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ऐसे विकास से मुंबई में फ्लैमिंगो का दीदार दुर्लभ हो जाएगा

अश्विन अघोर | Updated on: 9 March 2016, 23:16 IST
QUICK PILL
  • मुंबई में हर साल हजारों फ्लैमिंगो आते हैं. स्थानीय नागरिकों के लिए फ्लैमिंगो का सीजन एक त्योहार सरीखा बन चुका है.
  • सरकार की एक नई रेल परियोजना से फ्लैमिंगो के सबसे बड़े आशियाने पर खतरा मंडराने लगा है. प्रकृति प्रेमी और पर्यावरणविद् सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं.

वे प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों में आते हैं और उनमें से कई अब यहां के स्थानीय निवासी भी बन चुके हैं.

इनका आगमन उन लाखों लोगों के बीच खुशी की लहर लेकर आता है जो वास्तव में एक ‘झुंड’ के रूप में मुंबई औैर आसपास के क्षेत्रों की झीलों और खाडियों में उनका दीदार करने के लिये बेकरार रहते हैं.

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मुंबई में प्रतिवर्ष आने वाले ये गुलाबी पंखों वाले आगंतुक फ्लेमिंगो पक्षी बीते कई दशकों से सैलानियों और यहां के स्थानीय निवासियों के लिये आकर्षण का एक प्रमुख बिंदु हैं.

सप्ताहांत की छुट्टियों के दौरान हजारों की संख्या में लोग शैवालों पर अठखेलियां करते इस गुलाबी सुंदरता की सिर्फ एक झलक पाने की ललक में मुंबई और आसपास के क्षेत्रों की नमकीन झीलों और खाडि़यों का रुख करते हैं.

कई एनजीओ और पक्षी प्रेमी प्रतिवर्ष सर्दियों का मौसम आते ही पक्षी प्रेमियों के लिये विशेष पक्षी अवलोकन टूअर्स का आयोजन भी करते हैं. बीते कई वर्षों से फ्लेमिंगो इन पक्षी अवलोकन टूअर्स के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं.

फ्लैमिंगो मुंबई के प्रकृति प्रेमियों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं. विकसित हो चुका है फ्लैमिंगो दर्शन का कारोबार

सेवरी, माहुल, चेम्बूर, भांडुप, इरोली, पनवेल और उर्न जैसी जगह सप्ताहांत के दौरान पक्षी निहारने वालों के मध्य सबसे अधिक मशहूर हैं. सिर्फ पक्षीप्रेमी और विभिन्न एनजीओ ही नहीं बल्कि प्रतिवर्ष माहुल, चेम्बूर और उर्न जैसी जगहों के मछुआरे भी बड़ी बेसब्री से इन पक्षियों के यहां आने का इंतजार करते हैं क्योंकि इन पक्षियों के प्रवास के दौरान यहां आने वाले पर्यटकों के लिये होने वाली स्पीड बोट की सवारी उनके लिये आय का एक नया स्रोत लेकर आती है.

यहां के कई स्थानीय निवासियों और मछुआरों ने स्पीड बोटें खरीद ली हैं और अब वे उत्साही पक्षी प्रेमियों के लिये नौका पर्यटन का भी आयोजन कर रहे हैं. इन सब स्थानों में से सेवरी फ्लेमिंगों दर्शन के लिये आने वालों के बीच सबसे अधिक मशहूर है. यहां तक कि प्रतिवर्ष बाॅम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) अपने वार्षिक फ्लेमिंगो का महोत्सव का आयोजन भी यहीं करती है.

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इस वर्ष मुंबईवासियों के बीच एक अजीब सी बेकरारी और उतावलेपन को बड़ी आसानी से देखा और महसूस किया जा सकता है. वे इन झीलों और खाडि़यों का रुख अधिक से अधिक बार करते हुए इन लाजवाब पक्षियों को अपने कैमरों करते हुए आने वाली पीढि़यों के लिये यादगार बना देना चाहते हैं.

इनमें से कई लोग तो इतने बेकरार और उतावले है कि उन्होंने अपने काम से कुछ दिनों की छुट्टी ले ली है और वे फ्लेमिंगों से भरे रहने वाले इस क्षेत्र में कैमरा लेकर डटे हुए हैं. उनके इस उतावलेपन के पीछे एक वजह है, एक बिल्कुल वाजिब वजह. हो सकता है कि यह वह आखिरी मौका हो जब फ्लेमिंगो सेवरी और उर्न जैसी इन जगहों पर आ रहे हैं.

स्वेरी सिर्फ बीएनएचएस के लिये ही आकर्षण का मुख्य केंद्र नहीं है बल्कि स्वेरी मुंबई के पूर्वी तट की अपनी स्थिति के चलते पेशेवर और शौकिया दोनों ही प्रकार के पक्षी प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती है.

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बीते कुछ वर्षों से इस शहर का रुख करने वाले पक्षियों की संख्या में लगातार गिरावट आती जा रही है. बिना सोचे-समझे किये जा रहे विकास और झीलों के लगातार होते भराव के चलते इन पक्षियों का प्राकृतिक आवास गंभीर खतरे में है.

चूंकि शहर के आसपास स्थित ये झीलें और नमक के पहाड़ ही इस क्षेत्र में खुली स्थानों के रूप में बचे हैं इसलिये ‘विकास’ के नाम पर सबकी नजरें इन्हीं पर टिकी हैं. मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के आसपास स्थित झील और नमक के पहाड़ गंभीर खतरे में हैं और ऐसे में सेवरी की भौगोलिक स्थिति इन प्रवासी पक्षियों के लिये बेहद घातक साबित हो रही है.

