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Monsoon 2021: इस बार मानसून में बारिश औसत से कम, इन फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा असर

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 August 2021, 15:00 IST

 

Monsoon 2021: इस बार मानसून औसत से कुछ कम रहने का अनुमान है. मौसम कार्यालय ने कपास, सोयाबीन, मक्का और चावल जैसी गर्मियों में बोई जाने वाली फसलों के उत्पादन पर चिंता जताई है. भारत चावल का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और खाद्य तेलों का शीर्ष आयातक है.

उत्पादन में गिरावट न केवल चावल और कपास के निर्यात को सीमित कर सकती है, बल्कि पाम तेल, सूरजमुखी तेल और सोया तेल जैसे खाद्य तेलों के आयात को भी बढ़ावा दे सकती है.


मौसम विज्ञान विभाग (IMD)के आंकड़ों से पता चलता है कि मध्य और पश्चिमी भारत में कपास और सोयाबीन उगाने वाले क्षेत्रों में 98 प्रतिशत की कमी के साथ, भारत में 11 अगस्त तक सप्ताह में 50 साल के औसत से 35 फीसदी कम बारिश हुई.

इससे इस साल फसल की पैदावार कम हो सकती है, खासकर सोयाबीन, कपास और दलहन जैसी फसलों में कमी आएगी." कपास, सोयाबीन और दालों की खेती मुख्य रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में की जाती है और इस साल सूखे के कारण इन फसलों की बुवाई में देरी हुई है.

जून में जहां मानसून की बारिश औसत से 10 फीसदी अधिक थी, वहीं जुलाई में वे औसत से 7 फीसदी कम हो गई. 1 जून से शुरू हुए सीजन में अब तक कुल बारिश औसत से 6 फीसदी कम रही है.

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार भारतीय किसानों ने 6 अगस्त तक 93.4 मिलियन हेक्टेयर में गर्मियों में बोई गई फसलें साल-दर-साल 2.4 फीसदी कम की हैं.

कपास के साथ बोया गया क्षेत्र पिछले वर्ष के 12.4 मिलियन हेक्टेयर की तुलना में 11.6 मिलियन हेक्टेयर था, जबकि सोयाबीन ने 11.5 मिलियन हेक्टेयर को कवर किया, जो एक साल पहले की तुलना में 2.5 फीसदी कम है.

एक रिपोर्ट के अनुसार IMD के पुणे स्थित एक वैज्ञानिक ने कहा "मानसून अगले सप्ताह फिर से शुरू होने की संभावना है. मध्य भारत में अगस्त के दूसरे भाग में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है.

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First published: 12 August 2021, 15:00 IST
 
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