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World Earth Day 2018: जीवनदायी पृथ्वी को बचाने की एक पहल

सुहेल खान | Updated on: 22 April 2018, 13:45 IST

आज पूरी दुनिया 48वां विश्व पृथ्वी दिवस मना रही है. हमारी धरती पर बढ़ रहे प्रदूषण और तापमान ने इंसान के सामने तमाम मुश्किलें पैदा कर दी हैं. ऐसे में दुनिया के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है कि पृथ्वी को बचाने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाए. इसी लिए साल में एक दिन हम अपनी जीवनदायी पृथ्वी के नाम करते हैं. इसे हम विश्व पृथ्वी दिवस के रूप में मनाते हैं.

पूरी दुनिया में हर साल 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाता है. पृथ्वी दिवस की शुरुआत एक अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने की थी. गेलॉर्ड ने पृथ्वी को बचाने का वीणा उस वक्त उठाया जब साल 1969 में सांता बारबरा, कैलिफोर्निया में भारी तेल रिसाव हुआ था. बता दें कि इसके लिए पहले पृथ्वी दिवस को ‘यूनाइटेड स्टेट्स एनवॉयरमेंट प्रोटेक्शन एजेंसी‘ की स्थापना की गई. उसके बाद क्लीन एयर, क्लीन वाटर एंड एंडेंजर्ड स्पीसेज (स्वच्छ वायु, स्वच्छ जल व लुप्तप्राय जीव) से जुड़े कानून को स्वीकृति दी गई.

इंसानी सभ्यता पर मंडरा रहा है खतरा

पृथ्वी पर बढ़ रहे इंसानी बोझ, कल कारखानोंं और गाड़ियों के धुंए से निकलने वाली विशैली गैसों की वजह से इंसानी सभ्यता के सामने खतरा पैदा कर दिया. जीवनदायी पृथ्वी ने इंसान को असंख्य ऐसी धरोहरों से नवाजा है जिनका हम दिन रात इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में हम अपनी पृथ्वी मां के जीवन को ही बर्बाद कर रहे हैं. याद रहे अगर पृथ्वी मां बर्बाद हुई तो इंसानी सभ्यता इस दुनिया से जल्द खत्म हो जाएगी.

आपका छोटा का योगदान, बचाएगा पृथ्वी की जान

पूरी दुनिया में आज 6 अरब यानि 6 सौ करोड़ से अधिक इंसानों की संख्या हो चुकी है. इन सब के जीवन का भार अकेले सिर्फ पृथ्वी ही उठा रही हैं. ऐसे में अपनी मां पृथ्वी के लिए हमारा भी कुछ कर्तव्य बनाता है. जैसे हम अपनी जन्म देने वाली मां के प्रति पूरी जिंदगी बफादारी निभाते हैं. वैसे ही अब वक्त आ गया है पृथ्वी मां के लिए बफादारी निभाने का. अगर हम आज नहीं सुधरे तो हमारी ये भूल हमारी सभ्यता को नेस्तनाबूत कर देगी.

इसलिए जरूरी है कि प्राकृतिक संसाधनों का बेहिसाब इस्तेमाल ना करें. जिनमें पानी की बर्बादी से लेकर बाइक में पेट्रोल की खपत तक शामिल है. जहां हो सके ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं. हो सके तो बाइक का प्रयोग उन जगहों पर जाने के लिए ना करें. जहां आप पैदल या साइकिल से जा सकते हैं. पेड़ों को ना काटें.

याद रखें कुदरत ने इस पृथ्वी पर असंख्या जीव-जन्तुओं को जन्म दिया है. ऐसे में उन्हें भी इस जमीन पर रहने का हक है. ऐसे में हो सके तो मांसाहार छोड़कर शाकाहार अपनाएं. क्योंकि पृथ्वी पर हर वो चीज जिसे कुदरत ने पैदा किया है. हमारी दोस्त हैं. उनका खत्म होना भी इंसानी सभ्यता के जल्द बिलुप्त होने की निशानी है.

बेहिसाब पानी की बर्बादी ना करें. पानी इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि इस संसार की हर जीवित जीव-जन्तु, पेड़-पोधों के लिए भी इसकी जरूरत है. इसलिए लिए पानी को बर्बाद ना करें. बारिश के पानी का संरक्षण भी जरूरी है. हो सके तो बारिश के पानी को संरक्षित करने कर सकते हैं.

कागज की बर्बादी ना करें. किसी भी तरह के कागज को बर्बाद करने से उसे दोबारा बनाने के लिए पेड़ पोधों को काटना पड़ता है. अपने घर के आसपास नए पौधे लगाएं. घर और आसपास के इलाके को साफ-सुधरा और हरा-भरा रखें. कूड़े-कचरे को इधर-उधर ना फेंंके. अपने आसपास के पार्क और सड़कों के किनारे लगे पेड़-पौधों को पानी दें.

पेड़ों पर पक्षियों के लिए घोंसले बनाएं. पुरानी चीजों को रिसाइकिल करें और खराब चीजों को ना जलाएं. कहीं भी गंदनी ना फैलाएं और ना ही फैलाने दें. बच्चों को साफ-सफाई की अहमियत बताएं. यात्रा कर रहे हैं तो सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करें और अपने वाहनों का पॉल्‍यूशन चैक करवाएं. इससे वायु प्रदूषण कम होगा.

घर से बाहर जाते वक्त कमरों की सारी लाइटें बंद कर दें. बाइक, कार, स्कूटर आदि वाहनों का इस्तेमाल कम से कम करें. इससे वायु प्रदूषण फैलता है और वातावरण को काफी नुकसान पहुंचता है. सौर ऊर्जा से बनी वस्तुओं का उपयोग करें. जिससे बिजली की खपत कम होगी जो हमारी पृथ्वी को बचाने में अहम भूमिका निभाएगी. बिजली की जगह सौर ऊर्जा का अधिक प्रयोग करें

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First published: 22 April 2018, 13:45 IST
 
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