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विश्व सांस्कृतिक महोत्सव: पर्यावरण संरक्षण की बहस सांप्रदायिक मोड़ तक जा पहुंची

निहार गोखले | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST
QUICK PILL
  • जनता दल यूनाइटेड (जेडी-यू) के प्रमुख शरद यादव ने आध्यात्मिक गुरु और ऑर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर को गिरफ्तार किए जाने की मांग की. रविशंकर के कार्यक्रम को पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने के कारण 5 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है.
  • पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील यमुना के डूब क्षेत्र में आर्ट ऑफ लिविंग का कार्यक्रम हो रहा है. एनजीटी के विशेषज्ञों की एक टीम कार्यक्रम के बाद क्षेत्र का दौरा स्थिति का जायजा लेगी और फिर उसी के मुताबिक संस्था पर जुर्माना लगाया जाएगा.

दिल्ली में आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार को हुई. हालांकि यह कार्यक्रम सिर्फ और सिर्फ विवादों की वजह से सुर्खियों में रहा. शुक्रवार को यह मामला लोकसभा में उठा. 

जनता दल यूनाइटेड (जेडी-यू) के प्रमुख शरद यादव ने आध्यात्मिक गुरु और ऑर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर को गिरफ्तार किए जाने की मांग की. रविशंकर के कार्यक्रम को पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने के कारण 5 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने का आदेश एनजीटी ने दिया है.

यादव ने कहा, 'क्या श्री श्री रविशंकर कानून से ऊपर हैं? आखिर क्यों नहीं आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है? क्या सरकार रविशंकर को उनके समर्थन की कीमत अदा रही है?'

यादव ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कार्यक्रम में नहीं जाने की सलाह दी थी. यादव ने कहा, 'राष्ट्रपति ने भी कार्यक्रम में जाने से मना कर दिया इसलिए प्रधानमंत्री को भी ऐसा करना चाहिए. हालांकि मोदी ने यादव की सलाह को नजरअंदाज करते हुए कार्यक्रम में जाने का फैसला किया.

ऑर्ट ऑफ लिविंग को समर्थन

कुछ दिनों के भीतर ही आर्ट ऑफ लिविंग को यमुना के डूब क्षेत्र में कार्यक्रम करने से मना कर दिया गया. हालांकि बाद में एनजीटी ने आर्ट ऑफ लिविंग को 5 करोड़ रुपये के जुर्माने के साथ कार्यक्रम किए जाने की मंजूरी दे दी. 

एनजीटी ने कहा कि अगर संस्था जुर्माने का भुगतान नहीं करती है तो उन्हें कार्यक्रम किए जाने की अनुमति नहीं मिलेगी.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के समूह की तरफ से दायर की गई याचिका को सुनने से इनकार कर दिया गया. किसानों के समूह ने कोर्ट से रविशंकर के कार्यक्रम पर रोक लगाने की अपील की थी. अदालत ने भारतीय किसान मजदूर समिति को बताया कि उन्होंने अदालत में आने में देर कर दी. 

जस्टिस टी एस ठाकुर की बेंच ने कहा, 'तो क्या आप इसका इस्तेमाल सुर्खियों में बने रहने के लिए करना चाहते हैं?' अदालत ने याचिकाकर्ता को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल जाने की सलाह दी.

हालांकि आर्ट ऑफ लिविंग के पांच करोड़ रुपये का जुर्माना नहीं भरे जाने की चेतावनी के बाद एनजीटी ने थोड़ी और राहत दी. जबकि एनजीटी ने इससे पहले कहा था कि अगर ऑर्ट ऑफ लिविंग पैसों का भुगतान नहीं करती है तो वह इस कार्यक्रम को रद्द कर देगी.

और पढ़ें: जुर्माना नहीं दूंगा, जेल भले चला जाऊं: श्री श्री रविशंकर

शुक्रवार को ही श्री श्री रविशंकर ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि वह जुर्माने का भुगतान नहीं करेंगे क्येांकि आर्ट ऑफ लिविंग ने कुछ गलत नहीं किया है और वह इसके बदले में जेल जाने को भी तैयार है. हालांकि बाद में एनजीटी ने कहा कि संस्था 11 मार्च की शाम तक जुर्माने का भुगतान कर सकती है.

पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील यमुना के डूब क्षेत्र में आर्ट ऑफ लिविंग का कार्यक्रम हो रहा है.  एनजीटी के विशेषज्ञों की एक टीम कार्यक्रम के बाद क्षेत्र का दौरा स्थिति का जायजा लेगी और फिर उसी के मुताबिक संस्था पर जुर्माना लगाया जाएगा.

आर्ट ऑफ लिविंग का कहना है कि उसने इस कार्यक्रम पर 25 करोड़ रुपये खर्च किए हैं

एनजीटी पर लगाया गया 5 करोड़ रुपये का जुर्माना नुकसान के मुकाबले कुछ भी नहीं है. वाटर सोर्सेज सेक्रेटरी शशि शेखर की अध्यक्षता में एनजीटी की तरफ से बनाई गई विशेषज्ञ समिति का कहना है कि यमुना क्षेत्र में हुए नुकसान की भरपाई में 100-120 करोड़ रुपये की लागत आएगी. आर्ट ऑफ लिविंग का कहना है कि उसने इस कार्यक्रम पर 25 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

हिंदुत्व का पहलू

कार्यक्रम को लेकर बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद दोनों ही आगे आए हैं. परिषद ने 5 करोड़ रुपये के जुर्माने को जजिया कर करार दिया जिसे मुगल शासक हिंदुओं से वसूलते थे. वीएचपी के संयुक्त सचिव सुरेंदर जैन की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, 'धर्मनिरपेक्ष ताकतों को भारत की धार्मिंक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रदर्शन कैसे बर्दाश्त हो सकता था.'

वहीं केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने आर्ट ऑफ लिविंग को अपना समर्थन देते हुए कहा कि पूरा विरोध हिंदू धर्म के खिलाफ है. उन्होंने कहा, 'कोई भी चीज जो हिंदू और भारतीय है, उसका आप विरोध करेंगे.' उन्होंने कांग्रेस के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अपना पक्ष रखा. कांग्रेस ने कहा था कि सरकार ने आर्ट ऑफ  लिविंग कार्यक्रम को रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया.

और पढ़ें: आर्ट ऑफ लिविंग की गुहार, 5 करोड़ हर्जाने के लिए 4 हफ्ते का समय

हिंदुत्व के समर्थकों ने बाटला हाउस और यमुना क्षेत्र से उसकी नजदीकी का हवाला देते हुए कहा कि पर्यावरणविद और एनजीटी आर्ट ऑफ लिविंग को वोट बैंक पॉलिटिक्स की वजह से निशाना बना रहे हैं. यहां तक कि टीवी इंटरव्यू में भी रविशंकर ने बाटला हाउस का जिक्र किया.

याचिकाकर्ता में से एक विमलेंदु झा ने कैच से कहा, 'श्री श्री रविशंकर से लेकर हिंदू महासभा के गुंडे इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं जबकि यह पूरा मामला पर्यावरण से जुड़ा हुआ है. इसका किसी राजनीतिक दल या धार्मिक समूह से कोई लेना देना नहीं है. यह यमुना की किस्मत है जिस पर हम चर्चा कर रहे हैं.'

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First published: 14 March 2016, 12:26 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

संवाददाता, कैच न्यूज़. जल, जंगल, पर्यावरण समेत नीतिगत विषयों पर लिखते हैं.

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