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जीएम मस्टर्ड पर रोक किसानों के लिए बड़ी जीत

निहार गोखले | Updated on: 7 February 2016, 16:34 IST
QUICK PILL
  • जीएम मस्टर्ड पर होने वाली विशेषज्ञ पैनल की गुपचुप बैठक पर विरोध के बाद पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने आश्वासन दिया कि जनता से राय लेने के बाद ही जीएम मस्टर्ड को मंजूरी दी जाएगी.
  • जीएम मस्टर्ड पर रोक किसानों के लिए बड़ी जीत है. लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी सरकार के जीएम फूड पर गुपचुप रवैए को लेकर आशंकित हैं.

जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) फसलों ने पूरी दुनिया में विवाद खड़ा किया. यूरोप के ज्यादातर देशों में इसपर प्रतिबंध है. भारत में केवल जीएम कॉटन(कपास) की खेती की ही इजाजत है. लंबे समय तक अनाज वाली फसलों में इसका उपयोग टैबू बना रहा.

पांच फरवरी सरकार ने इस टैबू को तोड़ने की एक कोशिश की. पर्यावरण मंत्रालय के एक विशेषज्ञ पैनल दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विकसित सरसों की जीएम प्रजाति को मंजूरी देने के लिए बैठक की. इस जीएम सरसों को धारा मस्टर्ड हाइब्रिड 11 नाम दिया गया है. सरकार पिछले कई महीनों से चुपचाप इसे लाने की कोशिश कर रही है.

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सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका के अनुसार जेनेटिक इंजीनियरिंग एप्रूवल कमेटी (जीईएसी) के सामने ये मामला सितंबर 2015 में पेश हुआ. याचिका के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए इसका जमीनी परीक्षण भी शुरू कर दिया गया. लेकिन फिर सरकार ने अपना ट्रैक बदल दिया.

जब जीईएसी की बैठक शुरू हुई तो उसके पर्यावरण मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे. प्रदर्शनकारी बाद में पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर से भी मिले और उन्हें अपनी विज्ञप्ति सौंपी. जावडेकर ने कहा कि सरकार जनता से राय लिए बगैर जीएम मस्टर्ड को मंजूरी नहीं देगी.

पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा है कि सरकार जनता से राय लिए बगैर जीएम मस्टर्ड को मंजूरी नहीं देगी

किसानों और जीएम फूड का विरोधकर्ताओं के लिए ये एक बड़ी जीत है. किसानों का कहना है कि जीएम मस्टर्ड से भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है. इससे किसानों की रेडिमेड बीजों पर निर्भरता बढ़ जाती है.

देश भर के किसान संगठन जीएम मस्टर्ड के खिलाफ हैं. विभिन्न संगठनों ने मिलकर इसके खिलाफ एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया जिसमें सरकार की पांच फरवीर को गुपचुप बुलायी गई बैठक की आलोचना की गई.

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चेंज डॉट ओआरजी पर इसके खिलाफ ये ऑनलाइन याचिका भी चलायी जा रही है जिसपर अब तक 42 हजार लोग दस्तखत कर चुके हैं. ये याचिका पर्यावरण मंत्रालय को भेजी जा चुकी है.

इस याचिका में जीएम मस्टर्ड पर जो सवाल खड़े किए गए हैं उनकी अनदेखी मुश्किल है. याचिका के अनुसार,
ये स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, किसान इसके खिलाफ हैं.

याचिका में ये जीएम मस्टर्ड की जरूरत पर भी सवाल उठाया गया है. याचिका के अनुसार सरसों की उपज में कोई कमी नहीं आई है, इसके उलट पिछले एक दशक में इसकी पैदावार 25 प्रतिशत बढ़ी है.

पहले जीईएसी सभी जानकारियां बेबसाइट पर सार्वजनिक करता था, केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद ये बंद हो गया है

छह साल पहले तत्कालीन पर्यावरण मंत्री जयराम नरेश जीएम ब्रिंजल(बैंगन) पर ऊपर बतायी गई चिंताओं के तहत रोक लगा दी थी. इस बार भी पर्यावरण मंत्री ने जनता से राय लेने के बाद ही जीएम फूड को इजाजत देने की बात कही है लेकिन लोगों को उनपर पूरा भरोसा नहीं है. क्योंकि अभी तक सरकार जीएम मस्टर्ड से जुड़ी प्रक्रियाओं को गोपनीय रखने की कोशिश करती रही है.

अलायंस फॉर सस्टेनेबल एंड होलिस्टिक एग्रीकल्चर(आशा) से जुड़ी कविता कुरुगंती कहती हैं कि इससे पहले जीईएसी अपनी बैठकों, एजेंडे और मिनट्स की जानकारी अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करते थे. लेकिन जब से मोदी सरकार केंद्र में आई है ये बंद हो गया है.

कविता कहती हैं, "दरअसल, जीईएसी ने गोपनीयता की शपथ ली है. सूचना के अधिकार(आरटीआई) के तहत जानकारी मांगी जा सकती है लेकिन कई बार कई बार आरटीआई का भी जवाब नहीं मिलता."

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First published: 7 February 2016, 16:34 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

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