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एनजीटी ने खुले में कचरा जलाने पर पूरी तरह से बैन लगाया

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 December 2016, 15:52 IST
(एनजीटी)

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गुरुवार को देशभर में खुले में कूड़ा जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. नियमों के उल्लंघन पर एनजीटी ने पांच हजार से लेकर 25 हजार रुपये तक जुर्माना लगाने के आदेश दिए हैं. 

एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने लैंडफिल स्थल समेत भूमि पर खुले में कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक के आदेश दिए. पीठ ने कहा कि इस तरह की किसी भी घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या निकाय को साधारण तौर पर कूड़ा जलाने के लिए 5,000 और बड़े पैमाने पर कचरा जलाने के लिए 25,000 रुपये का पयार्वरण मुआवजा देना होगा

अलमित्र पटेल की याचिका पर फैसला सुनाते हुए एनजीटी ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ठोस कचरा प्रबंधन नियमों, 2016 को लागू करने का निर्देश दिया है. पीठ ने पयार्वरण मंत्रलय और सभी राज्यों से छह महीने के भीतर पॉलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) और क्लोरीनयुक्त प्लास्टिक को प्रतिबंधित करने के संबंध में जरूरी दिशा—निर्देश भी जारी करने के लिए कहा.

एनजीटी ने चुनाव के दौरान प्लास्टिक के झंडे-बैनर से पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर गुरुवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी किया. अगले साल यूपी, उत्तराखंड, गोवा समेत पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के मद्देनजर एनजीटी के नोटिस को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

एनजीटी ने कहा कि 2016 के आदेश के तहत कचरों के प्रबंधन और प्रोसेसिंग के लिए प्लांट बनाए जाएंगे और लैंडफिल साइट को बनाया जाएगा, जहां जैविक तौर पर नष्ट होनेवाला कूड़ा रखा जाएगा. जो कचरा जैविक तौर पर नष्ट नहीं होता है, उनका इस्तेमाल रोड के कंस्ट्रक्शन में किया जाएगा.

सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 का सख्ती से पालन करने का निर्देश देते हुए एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय से भी मदद मांगी है. ग्रीन ट्राइब्यूनल ने मंत्रालय और राज्य सरकारों से पीवीसी और क्लोरिनेटेड प्लास्टिक पर 6 महीनों के अंदर बैन लगाने को कहा है. इस प्लास्टिक का पीवीसी पाइप और प्लास्टिक की बोतले बनाने में प्रयोग होता है.

एनजीटी ने कहा, "सभी राज्य सरकारें 2016 के रूल्स के मुताबिक ऐक्शन प्लान चार हफ्तों के अंदर तैयार करें. एक्शन प्लान में पूरे राज्य में सॉलिड वेस्ट के डिस्पोजल का खाका तैयार करें. इन सभी पर समयसीमा के भीतर ऐक्शन लिया जाए."

एनजीटी ने यह फैसला अलमित्रा पटेल द्वारा दायर याचिका पर दिया, जिसमें राज्य और केंद्र सरकारों को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर स्थानीय इकाइयों को निर्देश देने की मांग की गई थी.

First published: 23 December 2016, 15:52 IST
 
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