री सेल्सियस रहा. देश की करीब 33 करोड़ आबादी सूखा से प्रभावित है.

    मोनी शर्मा, एएफपी फोटो

    किसानों की आत्महत्या

    संजय कनौजिया, एएफपी फोटो
    गेट्टी इमेजेज

    भारत मॉनसून पर पूरी तरह से निर्भर है और पिछले दो सालों से मानसून की स्थिति खराब रही है. सूखे से स्थिति और अधिक खराब हुई है. केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक भारत के 91 जलाशयों में पानी का स्तर सबसे निचले स्तर पर है. जल का कुल भंडार करीब 29 फीसदी ही बचा हुआ है. करीब 256 जिले की आबादी सूखे से प्रभावित है.

    करीब 85 फीसदी पीने का पानी ध्रुवों पर जमी बर्फ से आता है और इसमें भी तेजी से गिरावट आ रही है. इस साल अब तक कृषि संकट की वजह सेे करीब 116 किसान आत्महत्या कर चुके हैं. 

    कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओड़िशा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, झारखंड और राजस्थान सूखे से प्रभावित है.

    लू के थपेड़े

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    अभी तक लू से भारत में करीब 370 लोगों की मौत हो चुकी है. आईएमडी ने राजस्थान के लिए रेड अलर्ट घोषित कर रखा है. साथ ही मध्य प्रदेश और गुजरात के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है जहां तापमान औसत से अधिक है. पानी की कमी से मरने की समस्या के पीछे सबसे ज्यादा लू जिम्मेदार है.

    गुरुवार को नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फिरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओओए) के मुताबिक 2016 इस सदी का सबसे गर्म साल साबित हो सकता है. मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए हमें जल्द की सही दिशा में कदम उठाने की जरूरत है.

    पानी के लिए मारा-मारी

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    गर्मी की वजह से मध्य और पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में पानी की समस्या है. कृषि की खराब हालत की वजह से किसान आत्महत्या कर रहे हैं.

    पानी को लेकर समस्या इस कदर खराब हो चुकी है कि कुछ शहरों में प्रशासन को कर्फ्यू तक लगाना पड़ा. सरकार की कोशिश पानी को लेकर होने वाले दंगों को रोकने की थी. लोगों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और इस वजह से लोगों के बीच तनाव बढ़ा है. 

    अधिकारियों के मुताबिक इस साल मानसून के सामान्य से अधिक रहने की संभावना है. जून में पिछली बार के मुकाबले 6 फीसदी अधिक बारिश की संभावना है. यह किसानों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद है.

    First published: 27 May 2016, 8:21 IST
     
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