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पृथ्वी पर मंडरा रहे हैं संकट के बादल, वैज्ञानिकों की रिसर्च में सामने आई जानकारी

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 February 2019, 13:12 IST

पृथ्वी पर लगातार परिवर्तन हो रहा है. इस बात के संकेत दुनियाभर में कीटों की संख्या में हो रही कमी से मिल रहा है. ऐसा माना जा रहा है कि 100 सालों में दुनियाभर से कीट खत्म हो जाएंगे. इस बात की जानकारी कीटों की जनसंख्या पर हुई एक रिसर्च रिपोर्ट में दी गई है.

इस रिपोर्ट को फ्रैंसिसको संचेज और क्रिस एजी वायकुयस नाम के दो वैज्ञानिकों ने पिछले 40 सालों में प्रकाशित कीटों के सभी दीर्घकालिक सर्वेक्षणों की समीक्षा कर तैयार किया है. इस खोज में पता चला है कि 40 फीसदी से अधिक कीट प्रजातियां अगले कुछ दशकों में विलुप्त हो सकती हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि रिपोर्ट में जो भी कुछ सामने आया है वह भयावह है. पारिस्थिकी तंत्र के लिए ये सब किसी विपत्ति से कम नहीं है. वहीं स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी फॉर कन्वर्सेशन बायोलॉजी के प्रेजिडेंट पॉल राल्फ एहरलिच का कहना है कि यह एक शानदार पेपर है लेकिन किसी भी जीवविज्ञानी को डरा देने वाला है. अगर सभी कीट मिट जाएंगे तो हम भी मिट जाएंगे. वो बताते हैं कि पूरा कृषि क्षेत्र की कीटों पर निर्भर है.

क्यों फसलों के लिए जरूरी हैं कीट

बता दें कि फसलों के लिए कीट बेहद जरूरी होते हैं, इनके न होने से पूरा चक्र ही टूट जाएगा. किसान कीटों को मारने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं ताकि उनकी फसल को कोई नुकसान न हो. लेकिन कई कीट ऐसे भी होते हैं जो किसानों के मित्र कहे जाते हैं. ये कीट उन कीटों को खाते हैं जो फसल को नुकसान पहुंचाते हैं.

अधिक कीटनाशक का छिड़काव भी कीटों के लुप्त के लिए जिम्मेदार है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि कीटनाशकों का शिकार मित्र कीट व अन्य जीव जंतु भी हो जाते हैं. इसके अलावा यह फूड चेन के लिए भी बेहद जरूरी है.

बता दें कि कीट पौधों को परागण, मिट्टी और पानी को शुद्ध करने, कचरे को रिसायकल करने और कीट नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. शोधकर्ताओं का कहना हैै कि हर साल इनकी संख्या में 2.5 फीसदी की दर से कमी आ रही है. वैज्ञानिक मानते हैं कि कीटों के पतन के लिए जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण जिम्मेदार है.

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First published: 13 February 2019, 13:12 IST
 
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