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तेजी से बढ़ता वायु प्रदूषण: दिल्ली की राह चल रही मुंबई

अश्विन अघोर | Updated on: 24 December 2015, 19:03 IST
QUICK PILL
  • देश की राजधानी दिल्ली के बाद अब औद्योगिक राजधानी मानी जानी वाली मुंबई में भी पिछले कुछ दिनों से वायु प्रदूषण ख़तरनाक स्तर तक पहुंच गया है.
  • मुंबई निवासियों के स्वास्थ्य को देखते हुए वैज्ञानिकों ने शहर के औद्योगिक प्रदूषण और अन्य प्रकार के उत्सर्जनों पर बारीक नज़र रखने की सलाह दी है.

देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण हाल-फिलहाल सुर्खियों में रहा है. लेकिन पिछले चार दिनों में देश की औद्योगिक राजधानी माने वाली मुंबई भी वायु प्रदूषण के मामले में दिल्ली की राह चलती दिख रही है. हवा में प्रदूषण खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है.

पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल मेटिओरोलजी (आईआईटीएम) द्वारा वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए बनाए गये सिस्टम ऑफ़ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकॉस्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के अनुसार मुंबई में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ा है. इससे यहां के निवासियों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है.

तीन गुना ज्यादा प्रदूषण

आईआईटीएम ने मुंबई में नौ जगहों कोलाबा, विले पार्ले, वर्ली, भांडुप, मलाड, चेम्बूर, सायण, वसई और नवी मुंबई में मॉनिटरिंग स्टेशन बनाए हैं. इन स्टेशनों से मिले आंकड़ों के अनुसार मलाड, अंधेरी, भांडुप और चेम्बूर में वायु की गुणवत्ता बहुत तेजी से खराब हुई है.

21 दिसंबर को मुंबई की वायु गुणवत्ता स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित स्तर से तीन गुना ऊपर पहुंच गयी थी

21 दिसंबर को वायु की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि पर्टिकुलेट मैटर की मात्रा 300 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक फीट थी. हालांकि इसके अगले दिन वायु की गुणवत्ता थोड़ी बेहतर हुई लेकिन ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक स्तर तक बनी हुई थी.

इनके अलावा अन्य स्टेशनों पर पर्टिकुलेट मैटर की मात्रा 200 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक फीट थी. स्वास्थ्य के लिहाज से पर्टिकुलेट मैटर की मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए.

वायु प्रदूषण का कारण

आईआईटीएम के 'सफर' कार्यक्रम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉक्टर गुरफ़ान बेग ने बताया, "निगरानी स्टेशन ने इस साल जून में मुंबई में काम करना शुरू किया. इससे पहले तक हमारे पास मुंबई के वायु प्रदूषण की तुलना के लिए कोई डाटा नहीं था. अब हमारे पास पिछले सात महीनों का तीनों सीज़नों का डाटा है."

बेग कहते हैं पिछले सात महीनों में वायु की गुणवत्ता ठीक रही थी इसमें खराबी पिछले चार दिनों में आयी है. वो बताते हैं, "वायु गुणवत्ता 'अच्छा' और 'औसत' से 'खराब' से 'बहुत खराब' हुई है. क्योंकि तापमान और वायु की गति में गिरावट के कारण प्रदूषक तत्वों की मात्रा अचानक बढ़ गई."

मुंबई में समुद्री हवा शहर के प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद करती है लेकिन पिछले चार दिनों से हवा का बहाव थम गया है

मुंबई में वायु प्रदूषण नियंत्रित करने में समुद्री हवा का काफी योगदान रहता है. बेग कहते हैं, "समुद्री हवा साफ और प्रदूषण मुक्त होती है. जब ये शहर में पहुंचती है तो प्रदूषक तत्वों की सफाई कर देती है और वायु प्राकृतिक रूप से साफ हो जाती है. लेकिन पिछले चार दिनों से समुद्री हवा पूरी तरह से थम गयी है.

वहीं पूर्वी मुंबई के औद्योगिक इलाके से प्रदूषित वायु शहर में आ रही है. चूंकि पिछले कुछ दिनों से हवा शांत है इसलिए तीन-चार दिनों से प्रदूषक तत्व वायु मेें बने हुए हैं."

बारीक निगरानी की जरूरत

अभी मुंबई के वायु प्रदूषण पर निर्णायक टिप्पणी करने के लिए पर्याप्त आंकड़े नहीं है इसलिए बेग भविष्य को लेकर कोई दावा करने से हिचकिचाते हैं. वो कहते हैं कि हो सकता है कि ये ट्रांजिशन वाला फेज हो. लेकिन मुंबई के औद्योगिक प्रदूषण और दूसरे उत्सर्जनों का अध्ययन करने के बाद ही निश्चित तौर पर कुछ कहा जा सकता है.

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बेग कहते हैं, "हवा के बहाव की दिशा बदलती रहती है. उसकी गति घटती बढ़ती रहती है लेकिन औद्योगिक प्रदूषण और दूसरे उत्सर्जन की मात्रा नहीं बदलती. इसका मुंबई के वायु की गुणवत्ता पर असर जरूर पड़ेगा. हमें विभिन्न तरह के उत्सर्जनों के साथ मुंबई और उसके आसपास के इलाकों पर बारीक नज़र रखने की जरूरत है."

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First published: 24 December 2015, 19:03 IST
 
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