Home » एन्वायरमेंट » Remote sensing will help to assess crop loss accurately
 

रिमोट सेंसिंग से हो सकेगा फसलों के नुकसान का सटीक आकलन

शुभ्रता मिश्रा | Updated on: 27 May 2017, 13:24 IST

बारिश और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले फसलों के नुकसान का आकलन रिमोट सेंसिंग तकनीक की मदद से अब ज्‍यादा सटीक तरीके से किया जा सकेगा. एक अध्‍ययन में पता चला है कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का आकलन करने में रिमोट सेंसिंग तकनीक ज्‍यादा कारगर साबित हो सकती है.

भारत में अक्सर ओले पड़ने और भारी बारिश के कारण फसलों को बहुत नुकसान होता है और इसका समय पर सटीक मूल्यांकन न हो पाने से किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल पाता है. नई दिल्ली स्थित महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र के अध्‍ययनकर्ताओं ने फसलों के नुकसान के आकलन से जुड़ी इस मुश्किल को दूर करने के लिए अब रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके एक नया रास्ता दिखाया है. यह अध्‍ययन करंट साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

आमतौर पर फसलों के नुकसान का मूल्यांकन अनुमान के आधार पर किया जाता है, जो प्रायः हकीकत से दूर होते हैं. वास्तविक आकलन के लिए बड़े पैमाने पर और जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण करने पड़ते हैं, जिसमें बहुत अधिक समय, धन और श्रम लगता है. इसके बावजूद प्राप्त आंकड़े पूरी तरह सटीक नहीं कहे जा सकते.

रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है. इसमें उपग्रह से प्राप्त चित्रों द्वारा कई तरह के मानचित्र कम समय में आसानी से तैयार किए जा सकते हैं.

इस तकनीक का उपयोग करते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने इसरो के उपग्रह रिसोर्ससेट-2 एडब्ल्यूआईएफएस से प्राप्त आंकड़ों तथा मानचित्रों द्वारा फरवरी और मार्च 2015 के दौरान पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी वर्षा और ओलावृष्टि से बड़े पैमाने पर गेहूं की फसल के नुकसान का मूल्यांकन किया.

 

वैज्ञानिकों ने मध्यप्रदेश के दो जिलों में प्रायोगिक तौर पर फसलों की कटाई से वास्तविक नुकसान का आकलन किया और रिमोट सेंसिंग से प्राप्त आंकड़ों से उनकी तुलना की. उन्होंने पाया कि वास्तविक और रिमोट सेंसिंग से निकाली गई फसल के उत्पादन और हानि के आंकड़े काफी हद तक मेल खाते हैं. अध्‍ययनकर्ताओं की टीम में एसके सिंह, रजत सक्सेना, अखिलेश पोडवाल, नीतू और एसएस रे शामिल थे.

रिमोट सेंसिंग चित्रों के उपयोग से क्षतिग्रस्त फसल क्षेत्र के मूल्यांकन के लिए एक वैज्ञानिक विकल्प मिल गया है. अब कृषि बीमा कंपनियां और नीति निर्माता ओलावृष्टि और भारी बारिश सहित अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों को होने वाले नुकसान का सही आकलन करने के लिए रिमोट सेंसिंग डाटा का उपयोग कर सकते हैं.

अध्‍ययनकर्ताओं के अनुसार फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए यह एक सटीक तरीका साबित हो सकता है. पहले भी इसका इस्तेमाल अमेरिका के कुछ हिस्‍सों में ओलावृष्टि और तूफान के कारण हुए फसलों के नुकसान का पता लगाने के लिए किया जा चुका है. हालांकि, भारत में इस तरह का प्रयोग अभी तक नहीं किया गया था.

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भारत सरकार के हाल ही में लाए गए फसल बीमा कार्यक्रम (प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना) के तहत खेतों के स्तर पर फसलों के नुकसान का आकलन करने में सहायक साबित हो सकती है. इसके लिए बहुत ज्यादा स्पष्ट दिखने वाले रिमोट सेंसिंग चित्रों की आवश्यकता होगी. साथ ही फसल के नुकसान की मात्रा के निर्धारण के लिए रिमोट सेंसिंग सूचकांक-आधारित मॉडल विकसित करने की भी जरूरत है.

(साभारःइंडिया साइंस वायर)

First published: 27 May 2017, 13:24 IST
 
अगली कहानी