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दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर महासंकट, माउंट एवरेस्ट पर बचेगा कूड़े का पहाड़

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 June 2018, 13:34 IST

माउंट एवरेस्ट को अब तक दुनिया की सबसे ऊंची चोटी के रूप में जाना जाता है. लेकिन जल्द ही आप इसे दुनिया की सबसे ऊंचे डस्टबिन के रूप जानने लगेंगे. ये कोई मजाक नहीं है बल्कि हकीकत है. क्योंंकि माउंट एवरेस्ट पर लगातार कूढ़े का ढेर बढ़ता जा रहा है. इसकी वजह एवरेस्ट पर पर्वतारोहियों का संख्या में लगातार इजाफा होना है.

ऐसा माना जा रहा है कि पर्वतारोही वहां के पर्यावरण के प्रति जरा सा भी सजग नहीं है. इसीलिए यहां आने वाले ज्यादातर पर्वतारोही इधर-उधर कचड़ा डाल देते हैं. बता दें कि एवरेस्ट चढ़ने की ख्वाहिश लिए सैकड़ों धनी पर्वतारोही हर साल एवरेट्स चढ़ने के लिए वहां पहुंच रहे हैं.

माउंट एवरेस्ट के 8,848 मीटर लंबे रास्ते में पर्वतारोही अपने टेंट, बेकार हो चुके उपकरण, खाली गैस सिलिंडर और यहां तक कि मानवीय अपशिष्ट भी छोड़ आते हैं.

8 बार एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाले पेम्बा दोरजे शेरपा ने कहा, ‘यह बहुत बुरा है। आंखों में चुभता है.’ स्थिति तो यह है कि पहाड़ पर टनों की मात्रा में कचरे पड़े हैं. एवरेस्ट पर चढ़ने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है.

बता दें कि वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी से पिघल रहे हिमनदों के साथ-साथ ये कचरे भी उभर कर आ रहे हैं. भले ही कचरा कम करने के प्रयास किए गए हैं. सागरमाथा प्रदूषण नियंत्रण समिति के अनुसार साल 2017 में नेपाल के पर्वतारोही करीब 25 टन कचरा और 15 टन मानवीय अपशिष्ट नीचे लेकर आए थे. इस मौसम में इससे भी ज्यादा कचरा नीचे लाया गया है. हालांकि यह प्रत्येक साल वहां जमा होने वाले कचरे का मात्र हिस्सा भर है.

पहाड़ पर पड़े इस कचड़े में लगातार वृद्धि होती जा रही है. रिपोर्ट की मानें तो इस साल अब तक कम से कम 600 लोग चोटी तक पहुंच चुके हैं. एवरेस्ट पर कचड़ा कम करने के लिए नेपाल ने पांच साल पहले नियम बनाया था कि पर्वत पर चढ़ने वाली प्रत्येक टीम को करीब ढाई लाख रुपये जमा करने होंगे. जो पर्वतारोही अपने साथ कम से कम आठ किलोग्राम कचरा लाएगा उसे यह राशि वापस कर दी जाएगी.

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First published: 18 June 2018, 13:27 IST
 
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