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पानी को लेकर लातूर में बनी युद्ध जैसी स्थिति

अश्विन अघोर | Updated on: 21 March 2016, 22:27 IST
QUICK PILL
  • महाराष्ट्र में गहराते जल संकट के बीच टैंकरों के लूटे जाने की घटना को देखते हुए लातूर के जिला प्रशासन ने धारा 144 लगा दिया है ताकि टैंकरों से पानी की आपूर्ति करने के दौरान झड़प और दंगों की स्थिति से निपटा जा सके.
  • लातूर शहर में जहां लोगों को हफ्ते में एक बार पानी की आपूर्ति की जा रही है वहीं ग्रामीण इलाकों में महीने में एक बार पानी की आपूर्ति की जा रही है.

ऐसा कहा जाता है कि अगर दुनिया में तीसरा विश्वयुद्ध होगा वह पानी के लिए होगा. लड़ाई कहना सही तो नहीं होगा लेकिन महाराष्ट्र में पानी को लेकर स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है. पानी की आपूर्ति को लेकर गहराई समस्या ऐसे समय में विकराल हुई है जब पूरा उत्तर भारत होली के दौरान पानी की बर्बादी को लेकर कमर कस चुका है.

जलाशयों में पानी अपनी क्षमता के मुकाबले महज 20 फीसदी ही बचा हुआ है. महाराष्ट्र में लोग पानी की एक बूंद को तरस रहे हैं. ऐसे में अगर उन्हें उनके हिस्से का पानी नहीं मिलता है तो वह दूसरे के हक  का पानी छीनने से भी गुरेज नहीं करेंगे.

लातूर शहर में जहां लोगों को हफ्ते में एक दिन तो अन्य इलाकों में महीने में एक दिन पानी मिल रहा है

लातूर जिले की आबादी पूरी तरह से सरकार की तरफ से भेजे जाने वाले टैंकरों के पानी पर आश्रित है. पानी की गंभीर किल्लत की वजह से लातूर शहर में लोगों को हफ्ते में एक दिन पानी मिल रहा है तो कई अन्य हिस्से में लोगों को महीने में एक दिन पानी की आपूर्ति हो रही है.

हालांकि इस बात की गारंटी नहीं है कि उन्हें महीने में एक दिन भी पानी मिलेगा. लोग अधिक से अधिक मात्रा में पानी जमा करने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. इस वजह से लोगों के बीच झड़पें भी हो रही हैं.

कई मौकों पर टैंकर के ड्राइवर और अन्य स्टाफ टैंकर को तब तक के लिए छोड़ देते हैं जब तक कि उसकी बूंद तक खाली न हो जाए. लोगों की भीड़ और गुस्से की वजह से टैंकरों को नुकसान पहुंचा है. लातूर महाराष्ट्र के उन जिलों में से एक है जिसे सरकार ने सूखा प्रभावित घोषित कर रखा है.

पानी को लेकर दंगों को रोकने की कोशिश

समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगाते हुए पांडुरंग पोल के जिला कलेक्टर ने इस मामले में अभूतपूर्व फैसला लिया है. उन्होंने जिले में धारा 144 लागू कर दिया गया है. इसका मतलब यह हुआ कि  पानी के टैंकर से एक बार में पांच से अधिक लोग पानी नहीं निकाल सकते.

राज्य के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है. जिला कलेक्टर का यह आदेश 31 मई तक जारी रखेगा. जिला प्रशासन ने पानी के टैंकरों और अन्य जलीय स्रोतों की पहचान की है जहां पर हमला होने की संभावना है.

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जिला प्रशासन के एक बड़े अधिकारी ने अपना नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बताया, 'इस बारे में जारी की गई अधिसूचना में उन जलाशयों को भी शामिल किया गया है जहां टैंकरों में पानी भरा जाता है. इसके अलावा उन रास्तों को भी शामिल किया गया है जहां से होकर पानी के टैंकर गुजरते हैं. यह अधिसूचना पूरे जिले के लिए लागू की गई है.'

कई टैंकरों को हाईजैक किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने इस तरह का फैसला लिया है. कुछ मामलों में तो स्थानीय नेताओं की मदद से टैंकरों को लूटा गया. अधिकारी ने कहा कि कुएं पर सैंकड़ों की संख्या में लोग जुट जाते हैं जिससे कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा हो जाती है.

राज्य सरकार के मुताबिक लातूर नगर निगम ने 20 टैंकरों को शहर के लिए तैनात किया है जबकि पूरे जिले के लिए 700 से अधिक टैंकरों की तैनाती की गई है.

हाई प्रोफाइल जिला

लातूर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल का जिला है. इन दोनों कद्दावरों नेताओं के प्रतिनिधित्व के बावजूद महाराष्ट्र का लातूर जिला सबसे अधिक पिछड़ा हुआ है.

हालांकि देशमुख ने इस दिशा में काम करते हुए 2004 में धानेगांव सिंचाई परियोजना की शुरुआत की थी ताकि शहर को चौबीसों घंटे पानी की आपूर्ति की जा सके. उन्होंने कुंओं का पुनर्निमाण और नए बोर वेल की खुदाई करने का काम करवाया लेकिन आज की तारीख में धानेगांव सिंचाई परियोजना पूरी तरह से सूख चुकी है.

विलासराव देशमुख के बेटे अमित देशमुख फिलहाल औरंगाबाद जिले के जायकवाड़ी या सोलापुर जिले के उजैनी बांध से लातूर में पानी लाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि स्थानीय लोगों के जबरदस्त विरोध की वजह से देशमुख की योजना काम करती नहीं दिख रही है.

जिला प्रशासन का धारा 144 लगाने का फैसला गैर सामाजिक तत्वों पर विराम लगाने के साथ पानी की बर्बादी को रोकने का भी है.

लातूर के मेयर अख्तर शेख ने कहा, 'यह एक बेहतरीन फैसला है. कुछ लोगों और नेताओं के टैंकरों के लूटे जाने के बाद जिला प्रशासन को यह फैसला लेना पड़ा. इस वजह से कई जगहों पर झड़प हुई है. जिला प्रशासन ने यह फैसला पूरी तरह से कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए लिया है.' 

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First published: 21 March 2016, 22:27 IST
 
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