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नमामि गंगे परियोजना: बार-बार मिशन निदेशक बदलना किस बात का संकेत है?

निहार गोखले | Updated on: 6 September 2016, 14:05 IST
(कैच न्यूज)

क्या सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नमामि गंगे के प्रति लोगों का रुझान कम होता जा रहा है. नेशनल ग्रीन टाईब्यूनल द्वारा गंगा की सफाई के प्रयासों का नतीजा शून्य बताए जाने के कुछ ही हफ्तों बाद केंद्र सरकार ने अचानक इस कार्यक्रम के मिशन निदेशक रजत भार्गव को हटा दिया है.

एक दिन पूर्व ही मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने मिशन निदेशक आईएएस रजत भार्गव को उनके मूल कैडर आंध्र प्रदेश भेज दिया है. अभी केंद्र सरकार में उनकी प्रतिनियुक्ति की अवधि पूरी होने में एक साल का समय बाकी था. भार्गव ने इस महत्वपूर्ण मिशन का कार्यभार अभी चार माह पहले ही संभाला था.

भार्गव की गत वर्ष जल संसाधन मंत्रालय में संयुक्त सचिव पद पर नियुक्ति की गई थी. सितम्बर माह में वे केंद्रीय भूजल बोर्ड में सदस्य (वित्त) और आयुक्त बने. मई 2016 में उन्हें नमामि गंगे का मिशन निदेशक बनाया गया था.

गंगा की सफाई का नरेंद्र मोदी सरकार का इरादा इसके गठन के पहले ही दिन से साफ था. कह सकते हैं कि चुनाव से पूर्व से ही? परन्तु सरकार अब भी यह तय नहीं कर पा रही है कि यह जिम्मेदारी किसे दी जाए? इसका नेतृत्व किसे सौंपा जाए?

मोदी सरकार के कार्यकाल में इस परियोजना के तीन मिशन निदेशक बर्खास्त किए जा चुके हैं. भार्गव का स्थान तीसरा है.

मोदी सरकार के दो साल और तीन माह के कार्यकाल में इस परियोजना के तीन मिशन निदेशक बर्खास्त किए जा चुके हैं. भार्गव का स्थान तीसरा है. उनके पूर्ववर्ती टीवीएसएन प्रसाद की नियुक्ति मई 2015 में की गई थी. साल के अंत तक उनका तबादला गृह मंत्रालय कर दिया गया.

प्रसाद की नियुक्ति इसलिए की गई थी ताकि वे अपने पूर्ववर्ती आरआर मिश्रा के काम को गति प्रदान कर सकें क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम के तहत किए जा रहे कार्यों की गति से खुश नहीं थे. इसीलिए मिश्रा को हटाया गया था.

जो लोग भार्गव को जानते है, उनका कहना है कि वे एक कुशल और ईमानदार अधिकारी हैं. इसीलिए उनके हटाए जाने से कई लोग चकित हैं. उनसे कुछ ही दिनों पहले मिल कर आए एक व्यक्ति ने कहा, भार्गव काम कर रहे थे. वे 1500 करोड़ रूपए के 231 प्रोजेक्ट के टेण्डर तैयार कर रहे थे, जिनकी घोषणा सरकार ने जुलाई में की थी.

भार्गव के जाने से एक बार और इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की लय टूटेगी

राष्ट्रीय गंगा नदी जल अधिकरण के विशेषज्ञ रह चुके बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बीडी त्रिपाठी ने कहा, ‘बार-बार मिशन निदेशकों को बदलने से इस महत्वाकांक्षी मिशन का कार्य प्रभावित होता है और आदर्श स्थिति यह है कि एक अफसर को अपने पद से कम से कम 5 साल तक नहीं हटाना चाहिए.’

मिशन निदेशक बड़ा पद है और इसके दायरे में आने वाले काम को समझने में ही कई माह लग जाते हैं.

नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल ने हाल ही में 19 अगस्त को सरकार की आलोचना की थी कि गंगा सफाई परियोजना का कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है और इसके लिए किए जा रहे प्रयासों का नतीजा ‘शून्य’ है.

नमामि गंगे योजना

नमामि गंगे मोदी सरकार की अग्रणी योजना है. इसने जल संसाधन मंत्रालय के नाम में गंगा पुनरुद्धार भी जोड़ दिया है, जो इस कार्यक्रम का समन्वय कर रहा है. आधिकारिक तौर पर इसे गंगा सफाई का नेशनल मिशन का नाम दिया गया है.

सरकार के दो साल के कार्यकाल में 8600 करोड़ रूपए की 97 परियोजनाएं शुरू की गईं. उसके बाद जुलाई और अगस्त 2016 में करीब 2000 करोड़ रूपए की परियोजनाएं शुरू की गईं.

ज्यादातर परियोजनाएं घाटों के सौन्दर्यीकरण और नदी किनारे बने मोक्ष धामों के जीर्णोद्धार से जुड़ी हैं. सरकार नदी किनारे स्थित सभी उद्योगों पर स्वचालित निगरानी व्यवस्था कायम करने का विचार कर रही है, जिनसे प्रदूषण फैलता है.

हालांकि आलोचकों ने इस ओर भी ध्यान आकर्षित किया है कि बड़ी चुनौती नदी में इसके आस-पास के क्षेत्र के 118 शहरों से आ रहे बिना परिशोधित सीवेज की समस्या से निपटना है. सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने या उनका जीर्णोद्धार करने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत कई आकर्षक योजनाएं प्रस्तुत की हैं लेकिन वास्तव में कोई काम शुरू नहीं हुआ है.

First published: 6 September 2016, 14:05 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

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