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अमेरिकी वैज्ञानिकों को धरती पर मिला दुनिया की सबसे स्वच्छ हवा वाला स्थान

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 June 2020, 9:11 IST

Place of cleanest air on the Earth: वाहनों, फैक्ट्रियों और तेजी से बढ़ती जनसंख्या (Population) के चलते पृथ्वी (Earth) पर प्रदूषण (Pollution) बढ़ता जा रहा है. जिससे पर्यावरण (Environment) असंतुलित होता जा रहा है. पूरी दुनिया की हवा की गुणवत्ता (Quality of Air) भी पहले के मुकाबले बेहद खराब हो गई है. इसी बीच अमेरिकी वैज्ञानिकों (American Scientist) ने दावा किया है कि उन्होंने पृथ्वी पर एक ऐसे स्थान को खोज निकाला है जहां की हवा सबसे स्वच्छ (Cleanest Air) है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, धरती की सबसे स्वच्छ हवा धरती के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर स्थित अंटार्कटिका महासागर (Antarctica Ocean) के ऊपर से बहती है.

वैज्ञानिकों का दावा है कि ये हवा दुनिया की सबसे स्वच्छ हवा है. जहां मानव गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण रहित कणों से रहित है. अपने तरह के इस पहले शोध में अंटार्कटिक महासागर के बायोएरोसोल का अध्ययन किया गया है. अमेरिका की कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस दौरान एक ऐसे वायुमंडलीय क्षेत्र का पता लगाया, जिस पर मानव गतिविधियों के कारण कोई फर्क नहीं पड़ता. बीते सोमवार को ये शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज पत्रिका में प्रकाशित किया गया. जिसमें बताया गया कि वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र को सही मायने में पवित्र करार दिया है.


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शोधकर्ताओं ने इस स्थान पर पाया कि अंटार्कटिक महासागर के ऊपर चलने वाली हवा मानवीय गतिविधियों के कारण उत्पन्न होने वाले एरोसोल यानी हवा में निलंबित कणों से मुक्त है. इस हवा में जीवाश्म ईंधन, फसलों की कटाई, उर्वरक और अपशिष्ट जल निपटारे आदि के कारण उत्पन्न होने वाले कण मौजूद नहीं थे. बता दें कि एरोसोल ही वायु प्रदूषण का कारण है. एयरोसोल हवा में ठोस-द्रव या गैस के रूप मे मौजूद रहने वाले कण होते हैं. मानवीय गतिविधियों के कारण तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन की वजह से वैज्ञानिकों को धरती पर एक ऐसा स्थान ढूंढ़ने में काफी संघर्ष करना पड़ा, जो मानवीय गतिविधियों से अछूता हो.

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शोध टीम में शामिल प्रोफेसर सोनिया क्रीडेनवीस और उनकी टीम ने संभावना जताई कि अंटार्कटिक सागर के ऊपर मौजूद हवा मानवीय गतिविधियों और धूल के कणों के कारण सबसे कम प्रभावित होती है और आगे भी नहीं होगी. शोध में शामिल वैज्ञानिक थॉमस हिल ने बताया कि अंटार्कटिक महासागर के बादलों के गुणों को एरोसोल नियंत्रित करते हैं जो महासागर की जैविक प्रक्रिया से भी जुड़े हैं. ऐसा लगता है कि अंटार्कटिक महासागर दक्षिणी महाद्वीप से आए सूक्ष्मजीवों और पोषक तत्वों के फैलाव से अलग-थलग है.

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शोधकर्ताओं ने अंटार्कटिक महासागर के ऊपर चलने वाली वायु का नमूना लेकर उसमें मौजूद सूक्ष्म जीवों के बारे में पता लगाया. जिसमें पता लगा कि इनकी उत्पत्ति समुद्र में हुई है. इन सूक्ष्म जीवों के बैक्टीरियल कंपोजिशन के आधार पर दावा किया गया कि काफी दूर स्थित महाद्वीपों पर मौजूद एयरोसोल अंटार्कटिक महासागर की हवा तक नहीं पहुंच सके. बता दें कि ये नया शोध पहले की उस अध्ययन के बिल्कुल विपरीत है जिसमें कहा गया है कि ज्यादातर सूक्ष्म जीव महाद्वीपों की ओर से आने वाली हवा के जरिये ही पूरी पृथ्वी पर फैलते हैं.

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First published: 4 June 2020, 9:11 IST
 
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