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भारत और बांग्लादेश के 14 करोड़ लोगों पर भयंकर भूकंप का खतरा

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(सांकेतिक फोटो)

भारत और बांग्लादेश में 14 करोड़ लोग भयंकर भूकंप के खतरे की जद में हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, बांग्‍लादेश के नीचे एक भयंकर भूकंप का केंद्र बन रहा है. वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में कहा है कि भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 8.2 से 9 तक हो सकती है. 

एक नए शोध में यह चेतावनी दी गई है कि यह भूकंप पूर्वोत्‍तर भारत के कई शहरों को बर्बाद कर सकता है.  नेचर जिओ साइंस जर्नल में छपे शोध में वैज्ञानिकों का कहना है उनके पास दुनिया के सबसे बड़े नदी डेल्‍टा के नीचे की दो टेक्‍टॉनिक प्‍लेट्स के पास बढ़ते तनाव के सबूत हैं.

पूर्वोत्तर भारत के इलाके में खतरा

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर तनाव की सीमा टूटती है, तो इस क्षेत्र के कम से कम 14 करोड़ लोगों पर असर पड़ेगा. रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ कंपन के सीधे प्रभाव से विनाश नहीं होगा, बल्कि महान नदियों के रास्‍तों, समुद्र तट के करीब की जमीन में व्‍यापक तौर पर बदलाव आ जाएगा.

वैज्ञानिकों ने इसके लिए भारत के उत्तरी-पूर्वी हिस्से के अलावा भारत-बांग्लादेश की सीमा के इलाकों से लिए गए 2003 से 2013 के आंकड़ों का अध्ययन किया. वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वी भारत का बड़ा हिस्सा खतरनाक भूकंप की आशंकाओं से घिरा हुआ है. 

नेचर जिओ साइंस जर्नल की रिपोर्ट

नेजर जिओ साइंस की रिपोर्ट में जिस इलाके का जिक्र किया गया है, वो करीब 100 किलोमीटर इलाके में फैला हुआ है. कोलंबिया यूनिवर्सिटी के भू-वैज्ञानिक और शोध रिपोर्ट के मुख्य लेखक माइकल स्टेकलर के मुताबिक यह नहीं बताया जा सकता कि भूकंप कब आएगा?  

यह नया खतरा एक सबडक्शन जोन है, जहां पृथ्वी के क्रस्ट का एक हिस्सा या फिक एक टेक्टॉनिक प्लेट दूसरे को धक्का देती है. दुनिया के सबसे भयानक भूकंप इन्‍हीं जोन के आस-पास आते हैं.

जैसे हिन्‍द महासागर और सुनामी, जिसने 2004 में 2,30,000 लोगों की जान ले ली थी. 2011 के टोहोकू भूकंप और जापान के चारों तरफ आई सुनामी 20,000 से ज्‍यादा लोगों को बहा ले गई थी.

इसी की वजह से फुकूशिमा प‍रमाणु आपदा भी आई थी. अभी तक पता चले सभी खतरनाक जोन समुद्र के नीचे थे, लेकिन यह जमीन के नीचे है, जिससे खतरा बढ़ जाता है. 

8.2 से 9 तीव्रता के भूकंप का खतरा

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के भू-वैज्ञानिक माइकल स्‍टेकलर कहते हैं कि दोनों प्‍लेटों के बीच तनाव कम से कम 400 सालों से बन रहा है. जब प्‍लेट्स अलग होंगी, तो कंपन की तीव्रता रिक्‍टर स्‍केल पर 8.2 से ज्‍यादा होगी, यह बढ़कर 9 भी हो सकती है. अब तक का सबसे खतरनाक भूकंप भी इसी तीव्रता का है.

शोध कर्ताओं के मुताबिक, भारत और हिन्‍द महासागर की एक बड़ी प्‍लेट एशिया में उत्‍तर-पूर्वी हिस्‍से पर करोड़ों-अरबों साल से धक्‍के मार रही है. इसकी वजह से उत्‍तर में हिमालय बना और 2015 में नेपाल में भूकंप आया, जिसमें करीब 9,000 लोग मारे गए.

गंगा-ब्रह्मपुत्र का डेल्टा जद में

ढाका यूनिवर्सिटी के भूगर्भ वैज्ञानिक मानते हैं कि वास्तव में भारतीय प्लेटें एक साल में 13 से 17 मिलीमीटर तक खिसक रही हैं. इसकी वजह से वहां ऊर्जा संचित हो गई है, जो 100 साल से मुक्त नहीं हुई है.

बांग्‍लोदश और पूर्वी भारत को इन भूकंपों से सबसे ज्‍यादा खतरा होगा. गंगा और ब्रह्मपुत्र का विस्‍तृत डेल्‍टा इसकी चपेट में होगा. भूकंप का असर म्‍यांमार और उसके आगे भी जा सकता है.

First published: 13 July 2016, 4:31 IST
 
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