मुंबई को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट से जोड़ने वाले प्रस्तावित मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (एमटीएचएल) सेवरी से प्रारंभ हो रहा है और वह बिल्कुल फ्लेमिंगो के प्राकृतिक आवास के बीच से. मुंबई में स्थित सेवरी और उर्न के नजदीक स्थित न्हावा शेवा को जोड़ने का काम अगले वर्ष प्रारंभ होगा और यह इन प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिये ताबूत में आखिरी कील के समान होगा.

बिना दूरदर्शिता के किया गया विकास हमेशा ही पारिस्थितिकीतंत्र के लिये घातक होता है और मुंबई इसका जीता-जागता उदाहरण है. यह शहर इंसान की लालची प्रवृत्ति और पर्यावरण विनाश का श्रेष्ठ उदाहरण है.

इस वर्ष आखिरी फ्लेमिंगो महोत्सव आयोजित होगा, इसके बाद लोगों को सेवरी में इस लाजवाब पक्षी के दर्शन नहीं होंगे

मनुष्य के लिये निरंतर किया जा रहा विकास पारिस्थितिकीतंत्र के लिये बेहद घातक साबित हुआ है और इस विकास के चलते स्थानीय पक्षी भी इस जगह को छोड़कर कभी वापस न आने के लिये कहीं और का रुख कर चुके हैं.

जेएनपीटी से मुंबई के रास्ते के सफर को आसान करने के लिये तैयार की गई महत्वाकांक्षी एमटीएचएल परियोजना की परिकल्पना करते समय समुद्री पारिस्थितिकीतंत्र और विशेषकर फ्लेमिगों के विनाश को बिल्कुल नजरअंदाज किया गया.

जैसे ही इस सप्ताह के प्रारंभ में यह खबर सामने आई कि इस लिंक को दोबारा तैयार न करने की सलाह की बीएनएचएस की सलाह को नजरअंदाज करते हुए यह परियोजना अगले वर्ष प्रारंभ होने जा रही है सेवरी की यात्रा पक्षी प्रेमियों की प्राथमिकता में आ गया है क्योंकि हो सकता है कि उनके लिये यह इन लाजवाब पक्षियों को देखने का अंतिम मौका हो.

इस वर्ष आयोजित होने वाला फ्लेमिंगो महोत्सव आखिरी होगा और इसके बाद लोगों को सेवरी में इस लाजवाब पक्षी के दर्शन कभी नहीं होंगे. यही कारण है कि बीएनएचएस द्वारा आयोजित इस महोत्सव को इतनी अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली है.

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इस परियोजना की आलोचना और गंभीर आपत्तियों के बाद सरकार ने बीएनएचएस को एक अध्ययन करने और उपाय सुझाने को कहा. हालांकि सदियों पुराने इस संगठन की सिफारिशों को बाद में रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया क्योंकि इन्होंने फ्लेमिंगों के आवास को बचाने के लिये इस लिंक का रास्ता बदलने का सुझाव दिया था.

केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों ने इनकी सिफारिशों को नजरअंदाज किया और अपनी योजना के साथ आगे बढ़ गईं. एक बार निर्माण प्रारंभ होने के बाद ये प्रवासी पक्षी सेवरी में आना बंद कर देंगे.

पवई की निवासी अनुजा द्विवेदी कहती हैं, ‘‘यह बेहद दुख की बात है कि विकास के नाम पर विनाश किया जा रहा है. यह आने वाली पीढि़यों के लिये बहुत बड़ा नुकसान है. इसी के चलते मैं अपने बेटे को फ्लेमिंगों और अन्य पक्षियों को दिखाने के लिये मुंबई और आसपास के हर क्षेत्र में घुमा रहा हूं. मैंने अपने बेटे के साथ दो दिन दलदली स्थानों पर भी बिताए.’’

माहुल के रहने वाले वामन कोली का मानना है कि सरकार ने मछुआरों और समुद्री पारिस्थितिकीतंत्र को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है.

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कोली कहते हैं, ‘‘मैं विकास का विरोधी नहीं हूं लेकिन यह स्थानीय निवासियों और पारिस्थितिकीतंत्र का ध्यान रखते हुए होना चाहिये. उच्च स्तर का प्रदूषण वहले से ही हमारे लिये एक बड़ा खतरा है और अब एमटीएचएल बचे हुए पारिस्थितिकीतंत्र को खत्म करते हुए हमारी मुश्किलें बढ़ाने का काम कर रहा है. मुझे स्पीड बोट खरीदने के लिये बैंक से कर्ज लेना पड़ा और अब बीते कुछ वर्षो से यही मेरी आजीविका का स्त्रोत हैं. एमटीएचएल के निर्माण के साथ ही मुझे इन नावों को बेचकर बैंक का कर्जा चुकाना होगा.’’

सीवरी का समुद्री पारिस्थितिकीतंत्र पहले से ही सुर्खियों में है. सरकार द्वारा एमटीएचएल के निर्माण का फैसला करने के साथ ही सीवरी और उसके आसपास के क्षेत्रों का रियल एस्टेट बाजार आसमान छूने लगा.

बीते पांच वर्षों में आसपास के क्षेत्रों में कई आवासीय परियोजनाएं सामने आई हैं. सीवरी की खाड़ी पहले से ही रिफाइनरियों और अन्य उद्योगों के कचरे से प्रदूषित है और आवासीय इकाइयों ने इस समस्या को और विकराल ही किया है. एमटीएचएल परियोजना से सेवरी के समुद्री पारिस्थितिकीतंत्र पर मंडराता खतरा और बढ़ जाएगा.

First published: 9 March 2016, 23:16 IST
 
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