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अब दुनिया पर मंडराया इस प्रदूषण का खतरा

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 November 2017, 15:38 IST

रात के अंधेरे को रोशनी की चादर से ढकने वाली आर्टिफिशियल लाइट दुनिया में एक नए प्रदूषण को फैलाने की वजह बन गर्इ है. अब तक हम जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण से दो-चार हो रहे थे. लेकिन अब प्रकाश प्रदूषण (लाइट पाॅल्यूशन) का शिकार हो रहे हैं.

जीएफजेड जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के शोधकर्ताओं ने साइंस एडवांसेज जर्नल में एक शोध प्रकाशित किया है. इसमें खुलासा हुआ है कि दुनिया में एनर्जी बचाने के लिए उपयोग हो रही एलईडी लाइट्स अब प्रकाश प्रदूषण को बढ़ावा दे रही हैं.

रातों को रोशन करने वाली स्ट्रीट लाइट और डेकोरेशन में इस्तेमाल हो रहीं आर्टिफिशियल लाइट की चमक के कारण जानवरों, इंसानों और पेड़-पौधों का जीवन चक्र भी प्रभावित हो रहा है. इससे जानवरों और इंसानों की नींद लेने की नेचुरल एक्टिविटी प्रभावित हो रही है. कीटों, मछलियों, चमगादड़ों, चिड़ियों और अन्य जानवरों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है. इसका नकारात्मक असर पेड़-पौधों के विकास पर भी पड़ रहा है.

 

शोधकर्ताओं को उम्मीद थी सोडियम लाइटों की अपेक्षा एलईडी लाइट के इस्तेमाल से अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे विकसित देशों में आर्टिफिशियल लाइट की चमक में कमी आएगी. लेकिन अमेरिका पहले जैसा रहा और ब्रिटेन व जर्मनी में यह अधिक बढ़ गईं. 

सबसे ज्यादा रोशनी से जगमग होने वालेे देशों में स्पेन, इटली आैर नीदरलैंड का नाम सबसे पहले अाता है. वहीं, दूसरी आेर लाइट का सबसे ज्यादा प्रयोग करने वाले देशों में अब साउथ अफ्रीका, अफ्रीका आैर एशिया का नाम शामिल है.

विश्व में प्रकाश प्रदूषण सालाना अधिक तेजी से बढ़ रहा है. 2012 से 2016 के बीच दुनिया में रात में कृत्रिम रोशनी वाले क्षेत्र में 2.2 फीसदी की सालाना दर से वृद्धि हुई. शोधकर्ताओं के मुताबिक एक अन्य शोध में 1992-2013 के बीच इसमें सालाना दो फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है.

अगस्त में जारी हुर्इ हार्वर्ड स्टडी में तो प्रकाश प्रदूषण को महिलाआें में ब्रेस्ट कैंसर को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार बताया गया. इसकी असल वजह यह है कि हमारा शरीर दिन में रोशनी आैर रात में अंधेरे का आदी होता है. एेसा नहीं होना शरीर पर बुरा प्रभाव डालते हैं.

रिसर्च में इस बात पर जोर दिया गया कि एलर्इडी लाइट बेशक बचत के लिए और आंखों के लिए बेहतर होती हैं. लेकिन इसका इस्तेमाल इस कदर बढ़ गया है कि यह नुकसानदायक हो गया है. 

First published: 26 November 2017, 15:31 IST
 
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