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World Ozone Day: जानिए क्यों मनाया जाता है विश्व ओजोन दिवस, क्या है इस साल की थीम

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 September 2020, 10:55 IST

World ozone day 2020: पूरे विश्व में हर साल आज का दिन यानी 16 सितंबर ओजोन दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन दुनिया को ये संदेश देने की कोशिश की जाती है कि इंसान के जीवन को सुरक्षित रखने के लिए ओजोन की अतिआवश्यकता है. क्योंकि धरती पर जीवन को पनपने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा है. इतिहास और भूगोल के अध्ययन से यह बात साफ होती है कि धरती पर जीवन की उत्पत्ति के लिए काफ़ी लंबा समय तय किया गया. लेकिन इतनी मेहनत और प्रकृति के फल से मिली इस प्रकृति को इंसान खुद ही नष्ट कर रहा है. इंसान लगातार प्रकृति के कार्यों में हस्तक्षेप कर खुद को प्रकृति को चुनौतियां दे रहा है.

जो आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत परेशानियां पैदा कर सकती है. इंसान लगातार जंगलों, वनों की कटाई कर पृथ्वी पर असंतुलन पैदा कर रहा है. गाड़ियों ने हवा को प्रदूषित कर कर दिया है तो वहीं उस जल को भी इंसान ने नहीं बख्शा जिसकी वजह से धरती पर जीवन संचालित होता है. प्रौद्योगिकी के इस युग में इंसान हर उस चीज़ का हरण कर रहा है जो उसकी प्रगति की राह में रोड़ा बन रही है. इसी तरह इंसान ने अपने आराम और सहूलियत के लिए उस ओज़ोन परत को भी नष्ट करना शुरु कर दिया है उसे हमें सूर्य से निकलने वाली खतरनाक पराबैगनी किरणों से बचाती हैं. दिनों-दिन बढ़ रही औद्योगिक गतिविधियों के कारण आज हमारे जीवन को बचाने वाली ओज़ोन परत को खतरा पैदा हो गया है.


हर साल ओजोन दिवस के मौके पर लोगों को यही सीख दी जाती है कि हमारे जीवन के लिए जरूरी ओजोन परत हम बचा कर रखें. इसके लिए हर साल एक थीम भी बनाई जाती है. इस बार की थीम है 'जीवन के लिए ओजोन' हमें न सिर्फ यह याद दिलाती है कि पृथ्वी पर जीवन के लिए ओजोन महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी याद रखने की ओर संकेत करती है कि हमें अपनी भावी पीढ़ियों के लिए ओजोन परत की रक्षा करना जरूरी है. इस बार विश्व ओजोन दिवस की थीम 'जीवन के लिए ओजोनः ओजोन परत संरक्षण के 35 साल' क्योंकि इस साल हम वैश्विक ओजोन परत संरक्षण का 35वां साल मना रहे हैं.

कब मनाया गया पहली बार ओजोन दिवस-

विश्व ओजोन दिवस पहली बार साल 1995 में मनाया गया था. यह दिन धरती पर पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूरता व ओजोन परत की अहमियत के कारण मनाया जाता है. सूर्य का प्रकाश जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन ओजोन परत जीवन के लिए अतिमहत्वपूर्ण है. बता दें कि जब 1970 के दशक के अंत में काम करने वाले वैज्ञानिकों को पता चला कि मानवता इस सुरक्षात्मक ढाल में एक छेद बना रही है, तो उन्होंने आवाज उठाई. इस पर वैश्विक प्रतिक्रिया निर्णायक थी. उसके बाद साल 1985 में दुनिया की सरकारों ने ओजोन परत के संरक्षण के लिए वियना कन्वेंशन को अपनाया.

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कन्वेंशन के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तरह सरकारों, वैज्ञानिकों और उद्योग ने सभी ओजोन-क्षयकारी पदार्थों को 99 प्रतिशत हिस्से को काटने के लिए मिलकर काम किया. उसके बाद 16 सितंबर को आयोजित विश्व ओजोन दिवस, इस उपलब्धि का जश्न मनाता है. बता दें कि ओजोन परत गैस की एक ऐसी परत है, जो पराबैंगनी किरणों से हमें बचाती है. यह परत हमारे लिए एक फिल्टर का काम करती है, जो मनुष्य और धरती पर मौजूद अन्य जीवों को पराबैंगनी किरणों के हानिकारक प्रभाव से बचाती है. इसलिए इसका संरक्षण करना है बेहद जरूरी.

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ओज़ोन और ओज़ोन परत में अंतर-

बता दें कि ओज़ोन एक हल्के नीले रंग की गैस होती है जो आक्सीजन के तीन परमाणुओं (O3) का यौगिक है. ओज़ोन परत सामान्यत: धरातल से 10 किलोमीटर से 50 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच पाई जाती है. यह गैस सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणों के लिए एक अच्छे फिल्टर का काम करती है. सूर्य से निकलने वाली खतरनाक किरणों से ओज़ोन परत ही इंसानों क बचाती है, मगर जहरीली गैसों से ओज़ोन परत में एक छेद हो गया है और अब इस छेद को भरने के प्रयास हो रहे हैं. यह जहरीली गैसें इंसानों द्वारा एसी और कूलर जैसे उत्पादों में इस्तेमाल होती हैं.

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अपना जीवन अधिक से अधिक आरामदायक बनाने के लिए हम दिन-प्रतिदिन प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं यही उसका नतीजा है. पिछले दो दशकों से समताप मंडल में ओज़ोन की मात्रा कम हो रही है. इसका मुख्य कारण रेफ्रिजरेटर व वातानुकूलित उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली गैस क्लोरो-फ्लोरो कार्बन और हैलोन हैं. यह गैसें ऐरोसोल में तथा फोम की वस्तुओं को फुलाने और आधुनिक अग्निशमन उपकरणों में प्रयोग की जाती हैं. इसके अलावा सुपर सोनिक जेट विमानों से निकलने वाली नाइट्रोजन आक्साइड भी ओज़ोन की मात्रा को कम करने में मदद करती है. ओज़ोन की परत विशेष तौर से ध्रुवीय वातावरण में बहुत कम हो गई है. ओज़ोन परत का एक छिद्र अंटार्कटिका के ऊपर स्थित है.

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First published: 16 September 2020, 10:55 IST
 
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