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Chandra Grahan 2020: इस दिन लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, ये पड़ेगा आपकी जिंदगी पर प्रभाव

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 October 2020, 12:57 IST

Lunar Eclipse 2020: इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण अगले महीने की 30 तारीख को लगने जा रहा है. ये चंद्र ग्रहण 01 बजकर 04 मिनट पर लगेगा. इसका परमग्रास दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर होगा. उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श शाम 5 बजकर 22 मिनट पर होगा. इसके साथ ही इस बार लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा. चंद्रमा को मन का कारण कहा जाता है इसलिए इसका सीधा असर व्यक्ति के मन पर पड़ता है. इसके साथ हीजब चंद्र ग्रहण ग्रसित होता है तब लोगों के मन में नकारात्मक विचार आना भी शुरु हो जाते हैं.

इस साल 2020 के नवंबर महीने में आखिरी चंद्र ग्रहण लगने वाला है जो एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा. इस साल का यह आखिरी चंद्र ग्रहण होगा जो वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र में पड़ेगा. ग्रहणकाल के दौरान हर किसी को अपने चंद्रमा को बलवान करके की कोशिश जरूर करनी चाहिए. इससे मन पर किसी भी तरह का दुष्प्रभाव नही पड़ता. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, व्यक्ति को अपने आपको शुद्ध और पवित्र बनाए रखना होता है. ग्रहणकाल के दौरान अपना और छोटे बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण काल में भगवान की मूर्ति स्पर्श नहीं करनी चाहिए. इसके अलावा सूतक काल ग्रहण लगना पहले ही शुरू हो जाता है. इस दौरान खाने पीने की मनाही होती है. ग्रहण के दौरान बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए.


क्या होता है उपच्छाया ग्ररहण-

ग्रहण से पहले चंद्रमा, पृथ्वी की परछाईं में प्रवेश करता है जिसे उपच्छाया कहते हैं. इसके बाद ही चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक छाया में प्रवेश करता है. जब चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक छाया में प्रवेश करता है, तब वास्तविक ग्रहण होता है. लेकिन कई बार चंद्रमा धरती की वास्तविक छाया में जाए बिना, उसकी उपच्छाया से ही बाहर निकल आता है. जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया न पड़कर केवल उसकी उपछाया मात्र ही पड़ती है, तब उपच्छाया चंद्र ग्रहण होता है. इसमें चंद्रमा के आकार में कोई अंतर नहीं आता है. इसमें चंद्रमा पर एक धुंधली-सी छाया नजर आती है.

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आयुर्वेद की दृष्टि से, ग्रहण से दो घंटे पहले हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन खाना ठीक रहता है. हालांकि, ग्रहण के दौरान कुछ भी नहीं खाना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, चंद्र ग्रहण को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक कहा गया है. ऐसे में जब भी चंद्रमा पर ग्रहण लगता है तो व्यक्ति के मन पर सीधा असर होता है. अगर व्यक्ति की कुंडली में चंद्र ग्रहण पीड़ित हो या चंद्र ग्रहण दोष बन रहा हो तो चंद्र ग्रहण का असर इन लोगों पर अधिक पड़ता है.

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इसके अलावा चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा पानी को अपनी ओर आकर्षित करता है. और समुद्र में बड़ी -बड़ी लहरें काफी ऊचांई तक उठने लगती है. चंद्रमा को ग्रहण के समय अत्याधिक पीड़ा से गुजरना पड़ता है. इसी कारण से चंद्र ग्रहण के समय हवन, यज्ञ, और मंत्र जाप आदि किए जाते हैं. पुरातलन काल में ग्रहण के समय याचक लोग शोर मचाते, ढोल बजाते और दैत्यों की भर्त्सना में जोर-जोर से अपशब्द कहते सुने जाते थे. धार्मिक लोग उस समय विशेष रूप से जप-तप और दान-पुण्य करते थे.

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First published: 6 October 2020, 12:57 IST
 
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