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क्या श्री श्री रविशंकर के संग एनजीटी बरत रहा है नरमी?

निहार गोखले | Updated on: 5 April 2016, 23:54 IST
QUICK PILL
  • श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने कराया था यमुना के किनारे सांस्कृतिक कार्यक्रम. नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) के अनुसार इस कार्यक्रम से यमुना के डूब क्षेत्र को पहुंचा है स्थायी नुकसान.
  • एनजीटी ने आर्ट ऑफ लिविंग पर लगाया था पांच करोड़ का हर्जाना लेकिन संस्था ने अभी तक नहीं चुकाया है हर्जाना. पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार एनजीटी मामले में नरम रुख अपनाता प्रतीत हो रहा है.

श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने जब दिल्ली में यमुना किनारे विश्व सांस्कृतिक कार्यक्रम (11 से 13 मार्च) कराया तो काफी विवाद हुआ. इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान का मुद्दा नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) में पहुंचा.

नौ मार्च को एनजीटी ने यमुना के डूब क्षेत्र को होने वाले नुकसान के कारण आर्ट ऑफ लिविंग पर पांच करोड़ का हर्जाना लगाया.

फाउंडेशन को क़रीब एक महीने पहले ये हर्जाना भरना था लेकिन उसने ये पैसा नहीं चुकाया. अब एनजीटी ने आर्ट ऑफ लिविंग को फिर 18 दिनों की मोहलत दे दी है.

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एनजीटी ने अपने फैसले में कहा था कि इस कार्यक्रम से यमुना के डूब क्षेत्र को स्थायी नुकसान पहुंचेगा. एनजीटी ने कहा था कि याचिकाकर्ता ने एनजीटी आने में देरी की है इसलिए कार्यक्रम पर रोक नहीं लगायी जा सकती.

श्री श्री रविशंकर ने पहले तो ये हर्जाना भरने से इनकार कर दिया था लेकिन बाद में उन्होंने 25 लाख चुकाते हुए बाकी राशि एक अप्रैल तक देने के लिए कहा था.

श्री श्री रविशंकर का आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन हर्जाने का पैसा चुकाने में कर रहा है देरी

आज तक आर्ट ऑफ लिविंग ने ये पैसा नहीं चुकाया है. फाउंडेशन ने एनजीटी से अब अपील की है कि वो बकाया राशि की बैंक गारंटी ले ले. पर्यावरण मामले से जुड़े वकीलों के अनुसार एनजीटी ने पहले कभी ऐसी छूट नहीं दी है.

चार अप्रैल को हुई सुनवायी में एनजीटी ने तो इस मांग को स्वीकार किया, न ही खारिज किया. एनजीटी ने अगली सुनवायी के लिए 21 और 22 अप्रैल की तारीख दी है.

आर्ट ऑफ लिविंग को मिली इस 18 दिन की राहत से पर्यावरण कार्यकर्ता हैरान हैं. जबकि उन्हें उम्मीद थी कि एनजीटी आर्ट ऑफ लिविंग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएगा.

एनजीओ स्वच्छ के संस्थापक और रविशंकर के कार्यक्रम के खिलाफ मुहिम चलाने वाले विलमेंदु झा कहते हैं, "ऐसा लग रहा है कि न्यायपालिका नरम पड़ गयी है. एनजीटी ने आर्ट ऑफ लिविंग का पर्यावरण की क्षति के लिए जिम्मेदार माना था. कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति इसी आधार पर दी गयी थी कि वो हर्जाना भरेंगे."

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झा कहते हैं, "ट्रायल कोर्ट इससे ज्यादा कड़ायी से पेश आते हैं. शायद जिला मजिस्ट्रेट और सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट एनजीटी से ज्यादा तत्परता से कार्रवाई करते हैं."

झा पूछते हैं कि आर्ट ऑफ लिविंग ने 11 मार्च को ही एनजीटी से क्यों नहीं कहा कि वो हर्जाना बैंक गारंटी के रूप में भरना चाहता है.

बैंक गारंटी बैंक द्वारा दिया जाने वाला प्रमाण पत्र होता है. इस प्रमाण पत्र से तय राशि भविष्य की किसी तय तारीख पर  धारक को मिल जाती है. राशि पाने की तय शर्तें होती हैं.

अगर ऐसा होता है तो हर्जाना लगाने का सारा मकसद ही विफल हो जाएगा. दूसरे हर्जाने की तरह बैंक गारंटी सीधे सरकार को नहीं मिलती.

पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार एनजीटी श्री श्री रविशंकर के फाउंडेशन के संग दिखा रहा है नरमी

एनजीटी एक्ट की धारा 17 के अनुसार पर्यावरण को विशेष क्षति पहुंचती है तो उसकी भरपायी के लिए हर्जाना लगाया जा सकता है. 

शिबानी घोष पर्यावरण अधिवक्ता और सेंटर फॉर पालिसी रिसर्च की फेलो हैं. शिबान कहती हैं, "बैंक गारंटी उस स्थिति में ली जाती है जब पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लगायी तय शर्तों से असहमति की गुंजाइश होती है. लेकिन एनजीटी ने जब पहले ही हर्जाना लगा दिया है तो बैंक गारंटी की बात मेरी समझ से बाहर है."

यही वजह है कि आर्ट ऑफ लिविंग ने एनजीटी के नौ मार्च के आदेश में बदलाव की मांग की है ताकि बैंक गारंटी के रूप में हर्जाना दिया जा सके.

घोष कहती हैं, "बैंक गारंटी की बात करने का मतलब है कि आर्ट ऑफ लिविंग इसे टालना चाहता है."

आर्ट ऑफ लिविंग की गुहार, 5 करोड़ हर्जाने के लिए 4 हफ्ते का समय

एनजीटी ने हर्जाने के भुगतान में जिस तरह की रियायत दी है उससे पहले ही उसपर सवाल उठने लगे हैं.

पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार केवल पांच करोड़ का हर्जाने एनजीटी ने पर्याप्त नरमी दिखायी है. एनजीटी के फैसले से कुछ हफ्ते पहले विशेषज्ञों के एक पैनल ने कहा था कि करीब 120 करोड़ रुपये का हर्जाना लगाया जाना चाहिए.

नुकसान का आकलन


विशेषज्ञ पैनल को सात अप्रैल तक दोबारा कार्यक्रम स्थल पर जाकर इस बात का आकलन करना था कि पर्यावरण को कितनी क्षति पहुंची है. पैनल द्वारा तय की गयी राशि पांच करोड़ रुपये के अतिरिक्त होगी.

इस आकलन में देरी हो रही है क्योंकि कार्यक्रम के लिए सात एकड़ में बनाया गया स्टेज अभी तक वहां से हटाया नहीं गया है.

एनजीटी के चैयरपर्सन स्वतंत्र कुमार ने मामले की सुनवायी के दौरान कहा कि विशेषज्ञ पैनल ने एनजीटी से मामले में और समय मांगा है.

पैनल ने आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा कार्यक्रम स्थल को खाली नहीं करने पर भी सवाल उठाया.

स्वतंत्र कुमार ने जब ऑर्ट ऑफ लिविंग के वकील से कार्यक्रम स्थल को खाली करने के बाबत सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि वो जगह को 'जल्द ही' खाली कर देंगे.

इस मामले पर टिप्पणी के लिए आर्ट ऑफ लिविंग के प्रवक्ता से संपर्क नहीं हो सका.

First published: 5 April 2016, 23:54 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

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