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फेफड़े ही नहीं आंखें भी ख़राब कर रही दिल्ली की हवा

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 27 November 2016, 7:57 IST
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QUICK PILL
  • दिल्ली में वायू प्रदूषण रिकॉर्ड स्तर पर है और आंखों में जलन अब सामान्य सी शिकायत हो गई है. 
  • वहीं एम्स के डॉक्टरों ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि अचानक नेत्र विभाग में मरीज़ों की संख्या दोगुनी हो गई है.  

जैसे ही पता चलता है कि हमारे शहर की हवा ख़राब होती जा रही है तो सबसे पहले ध्यान सेहत की तरफ़ जाता है. चिंता होने लगती है कि कहीं ज़हरीली हवा हमारे फेफड़े को ख़राब ना कर दे. मगर एम्स में मरीज़ों की क़तार का नया आंकड़ा बताता है कि ज़हरीली हवा फेफड़े के साथ-साथ आंखें भी ख़राब कर देती है. 

दिल्ली में वायु प्रदूषण अभी तक के सबसे भयावह स्तर पर हैं. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह पीएम 10 का स्तर 1.90 के या 1,900 यूजी/एम3 पाए गए, जो कि तय मानक से 19 गुना ज्यादा है. इसी तरह पीएम 2.5 का स्तर 598 यूजी/एम3 पाया गया जो कि 60 यूजी/एम3 से 10 गुना ज्यादा है.

एम्स के डॉक्टरों का अनुभव

एम्स दिल्ली के डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण का स्तर बढ़ने से पिछले माह आंखों में संक्रमण के मरीज़ों की संख्या बढ़ गई. आंख में परेशानी की शिकायत लेकर पिछले महीने करीब दोगुने मरीज़ सामने आए. इन मरीज़ों को आखों में खुश्की, पानी आना और खुजली जैसी तकलीफें हो रही हैं. ज़्यादातर मरीज़ आनंद विहार और उत्तरी दिल्ली के बेहद प्रदूषित इलाकों में काम करते हैं और इनका कुछ काम खुले में भी होता है.

नेत्र रोग विशेषज्ञों ने इस स्थिति को 'चिंताजनक' बताते हुए सतर्क रहने को कहा है. एम्स के डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्रालय से आंखों पर प्रदूषण के असर के अध्ययन और शोध के लिए फंड बढ़ाने को कहा है, क्योंकि इस संदर्भ में मौजूदा शोध के निष्कर्ष आंखों पर प्रदूषण के प्रभाव को समझने के लिए नाकाफी हैं. 

नेत्र रोगों में शल्य चिकित्सा प्रमुख डॉ. जे.एस. तितियाल ने बताया कि इन दिनों कुछ ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं कि जिनमें रोगी की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है.

क्या कहते हैं शोध

एम्स द्वारा पूर्व में किए गए शोधों में प्रदूषण स्तर और आंखों के विभिन्न संक्रमणों के बीच आपसी संबंध पाया गया. यह अध्ययन राजधानी में रहने वाले 500 लोगों पर किया गया और उन पर विभिन्न प्रयोग किए गए. अध्ययन में बताया गया कि अत्यधिक प्रदूषण के बीच रहने वाले लोगों ने आंखें लाल होने और खुजली की शिकायत की. आगे चल कर इससे आंखों की रोशनी कम होने और प्रकाश के प्रति आखों के अत्यधिक संवेदनशील होने का खतरा है.

एम्स के ही एक और हालिया अध्ययन में सामने आया कि एम्स पहुंचने वाले नेत्र रोगियों में से 10 से 15 फीसदी लोग आंखों में तेज खुजली और खुश्की की शिकायत लेकर पहुंचते हैं. कॉन्टेक्ट लैंस पहनने वाले लोगों को ऐसी तकलीफ ज्यादा होती है. 

एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि बढ़ते प्रदूषण और उससे होने वाले नेत्र रोगों का एक मुख्य कारण एसपीएम है. यह एसपीएम सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर कहलाता है. साथ ही सड़कों पर गाड़ियों के बढ़ते दबाव के कारण हवा में नाइट्रोजन ऑक्साइड का स्तर बढ़ जाता है.

इस संबंध में सारे शोधों का निष्कर्ष यही है कि आंखों पर वायु प्रदूषण से होने वाले प्रभावों को अभी तक पूरी तरह रिकॉर्ड नहीं किया गया है और अत्यधिक प्रदूषित हवा के आंखों पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभावों के बारे में भी अभी तक पूरी जानकारी नहीं है. अब स्वास्थ्य मंत्रालय की बारी है कि वह नेत्र विषेषज्ञों की मांग पर तुरंत कार्यवाही करे.

First published: 27 November 2016, 7:57 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

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