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क्या डीजल कारों पर पर्यावरण कर लगाने से हवा बदल जाएगी?

नीरज ठाकुर | Updated on: 16 August 2016, 13:36 IST
(कैच न्यूज)

क्या फेफड़ों की बीमारी से जूझते दिल्लीवासी पैसे देकर अपने लिए शुद्ध हवा खरीद सकते हैं? क्या विश्व में ऐसी कोई तकनीक है, जिसे खरीद कर उससे दिल्ली की विषैली वायु साफ की जा सके और दिल्ली के लोगों की जीवन शैली बदली जा सके?

उक्त दोनों सवालों का जवाब है- नहीं. फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी डीजल कारों, मुख्यतः एसयूवी पर, एक्स शोरूम कीमत पर 1 प्रतिशत कर लगाने का फैसला किया है ताकि दिल्लीवासी प्रदूषित हवा में सांस लेते हुए राहत ले सकें.

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, यह एक प्रतिशत कर केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को मिलेगा, जो कि इसके लिए अलग से सार्वजनिक क्षेत्र के किसी बैंक में एक खाता खोलेगा.

उपभोक्ता की मानसिकता समझनी होगी

इस फैसले पर दो सवाल उठते हैं. पहला, सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए दिसम्बर 2015 में 2000 सीसी और इससे अधिक क्षमता के इंजन वाली बड़ी डीजल कारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था. क्या कोर्ट का यह फैसला इसलिए आया था कि 2014 में खबरों में कहा जा रहा था कि दिल्ली विश्व का सर्वाधिक प्रदूषित शहर है, शायद कोर्ट का फैसला इसके जवाब में आया हो कि दिल्ली को प्रदूषण रहित रखने के उपाय किए जा रहे हैं?

दूसरा, क्या केवल आठ महीने में स्थितियां इतनी सुधर गई हैं कि केवल 1 प्रतिशत कर दिल्लीवासियों को राहत की बिना प्रदूषित सांस दे जाएगा. क्या कर लगाने से कार खरीदने के इच्छुक लोग ऐसी कार नहीं खरीदेंगे, जो और कारों से ज्यादा प्रदूषण फैलाए, इसके लिए उपभोक्ता की मानसिकता समझनी होगी.

पढ़ें: डीजल कार बैन: सुप्रीम कोर्ट को इस तरह धता बता रहे कार डीलर

2000 सीसी या इससे अधिक क्षमता के इंजन वाली कारे अमीर लोग शानौ-शौकत का प्रदर्शन करने के लिए करते हैं. आर्थिक परिप्रेक्ष्य में मर्सिडीज-बेंज या टोयोटा किर्लोस्कर द्वारा बेची जा रही एसयूवी कारों की कीमत रेंज शून्य तक हो सकती है, इसका मतलब उनकी कीमतों में कोई वृद्धि नहीं होगी और उपभोक्ता उन्हें खरीदने से खुद को रोक नहीं पाएंगे.

इसीलिए मर्सिडीज-बेंज, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर प्राइवेट लिमिटेड और सोसायटी फॉर इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैच्चरर (सिएम) लॉबी यह हरित कर खुशी-खुशी देने को तैयार हो गई. क्या आपको लगता है तीस लाख रुपए की मर्सिडीज बेंज खरीदने वाला व्यक्ति केवल 30,000 रुपए अतिरिक्त देने के कारण अपना विचार बदल देगा?

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या 16-20 करोड़ रुपए का हरित कर वसूल रही केंद्र सरकार इस राशि का उपयोग दिल्ली की प्रदूषित वायु को शुद्ध करने में लगा सकेगी?

ग्लोबल वार्मिंग पर भारत तर्क देता है कि विकसित राष्ट्रों को कार्बन उत्सर्जन कम करने का भार उठाना चाहिए

प्रतिबंध हटाने के लिए ऐसे हजारों तर्क दिए जा सकते हैं. पूर्व में डीजल कार निर्माताओं ने तर्क दिया था कि इन कारों को बेवजह गलत ठहराया जा रहा है, जबकि आजकल के डीजल इंजन पुराने इंजनों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाते हैं.

हालांकि आज के ग्लोबल वार्मिंग के दौर में मानव को न केवल कार्बन उत्सर्जन रोक कर प्रदूषण नियंत्रण करना है बल्कि इसे पूर्व औद्योगिक स्तर से 2 डिग्री सेंटीग्रेड कम करना है. इसका एक ही तरीका है, वह यह कि अमीरों को अपनी शानौ-शौकत का दिखावा करने से रोका जाए.

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अन्यथा ये लक्ष्य पूरा करने के लिए किए जा रहे उपायों से समाज के गरीब और निम्न वर्ग के लोग प्रभावित होंगे. मजेदार बात यह है कि ग्लोबल वार्मिंग पर बातचीत के दौरान भारत यह तर्क देता है कि विकसित राष्ट्रों को कार्बन उत्सर्जन कम करने का भार उठाना चाहिए न कि विकासशील राष्ट्रों को. परन्तु भारत खुद अपने ही देश में उच्च वर्ग को प्रदूषण बढाने वाली जीवन शैली अपनाने की छूट देता है.

भारत को यह समझना होगा कि जैसे यह विकासशील देशों के बजाय अमीर विकसित राष्ट्रों को ग्लोबल वार्मिंग का दोषी ठहराता है, वही तर्क भारत सहित विकासशील देशों में रह रहे अमीरों पर भी लागू होता है.

विकसित और विकासशील देशों के अमीर एक ही जैसी जीवनशैली अपनाते हैं. ये दोनों ही अपनी विलासितापूएर्ण जिंदगी जीने के लिए थोड़ा और खर्च करने को तैयार रहते हैं. लेकिन स्वास्थ्य के साथ ही अन्य विसंगतियों के लिए कीमत गरीबों को ही चुकानी पड़ती है.

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बड़ी डीजल कारों पर प्रतिबंध लगा कर अमीरों को अप्रत्यक्ष रूप से यह समझना था कि वे अपनी फिजूलखर्ची में कुछ कमी करें. प्रदूषण कम करने का यही एक मात्र तरीका है.

अफसोस कि हमने उन्हें अपने ही स्तर पर बने रहने की एवज में उनसे केवल कुछ सौ करोड़ वसूलने का विकल्प चुना, इससे जहरीली हवा नहीं बदलेगी, जिसमें हम सांस लेने को मजबूर हैं.

First published: 16 August 2016, 13:36 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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