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वर्ल्ड टाइगर डे: एक सदी में एक लाख बाघ गायब, अब केवल 3890

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 29 July 2016, 7:57 IST
(कैच न्यूज)
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बाघ, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत में हैं

29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य बाघों के आवास को बचाने और उनके संरक्षण के प्रति लोगों को संवेदनशील बनाना है. भारत में इस दिन का खास महत्व है क्योंकि बाघ को यहां राष्ट्रीय पशु का दर्जा प्राप्त है.

बाघों से जुड़े कुछ दिलचस्प आंकड़े:

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  • बाघ इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत में हैं.
  • भारत में कर्नाटक, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और केरल में बाघों की संख्या बढ़ी है.
  • इसके बावजूद भारत अभी भी 2002 के 3,700 के आंकड़े को छू नहीं पाया है.
  • अवैध शिकार और लगातार सिकुड़ते वनों की वजह से आईयूसीएन ने बाघ को एनडेंजर्ड श्रेणी में डाल रखा है.
  • 2008 में भारत में महज 1,411 बाघ बचे थे. एक अनुमान के मुताबिक आजादी के समय भारत में बाघों की संख्या करीब 40,000 थी.

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  • बाघों की संख्या वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड के अनुसार दुनिया भर में हैं.  
  • भारत के बाद दूसरे स्थान पर रूस में 433 बाघ हैं. इंडोनेशिया में 371 तो मलेशिया में 250 बाघ हैं.
  • वन्यजीव समूहों द्वारा एकत्रित आंकड़ों के अनुसार नेपाल, थाइलैंड, बांग्लादेश और भूटान में बाघों की संख्या क्रमश: 198, 189, 106 और 103 है.
  • इनके अलावा अन्य देश जिनमें बाघ पाए जाते हैं उनमें म्यामांर, चीन और लाओस हैं.
  • पिछली बार यानि 2010 में जब बाघों की गिनती की गई थी तब दुनिया में केवल 3,200 बाघ रह गए थे.
  • एक अनुमान से अनुसार सौ साल पहले दुनिया में 1,00,000 (एक लाख) से ज्यादा बाघ थे.

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  • से ज्यादा बाघों की मौतों के मामले इस साल भारत में सामने आए हैं. यानि हर महीने 10 बाघों की मौत हो गईं.
  • वन एवं पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे के अनुसार तस्करों द्वारा मारे जाने की 21 घटनाएं शामिल हैं.
  • मध्य प्रदेश में बाघों की स्थिति सबसे ज्यादा बुरी है. यहां इस साल 19 बाघों की मौत हो चुकी हैं. राज्य में पिछले डेढ़ साल में 34 बाघों की मौत हुई है.
  • भारत में पिछले साल कुल 78 बाघों के मरने की जानकारी मिली है. इनमें तस्करों द्वारा मारने के 14 मामले शामिल हैं.

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  • टाइगर रिजर्व क्षेत्र भारत में हैं. दुनिया की करीब 60 फीसदी बाघों की आबादी भारत में पाई जाती है.
  • बाघों की घटती संख्या पर केंद्र सरकार ने 1973 में नौ टाइगर रिजर्व इलाकों में "बाघ बचाओ योजना" शुरू की. इसे प्रोजेक्ट टाइगर का नाम दिया गया.
  • आज की तारीख में करीब 70,000 वर्ग किलोमीटर का दायरा केवल बाघों के संरक्षण के लिए सुरक्षित किया जा चुका है. इन इलाकों में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी बाघों के रख रखाव का काम करती है.
  • इस साल प्रोजेक्ट टाइगर के लिए बजट में राशि 185 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 380 करोड़ रुपये की गई है.

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  • प्रजातियां बाघ की दुनिया भर के देशों में पाई जाती थी जिनमें से अब 5 ही बची हैं.
  • बाघों के गैरकानूनी शिकार, वन्यजीव तस्करों और जंगलों के सिकुड़ते जाने की वजह से बाघों की संख्या तेजी से घटी.
  • द वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के डेरेन ग्रोवर के अनुसार पिछले 100 से ज्यादा सालों में हमने लगभग 97 फीसदी जंगली बाघों को खो दिया है.
  • पिछले कुछ सालों में बाघों के संरक्षण में आई तेजी के चलते वर्ल्ड लाइफवाइल्ड ने उम्मीद जताई है कि साल 2022 तक बाघों की कुल संख्या 6,400 तक हो जाएगी.

First published: 29 July 2016, 7:57 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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