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सूखाग्रस्त महाराष्ट्र में सिर्फ 15 फीसदी पीने का पानी बाकी

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST

सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र में अब सिर्फ 15 फीसदी ही पीने का पानी शेष बचा है. महाराष्ट्र का मराठवाड़ा इलाका पिछले चार साल से सूखे की मार झेल रहा है. यहां सिर्फ दो फीसदी पानी बचा है.

सबसे ज्यादा चालीस फीसदी पानी कोंकण क्षेत्र में है. नासिक, अमरावती, और पुणे में चौदह फीसदी पानी शेष बचा है. राज्य मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई बैठक में राज्य में शेष बचे पीने के पानी की समीक्षा के दौरान यह तथ्य निकलकर सामने आया है.

मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार पानी के स्टॉक के यह आंकड़े छह मई के हैं और पानी की मात्रा पिछले दिनों में और कम हुुई है.

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पिछले साल मई में महाराष्ट्र के जलाशयों में 25 फीसदी पानी मौजूद था. राज्य सरकार के अनुसार 10,500 गांवों में 5159 टैंकरों की मदद से पानी पहुंचाया गया है.

मंगलवार को लोकसभा में ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने बताया था कि देश की 25 फीसदी से अधिक आबादी, 313 जिलों के 58,205 गांवों में सूखा संकट से प्रभावित है.

'स्पेशल टास्क फोर्स का गठन हो'

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सूखे पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार को स्पेशल टास्क फोर्स का गठन करना चाहिए.

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स्वराज आंदोलन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र एक सूखा फंड भी बनाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को सूखाग्रस्त घोषित करते समय उसमें आत्महत्या और किसानों के पलायन को भी शामिल किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय कृषि सचिव को बिहार, गुजरात और हरियाणा के मुख्य सचिव के साथ एक हफ्ते के अंदर सूखे के मुद्दे पर आपातकालीन बैठक बुलाने का निर्देश दिया है.

गुजरात के जलाशयों पर संकट

आपको बता दें कि गुजरात के कम से कम दर्जन भर जिले जल संकट से जूझ रहे हैं, बावजूद इसके सरकार यहां सूखा घोषित करने से बच रही है. इसके बजाय उसने इन जिलों को ''अभावग्रस्‍त'' घोषित कर दिया है, जो सूखे से अलग एक श्रेणी है.

गुजरात के जलाशय तेजी से सूखते जा रहे हैं. राज्‍य सरकार के 22 अप्रैल तक के आंकड़ों के हिसाब से देखें तो यहां के जलाशय अपनी क्षमता के एक-चौथाई तक ही भरे हुए रह गए हैं. इस आंकड़े में नर्मदा बांध शामिल नहीं है, जहां पहले के मुकाबले तीन मई तक 551 मिलियन घन मीटर पानी कम हो चुका है.

कम से कम 63 जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि 45 में 5 फीसदी से भी कम पानी रह गया है. केवल तीन बांध- सुरेंद्रनगर, कच्‍छ और महिसागर जिलों में आधी क्षमता से ज्‍यादा भरे हुए हैं.

First published: 11 May 2016, 3:44 IST
 
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