Home » एन्वायरमेंट » NTCA Records 95 Tiger Deaths in 2018 in India And 41 Are Outside Reserves
 

बाघों के लिए साल 2018 बनकर आया काल, टाइगर रिजर्व में भी सुरक्षित नहीं रहे बाघ, इतनों की हुई मौत

सुहेल खान | Updated on: 17 December 2018, 13:11 IST
(प्रतीकात्मक फोटो)

पर्यावरण असंतुलन की वजह से मौसम में ही तेजी से बदलाव नहीं हो रहे, बल्कि इसकी वजह से प्रकृति की तमाम चीजों पर असर पड़ रहा है. साल 2018 भी इससे बेअसर नहीं रहा. भारत में इसका सबसे बड़ा असर बाघों पर देखने को मिला. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानि NTCA के रिकॉर्ड के मुताबिक, 15, दिसंबर 2018 तक देशभर में 95 बाघों की मौत हो गई. इनमें से कुल 41 बाघ टाइगर रिजर्व के बाहर मारे गए.

टाइगर रिजर्व के बाहर मारे गए कुल 41 बाघों में से 14 की मौत महाराष्ट्र में हुुई है. जो देशभर में टाइगर रिजर्व के बाहर मारे गए बाघों की संख्या का 34 फीसदी है. वहीं महाराष्ट्र में कुल 19 बाघों की मौत 15 दिसंबर 2018 तक हुई. बता दें कि NTCA देशभर में होने वाली बाघों की मौत का डेटाबेस तैयार करता है. इसी के साथ बाघों के मृत शरीर और उनके अवशेषों को इकट्ठा कर विभिन्न राज्यों द्वारा भेजी गई रिपोर्टों का संकलन करता है.

2014 में आखिरी बार आए आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में 190 बाघ थे, जिनमें से 74 बाघ टाइगर रिजर्व के बाहर रह रहे थे. NTCA के सदस्य सचिव अनूप कुमार नायक ने 'द हिंदू' को बताया को बताया कि, “महाराष्ट्र में सबसे अधिक बाघों के मरने की वजह, अधिकतर बाघों का टाइगर रिजर्व के बाहर रहना है.”

उन्होंने बताया कि, “ज्यादातर बाघ टाइगर रिजर्व के बाहर ही नहीं रहते बल्कि, वो उन इलाकों में पहुंच जाते हैं जहां इंसानों का वर्चस्व ज्यादा होता है. जो मानव और जानवरों के संघर्ष को बढ़ावे की संभावनाओं को बढ़ा देते हैं. इस वजह से उनकी मौत हो जाती है.”

ये भी पढ़ें- नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी के मुताबिक 2019 में तबाह हो जाएगी धरती!

15, दिसंबर 2018 तक जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में कुल 95 बाघों की मौत हुई. जिनमें कुल 41 बाघ महाराष्ट्र, 22 मध्य प्रदेश, 15 बाघों की मौत कर्नाटक में हुई है.

ये भी पढ़ें- इन राज्यों में कहर बरपा सकता है 'फेथाई' चक्रवाती तूफानी, प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्ट

First published: 17 December 2018, 13:11 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी