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जल संकट: क्या लातूर की राह पर है हैदराबाद?

ए साए शेखर | Updated on: 22 April 2016, 14:37 IST
QUICK PILL
  • हैदराबाद में भूजल स्तर काफी नीचे गिर चुका है. इसका व्यापक प्रभाव हैदराबाद और सिकंदराबाद में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है.
  • हैदराबाद शहर को 600 एमजीडी पानी की जरूरत है जबकि वहां 355 एमजीडी की सप्लाई हो रही है.

क्या हैदराबाद भी लातूर की राह पर है? जनसंख्या के मामले में यह शहर लातूर से 15 गुना ज्यादा बड़ा है. मई महीने में हैदराबाद की स्थिति डरावनी हो सकती है. सरकार भी स्वीकार कर रही है कि यहां 'आपातकालीन' स्थिति है.

हैदराबाद में कुछ बार और रेस्तरां ने अपने रेस्टरूम के बाहर साइनबोर्ड लगाए हैं, जिसमें लिखा हुआ है, ''असुविधा के लिए खेद है. यहां पानी नहीं है.'' हालांकि वे लोगों को रेस्टरूम के इस्तेमाल से नहीं रोक रहे हैं.

यहां पानी का स्तर बहुत नीचे जा चुका है. इसका व्यापक प्रभाव हैदराबाद और सिकंदराबाद में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है. बड़ी आईटी कंपनियां और कई इंडस्ट्रीज पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे हैं.

कुछ बड़े कार्यालय परिसरों में सादे पानी की आपूर्ति चुनौती बनती जा रही है और रेस्टरूम्स में कम से कम पानी के इस्तेमाल पर ध्यान दिया जा रहा है.

हैदराबाद शहर जनसंख्या के मामले में लातूर से 15 गुना ज्यादा बड़ा है

आईटी, नगर प्रशासन और पंचायती राज मंत्री केटी रामा राव ने आपातकालीन स्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा है कि शहर में पीने योग्य पानी की 45 से 47 फीसदी तक कमी है.

केटी रामाराव ने कैच से कहा, 'सरकार स्थिति से निपटने के लिए सभी उपाय कर रही है. आपात स्थिति के मद्देनजर सरकार शहर में पीने के पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए दो जलाशयों का निर्माण किया जा रहा है. तत्काल यहां उतनी गंभीर समस्या नहीं है.'

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रामाराव के अनुसार, जहां ट्रीटेट पानी की सुविधा की उपलब्ध है वहां औद्योगिक उपयोग के लिए  सरकार इसका इस्तेमाल अनिवार्य करने जा रही है.

दूसरी ओर अगर किन्हीं कारणों से मॉनसून जून में नहीं पहुंचा तो स्थिति और अधिक बुरी हो सकती है. हैदराबाद मेट्रो जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड ने नागार्जुन सागर जलाशय (कृष्णा नदी का पानी) और येल्लमपल्ली जलाशय (गोदावरी नदी का पानी) से आपातकालीन स्थिति में पानी निकालने का व्यवस्था कर रही है. बोर्ड ने 30 करोड़ रुपये खर्च करके अस्थायी तौर पर इन जलाशयों में पंपिंग स्टेशनों का निर्माण किया है. मई के अंत तक नागार्जुन सागर जलाशय से आपातकालीन स्थिति में पानी निकाला जा सकता है.

मई के अंत तक नागार्जुन सागर जलाशय से आपातकालीन स्थिति में पानी निकाला जा सकता है

वर्तमान में पानी की आपूर्ति तीन चरणों में कृष्णा और गोदावरी नदी से की जा रही है. शहर को 600 एमजीडी पानी की जरूरत है जबकि वहां 355 एमजीडी की सप्लाई हो रही है.

वहीं नागार्जुन सागर और येल्लमपल्ली जलाशय का स्तर भी पिछले साल हुई कम बारिश के चलते घट रहा है. भूजल के घटते स्तर के अलावा उस्मान सागर, हिमायत सगागर, सिंगुर-मंजीरा जैसे पानी के पुराने स्रोत सूख रहे हैं. इन स्रोतों की स्थिति वाकई चिंताजनक है और सूखने के कारण काफी हद तक मानव निर्मित है.

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सरकार ने उस्मान सागर और हिमायत सागर के 10 किलोमीटर की परिधि में अवैध निर्माण पर पाबंदी लगाई थी. हाल में हुए एक सर्वे के अनुसार इस प्रतिबंधित क्षेत्र में 12,362 अवैध निर्माण हुए हैं.

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नागार्जुन सागर में पानी स्तर का 507 फीट (यहां का न्यूनतम स्तर 510 फीट है) नीचे जा चुका है. वहीं येल्लमपल्ली जलाशय की क्षमता 20 हजार मिलियन क्यूबिक है जबकि यहां फिलहाल चार हजार मिलियन क्यूबिक पानी ही उपलब्ध है. येल्लमपल्ली जलाशय हैदराबाद से 186 किमी दूर है. वर्तमान में हैदराबाद शहर की जरूरतों को पूरा करने के लिए यहां से 158 क्यूसेक हर दिन पंप किया जा रहा है.

इस बीच, पानी के टैंकरों की शहर में काफी मांग हैं. साथ ही स्थानीय लोग पानी वितरण में फैले भ्रष्टाचार को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं. लोगों की शिकायतों पर हैदराबाद मेट्रो जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर एम दना किशोर ने मोबाइल ऐप लांच किया है. ऐप के जरिए पानी के टैंकरों की आवाजाही पर नजर रखा जा रहा है. ऐप के जरिए लोग अपनी शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं.

उद्योगों और कंपनियों पर क्या होगा असर?

हैदराबाद में पानी संकट यहां आने वाली आईटी की मुख्य कंपनियों और बड़े उद्योगपतियों को प्रभावित नहीं करेगी? इस सवाल पर ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के कमिश्नर बी जर्नादन रेड़्डी ने कैच से कहा, 'सरकार आपात योजना पर काम रही है. इसमें कोई चिंता की बात नहीं है.'

रिपोर्टों के अनुसार, 45 से अधिक कंपनियों के दिग्गज जिन्हें रंगा रेड्डी जिले में अपनी इकाइयां लगाने की स्वीकृति मिल चुकी है वो अब अधर में लटके हुए हैं. इन फूड प्रोसेसिंग, पॉवर प्रोजेक्ट्स, टेलीकॉम, डेरी और फार्मा कंपनियों को तेलंगाना सरकार ने इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट अप्रूवल एंड सेल्फ सर्टिफिकेशन (आईपीएएसएस) के तहत मूंजरी दी गई थी. इसके अलावा अमेजन जैसी बड़ी कंपनियां यहां अपने यूनिट खोलने के इंतजार में है.

सरकार भी स्वीकार कर रही है कि हैदराबाद में 'आपातकालीन' स्थिति है

इनमें से कुछ इंडस्ट्री अपने प्रोजेक्ट्स शुरू के लिए गहरे बोरवेल खोदना चाहती है. हालांकि, भूजल विभाग ने सर्वे का प्रपोजल देते हुए उनके प्रस्तावों को रोका हुआ है. रंगा रेड्डी जिले के कुछ मंडलों में भूजल का स्तर 20 मीटर से नीचे होने का अनुमान है.

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जर्नादन रेड्डी का मानना है कि आईटी कंपनियां, उद्योगों और आबादी वाले क्षेत्र इस गर्मी में पानी संकट का सामना कर रहे हैं और मियांपुर के आसपास के भूजल पर निर्भरता इस संकट का सबसे बड़ा कारण है.

कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के तेलंगाना इकाई की अध्यक्ष वनिता डाटला ने कैच को बताया विर्निमाण उद्योग को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है लेकिन आईटी कंपनियों को इसका सामना नहीं करना पड़ेगा.

उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता है कि स्थिति अभी इतनी खतरनाक है. अगर वहां अगले दो या तीन साल अच्छा मॉनसून आता है तो समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है.' डाटला का मानना है कि इन स्थितियों का अर्थव्यवस्था पर किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़ेगा.

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वर्षा जल संचयन के महत्व पर जोर देते हुए मंत्री केटी रामा राव ने अधिकारियों से कहा कि उन इमारतों को निर्माण की मंजूरी और पानी कनेक्शन देने की जरूरत नहीं है जो अपने निर्माण में जल संचयन के लिए कोई प्रावधान नहीं कर रहे हैं.

मंत्री राव चाहते हैं कि आईटी पार्क, सरकारी और प्राइवेट कार्यालय परिसरों में वर्षा जल संचयन क्षेत्रों का निर्माण होना चाहिए.

First published: 22 April 2016, 14:37 IST
 
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