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स्मार्टफोन पर व्हॉट्सऐप-फेसबुक का इस्तेमाल भी बढ़ा रहा ग्लोबल वार्मिंग

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
QUICK PILL
  • जब भी आप फेसबुक-व्हॉट्सऐप-गूगल-ईमेल-एसएमएस-कॉल ऐसा कुछ भी करते हैं तो आप दुनिया भर में कार्बन उत्सर्जन कर वैश्विक तापमान बढ़ा रहे होते हैं.
  • दुनिया भर में ईमेल करने से प्रतिवर्ष 40 अरब टन कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2e) वायुमंडल में छोड़ी जा रही है. जबकि एक यूजर द्वारा डेस्कटॉप पर गूगल या अन्य कुछ सर्च करने से 4.5 ग्राम CO2e वायुमंडल में मिल जाती है.

हो सकता है सुनने में आपको अटपटा लगे लेकिन हकीकत यह है कि न केवल वाहन और कारखानें बल्कि आपके गैजेट्स भी ग्लोबल वार्मिंग में इजाफा कर रहे हैं. यानी जब भी आप फेसबुक-व्हॉट्सऐप-गूगल-ईमेल-एसएमएस-कॉल ऐसा कुछ भी करते हैं तो आप दुनिया भर में कार्बन उत्सर्जन कर वैश्विक तापमान बढ़ा रहे होते हैं.

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यूं तो शनिवार 19 मार्च को दुनिया भर के 7000 से ज्यादा शहरों में बिजली बंद कर अर्थ ऑर मनाया गया ताकि कार्बन उत्सर्जन कम करके धरती को बचाने की दिशा में प्रयास किया जा सके. लेकिन दूसरी ओर स्मार्टफोन-लैपटॉप-टैबलेट का इस्तेमाल भी धरती के तापमान में इजाफा कर रहा है.

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दरअसल जिन गैजेट्स का हम इस्तेमाल करते हैं उनकी बैटरी को बिजली से चार्ज करना पड़ता है. इससे बिजली की खपत बढ़ी है. या सीधे शब्दों में कहें तो बिजली के ज्यादा इस्तेमाल ने इसके उत्पादन और आपूर्ति के रूप में कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि कर दी है. 

Nat Geo climate change cover

फ्रांसीसी पर्यावरण एवं ऊर्जा प्रबंधन एजेंसी के अलेन एंग्लेड के मुताबिक, "डिजिटल तकनीकी के विकास के चलते बिजली खपत में विस्फोटक उछाल आया है." अकेले फ्रांस में ही कुल बिजली खपत में 10 फीसदी हिस्सा डिजिटल तकनीकी के उपकरणों का है. अन्य विकसित देशों की भी कुछ ऐसी ही कहानी है.

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एक ओर तो ज्यादा डिजिटल तकनीक के उपभोक्ता बढ़ने से ऐसे उपकरणों की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है. तो दूसरी ओर इन्हें बनाने, लोगों तक पहुंचाने, इस्तेमाल करने में भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन होता है. जिसे हम कार्बन फुटप्रिंट के नाम से जानते हैं.

Vyapam Mobile App (Photo: Getty images)

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जब भी कोई स्मार्टफोन यूजर ईमेल भेजता है, सोशल नेटवर्क पर काम करता है, वीडियो देखता है, गाने सुनता है, कॉल करता है या एसएमएस करता है तो वो अनजाने में ही क्लाइमेट चेंज या भी ग्लोबल वार्मिंग का कारण बन रहा होता है. 

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अनुमान लगाया गया है कि एक छोटी सी ईमेल वातावरण में तकरीबन चार ग्राम (4) कार्बन डाई ऑक्साइड के समकक्ष (CO2e) इजाफा करती है. इस हिसाब से अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप से रोजाना पांच दर्जन ईमेल भेजने का सीधा सा मतलब है कि आप एक औसत कार को एक किलोमीटर चलाने से होने वाला कार्बन उत्सर्जन कर रहे हैं.

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जबकि दुनिया भर में ईमेल करने से प्रतिवर्ष 40 अरब टन कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2e) वायुमंडल में छोड़ी जा रही है. जबकि एक यूजर द्वारा डेस्कटॉप पर गूगल या अन्य कुछ सर्च करने से 4.5 ग्राम CO2e वायुमंडल में मिल जाती है. 

यूं तो यह आंकड़े और बातें चौंकाने वाली हैं लेकिन अगली बार जब भी आप खाली वक्त में यूं ही अपना स्मार्टफोन उठाएं तो उससे पहले पर्यावरण के बारे में जरूर सोचें.

First published: 20 March 2016, 4:27 IST
 
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