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पता चल गई दिल्ली में ऑड-ईवन ट्रायल के फेल होने की वजह

उमाशंकर मिश्र | Updated on: 24 June 2017, 17:20 IST

साल 2016 की शुरुआत में राजधानी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वायु प्रदूषण पर रोकथाम के लिए वाहनों का ऑड-ईवन ट्रायल किया था. इसे बड़े तामझाम के साथ लागू किया गया और फिर कुछ दिनों के ट्रायल के बाद रोक दिया गया. हालांकि शुरुआत में यह वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के साथ ही दिल्ली की हमेशा जाम रहने वाली सड़कों से वाहनों की आश्चर्यजनक रूप से कमी के रूप में सफल दिखा. लेकिन बाद में यह टांय-टांय फिस्स हो गया.

यूं तो ऑड-ईवन ट्रायल के दौरान दिल्‍ली की हवा की गुणवत्‍ता में दिन के भारी ट्रैफिक वाले घंटों में कुछ सुधार जरूर दर्ज किया गया लेकिन रात में भारी वाहनों और कारों का ट्रैफिक बढ़ने से प्रदूषण पर लगाम लगाने की कवायद पूरी नहीं हो सकी.

इसके बाद आईआईटी-दिल्ली, यूनिवर्सिटी ऑफ सरे और यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम के शोधकर्ताओं ने इस पर रिसर्च की. शोधकर्ताओं ने दिल्‍ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा संचालित चार निगरानी केंद्रों से प्राप्‍त प्रदूषण के स्‍तर और मौसमी दशाओं जैसे नमी, तापमान, हवा की गति व दिशा संबंधी आंकड़ों का विश्‍लेषण किया और इस नतीजे पर पहुंचे कि ट्रायल के दौरान 24 घंटे के औसत पार्टीकुलेट मैटर (पीएम) के स्‍तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. इस‍की वजह ट्रायल के बाद रात में सड़कों पर वाहनों की संख्‍या बढ़ने और वाणिज्यिक वाहनों से होने वाले उत्‍सर्जन को जिम्‍मेदार माना जा रहा है.

आनंद विहार, मंदिर मार्ग, आरकेपुरम और पंजाबी बाग स्थित इन चारों निगरानी केंद्रों को औद्योगिक, व्‍यावसायिक और रिहायशी क्षेत्रों की प्रतिनिधि इकाई के तौर पर अध्‍ययन में शामिल किया गया था. अध्‍ययन में जनवरी और अप्रैल 2016 में ऑड-ईवन ट्रायल के दौरान उत्‍सर्जित पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) की तुलना वर्ष 2015 की समान तारीखों पर उत्‍सर्जित पीएम से की गई थी.

 

ट्रायल के दौरान शाम के अत्‍यधिक ट्रैफिक वाले कुछ घंटों में प्रतिघंटे शुद्ध औसत PM2.5 और PM10 की मात्रा में 74 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई. जबकि, ट्रायल से पूर्व के दिनों से तुलना करने पर औसत PM2.5 और PM10 की मात्रा तीन गुना तक अधिक पाई गई.

अध्‍ययनकर्ताओं की मानें तो ऑड-ईवन ट्रायल के दौरान सुबह 11 बजे से रात आठ बजे तक दिल्‍ली की हवा की गुणवत्‍ता में सुधार देखा गया, पर रात आठ बजे से सुबह आठ बजे के दौरान भारी वाहनों और कारों के बढ़े हुए ट्रैफिक के कारण प्रदूषण पर लगाम नहीं लगाई जा सकी.

शोधकर्ताओं के मुताबिक अनुमानित उत्‍सर्जन स्रोतों के अतिरिक्‍त प्रदूषण का स्‍तर पहले से अधिक होना भी ऑड-ईवन ट्रायल के दौरान हुए सकारात्‍मक बदलाव को बेअसर करने में महत्‍वपूर्ण रहा है. इस अध्‍ययन के नतीजे एन्‍वायरमेंटल पॉल्‍यूशन जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं.

शोधकर्ताओं की टीम में शामिल प्रोफेसर मुकेश कुमार खरे और डॉ. सुनील गुलिया के अनुसार, ‘‘सड़कों पर प्रदूषण कम करने के लिए ऑड-ईवन जैसी योजनाएं लागू करते वक्त ट्रैफिक कम करने पर ध्‍यान केंद्रित करना ही काफी नहीं है. इसके लिए जिम्‍मेदार अन्‍य स्रोतों को नियंत्रित करने की जरूरत है. शोधकर्ताओं की टीम में डॉ. प्रशांत कुमार और डॉ. रॉय एम हैरीसन भी शामिल रहे.

(साभारः इंडिया साइंस वायर)

First published: 24 June 2017, 17:20 IST
 
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