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बायो टॉयलेट: 'शिट फ्री' रेलवे की यह तकनीक कैसे काम करती है

सलमा रहमान | Updated on: 26 February 2016, 18:47 IST

भारतीय रेलवे की पटरियों को शिट फ्री बनाने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 2016-17 वित्त वर्ष के लिए 17 हजार बायो टॉयलेट लगाने की घोषणा की है. संसद में रेलवे बजट पेश करने के दौरान रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने डिब्रूगढ़ राजधानी ट्रेन का भी उल्लेख किया था. यह ट्रेन दुनिया के पहले बायो वैक्यूम टॉयलेट युक्त ट्रेन है जिसे भारतीय रेलवे ने पिछले साल पेश किया था.

पर्यावरण हितैषी तकनीक की चर्चा करते हुए प्रभु ने कहा कि भारतीय रेलवे में अब तक 17,388 पारंपरिक शौचालयों को बदलकर बायो टॉयलेट लगा दिए गए हैं. 

कैसे बायो टॉयलेट करते हैं काम?

बायो टॉयलेट का अविष्कार रेलवे और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है. इनमें शौचालय के नीचे बायो डाइजेस्टर कंटेनर में एनेरोबिक बैक्टीरिया होते हैं जो मानव मल को पानी और गैसों में तब्दील कर देता है.

इन गैसों को वातावरण में छोड़ दिया जाता है जबकि दूषित जल को क्लोरिनेशन के बाद पटरियों पर छोड़ दिया जाता है. 

vaccum toilet

इवैक ट्रेन

अब तक जो पारंपरिक शौचालय होते थे वो सीधे मानव मल को पटरियों पर छोड़ देते हैं. यह ने केवल बेहद घटिया लगता था बल्कि इससे पर्यावरण में गंदगी फैलने के साथ ही रेल पटरियों की धातु को नुकसान पहुंचता था. नई तकनीकी यह भी सुनिश्चित करती है कि यह शौचालय बदबू और गंदगी रहित होने के साथ ही इनमें कॉकरोच और मच्छर नहीं आते. 

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वैक्यूम तकनीकी से युक्त बायो टॉयलेट इसलिए भी ज्यादा फायदेमंद हैं क्योंकि यह पानी की भी बचत करते हैं. जहां ट्रेनों में पाया जाने वाला एक सामान्य बायो टॉयलेट एक बार फ्लश करने पर 10-15 लीटर पानी का इस्तेमाल करता है. वहीं दूसरी तरफ यह वैक्यूम आधारित बॉयो टॉयलेट एक फ्लश में करीब आधा लीटर पानी ही इस्तेमाल करते हैं.

लेकिन बायो टॉयलेट के साथ सबसे बड़ी चिंता इनका काफी ज्यादा रखरखाव होता है. इसके अंतर्गत भौतिक निरीक्षण, ब्लॉक होने पर टॉयलेट शूट की सफाई और क्लोरीनेटर में क्लोरीन गोलियों की चार्जिंग होती है. 

इतना ही नहीं यह सही से काम करें इसके लिए यात्रियों को भी काफी जिम्मेदारी से काम करना होगा. यात्रियों को ध्यान रखना होगा कि वे इन शौचालयों में प्लास्टिक बोतल, चाय का कप, कपड़े, सैनेटरी नैपकिन, नैपी, प्लास्टिक थैलियां, गुटखा पाउच समेत अन्य वस्तुएं न डालें. इन चीजों को शौचालय नहीं बल्कि कूड़ेदान में डालने की जरूरत होती है.

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First published: 26 February 2016, 18:47 IST
 
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