Home » एन्वायरमेंट » Microhyla laterite: Indian Researcher Team Discovered New Frog Species in Karnataka
 

भारतीय दल ने कर्नाटक में खोजी मेंढक की नई प्रजाति

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 March 2016, 18:53 IST

शोधकर्ताओं के एक दल ने कर्नाटक में छोटे मुहं वाले मेंढक की नई प्रजातियां खोजी हैं. अंगूठे के नाखून जितने बड़े इस मेंढक को इसके प्राकृतिक स्थान के हिसाब से माइक्रोहिला लैटराइट का नाम दिया गया है.

भारतीय वैज्ञानिकों और सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी के दल ने करीब 1.6 सेंटीमीटर आकार वाले इस मेंढक को खोजा. पीले-भूरे रंग से मिश्रित इस मेंढक की पीठ, हाथ, पैर पर काली धारियां हैं. इसकी आवाज स्पष्ट रूप से झींगुर जैसी है. 

Microhula laterite Frog Karnataka.png

इसका निवास भारत के दक्षिण पश्चिम तटीय मैदानों पर लैटेराइट चट्टानों में है. भारत के तटीय मैदानों की शोध करने वाले स्वतंत्र शोधकर्ता रमित सिंघल ने इसे अपने सर्वेक्षण के दौरान खोजा. रमित इसे अपने प्रमुख शेषाद्री केएस के पास ले गए जहां दल ने मिलकर इस मेंढक की विवेचना की. यह शोध प्लॉस वन जर्नल में प्रकाशित हुई है.

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सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी में फैकल्टी ऑफ साइंस के बायोलॉजिकल साइंसेज डिपार्टमेंट के पीएचडी छात्र शेषाद्री केएस ने कहा, "इस मेंढक का नाम इसके निवास स्थान पर रखने से हम पारिस्थिकी महत्ता वाली इन विलुप्तप्राय चट्टानों की ओर ध्यान आकर्षित कर पाएंगे."

इस मेंढक की खोज एक नई प्रजाति के रूप में स्थापित करने के लिए शेषाद्री की टीम ने इसके जींस, शारीरिक बनावट, रंगरूप और आवाज की चार अलग-अलग मेंढकों से तुलना की. 

दल में शामिल एक अन्य शोधकर्ता प्रीति हेब्बर के मुताबिक एम लैटराइट एक बिल्कुल अलग प्रजाति है जो एम शोलीगरी से मिलती जुलती है. यह केवल पश्चिमी घाटों पर ही पाई जाती है. 

प्राथमिक परिणामों के आधार पर विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि एम लैटराइट को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कन्जर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की लाल सूची यानी विलुप्तप्राय सूची में डाल देना चाहिए. क्योंकि इस मेंढक का भौगोलिक विस्तार दक्षिण पश्चिम भारत में केवल 150 किलोमीटर क्षेत्रफल तक ही है. 

First published: 12 March 2016, 18:53 IST
 
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